Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • Danteshwari Temple: जानिए क्यों प्रसिद्ध है दंतेवाड़ा का 400 साल पुराना दंतेश्वरी मंदिर और रहस्यमयी इच्छा-पूर्ति स्तंभ
    • दुनिया का सबसे बड़ा चिड़ियाघर कहां है? जानिए 1800 एकड़ में फैले इस विशाल जू की खासियत
    • रेलवे को बड़ी सौगात: कसारा-मनमाड, दिल्ली-अंबाला और बल्लारी-होसपेटे लाइन का विस्तार
    • वैलेंटाइन डे पर लास्ट मिनट पर करें ये प्लान, लखनऊ की इन जगहों पर बन जायेगा आपका दिन ख़ास
    • मैजेंटा लाइन विस्तार: 89 किमी की सबसे लंबी दिल्ली मेट्रो लाइन, 17 नए इंटरचेंज से बढ़ेगी कनेक्टिविटी
    • India Gate के पास छिपा है दिल्ली का इतिहास, ये 3 जगहें बना देंगी ट्रिप यादगार
    • Chhari Dhandh Wetland: कच्छ का छारी-ढंढ वेटलैंड बना रामसर साइट, 283 से ज्यादा पक्षियों का है बसेरा
    • सिंगापुर जाने वालों के लिए बड़ा अपडेट, 30 जनवरी से लागू हुआ नया नियम
    • About Us
    • Get In Touch
    Facebook X (Twitter) LinkedIn VKontakte
    Janta YojanaJanta Yojana
    Banner
    • HOME
    • ताज़ा खबरें
    • दुनिया
    • ग्राउंड रिपोर्ट
    • अंतराष्ट्रीय
    • मनोरंजन
    • बॉलीवुड
    • क्रिकेट
    • पेरिस ओलंपिक 2024
    Home » बिहार में पुराने चेहरे-पैंतरे से कितनी चल पाएगी राजनीति?
    भारत

    बिहार में पुराने चेहरे-पैंतरे से कितनी चल पाएगी राजनीति?

    By February 26, 2025No Comments6 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    आख़िरकार निशांत कुमार का बयान भी आ गया कि एनडीए को चाहिए कि नीतीश कुमार को ही मुख्यमंत्री बनाए रखने की घोषणा कर दे। निशांत माने नीतीश कुमार के पुत्र। पहली बार सार्वजनिक रूप से ऐसा बयान देकर उन्होंने कई तरह के संकेत दिए। निश्चित रूप से पहला संकेत तो राजनीति में आने का है। बीते बीस साल से मुख्यमंत्री के संग रहने और अकेली संतान होने के चलते सारा लाड़-प्यार पाने के बावजूद अभी तक उनके किसी आचारण को लेकर किसी तरह की चर्चा नहीं थी। बल्कि वे इतने शांत और सावधान तरीके़े से रहते थे कि काफ़ी सारे राजनैतिक पंडित उनके सामान्य होने पर ही शक करते थे। अब अगर वे बीआईटी मेसरा से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद और पचास साल की उम्र में पार्टी तथा समाज के अनेक पक्षों से बार बार की जा रही मांग के बाद सक्रिय होने का फैसला करते हैं तो उन्हें शुभकामना दी जा सकती है। अपनी स्वर्गवासी मां के जन्मदिन पर आयोजित किसी कार्यक्रम में उन्होंने यह बात कही और जदयू का प्रदर्शन पहले से बेहतर होने की बात भी कही।

    और यह संयोग है कि उनका कहना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने बिहार दौरे में नीतीश जी को ‘लाड़ला मुख्यमंत्री’ बताने के दो दिन बाद ही हुआ। प्रधानमंत्री ने इस दौरे के साथ ही भाजपा और एनडीए के चुनाव अभियान का शंखनाद भी कर दिया। इसमें लोगों को पाँच साल पहले करोना महामारी के बीच में ही हजारों रंगीन टीवी सेट के माध्यम से बिहार में ऑनलाइन शंखनाद करने वाला प्रसंग भी याद आया क्योंकि प्रधानमंत्री ने एक साथ बिहार के सारे कोनों को छू लिया था। उन्होंने नीतीश जी को आगे रखकर चुनाव लड़ने की घोषणा नहीं की। शायद उनके पास ऐसा कोई और नाम है भी नहीं। लेकिन बीते साल भर में एनडीए और भाजपा की तरफ से यह कहा जाता रहा है। 

    कमाल यह है कि इसके बावजूद निशांत कुमार को यह बात दोहराने की ज़रूरत हुई। बीते दो तीन महीनों में विपक्षी राजद की तरफ से नीतीश कुमार के एक बार फिर से पाला बदलने की बात उछाली जा रही है और लालू प्रसाद यादव ने अब नीतीश का स्वागत करने की बात भी चला दी है।

    खुद नीतीश कुमार भी इस सवाल पर अपने की आचरणों से संदेह गहरा रहे हैं। दिल्ली के अपने दो दौरों में उन्होंने बीजेपी के किसी नेता से भेंट नहीं की या बीजेपी के शीर्ष नेताओं ने उन्हें समय न दिया। वे दिल्ली में बीजेपी सरकार के शपथ ग्रहण में भी नहीं गए जबकि एनडीए के बाकी सभी मुख्यमंत्री थे। पर उससे भी ज़्यादा चर्चा उनकी पार्टी के दो बड़े नेताओं का दिल्ली आकर पूरी तरह बीजेपी के रंग में रंगना है और इसे राजनैतिक पंडित नीतीश कुमार की घेराबंदी बताते हैं। 

    नीतीश बिहार में भी बीजेपी के एक गुट के व्यवहार को लेकर बहुत प्रसन्न नहीं रहते। यह समूह बीजेपी के अकेले चुनाव लड़ने की वकालत भी करता है। यह अटकल भी लगती है कि चुनाव तक बीजेपी उनको आगे रखकर बाद में कोई और पद या ज़िम्मा दे देगी। नीतीश और उनके समर्थक यह नहीं चाहते।

    अब जाने अनजाने बीजेपी का समर्थन आधार बढ़ता गया है लेकिन अगड़ों को छोड़कर कोई और सामाजिक समूह पक्का समर्थक नहीं है-बीच के प्रयास नीतीश मामले में हां-ना के चक्कर में खिसक गया है।

    इसलिए निशांत के बयान का एक तीसरा मतलब बीजेपी के संग अपनी पार्टी के अगड़े नेताओं के लिए भी है जिनकी बीजेपी से नज़दीकी जगजाहिर है। यही लोग नीतीश कुमार के पाला बदलकर बीजेपी के संग आने का माध्यम भी बने थे और अभी दिल्ली में जमे हैं। बीजेपी को भी इस बयान का मतलब यह निकालना चाहिए कि नीतीश कुमार ललन सिंह, विजय चौधरी और संजय झा जैसों के समानांतर किसी अपने और ज़्यादा भरोसेमंद को खड़ा करना चाहते हैं। निशांत पिता की इच्छा देखकर ही पंख फैलाना शुरू कर रहे हैं। इस क्रम में आईएएस रामचन्द्र प्रसाद सिंह का प्रसंग याद करना चाहिए जो ज़्यादा पंख फैलाकर झुलस चुके हैं। पर जब वे नीतीश जी के साथ थे तो बिना राजनैतिक पृष्ठभूमि के भी सबसे भरोसेमंद थे।

    दूसरी ओर कांग्रेस और राजद के रिश्ते एनडीए के घटकों से भी ज़्यादा ख़राब हैं। हरियाणा का चुनाव हारने के बाद तो अखिलेश और तेजस्वी का रुख भी बदला। दिल्ली चुनाव ने दूरी और बढ़ाई और अब तो एक-दूसरे के ख़िलाफ़ बयानबाजी भी शुरू हो गई है। बीजेपी की तरह कांग्रेस में भी कुछ लोग अलग होकर अकेले चुनाव लड़ने की वकालत कर रहे हैं। कांग्रेस का भी आधार या स्वीकृति बढ़ी है लेकिन कोई एक या दो ठोस सामाजिक आधार नहीं है। मुसलमान समर्थक हैं लेकिन राजद साथ न हो तो उनका वोट मिलने का भरोसा नहीं है। संगठन कमजोर है और अगर कन्हैया कुमार और पप्पू यादव जैसे उत्साही उसके पास हैं तो लालू-तेजस्वी उनको ज़मीन देने को तैयार नहीं हैं। लालू जी ने पिछले लोकसभा चुनाव में अहीरों को कम टिकट दिए, कोइरी समाज को ज़्यादा टिकट दिए और वाम दलों समेत सारे विरोधियों को साथ लेकर अच्छी टक्कर दी लेकिन पहले दो राउंड के बाद बीजेपी ने फिर से जंगल राज का शोर मचाकर बाजी पलट दी।

    इस बार यह शोर पहले से मच रहा है। दूसरी ओर बीजेपी सरकार ने लालू जी और उनके परिवार पर क़ानूनी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है जो चुनाव पास आने तक नाटकीय रूप ले लेगा। लालू जी इससे निजी रूप से कमजोर पड़ें न पड़ें, राजनैतिक रूप से कमजोर होंगे। उधर राजद का मतलब अहीर और मुसलमान गठजोड़ से आगे बढ़ ही नहीं रहा है और ऐसा गठजोड़ जैसे ही ताक़तवर दिखता है बीजेपी को सुविधा हो जाती है और ग़ैर यादव पिछड़ों का वोट बढ़ जाता है तथा अगड़ों का वोट ज़्यादा गोलबंद होकर मिलता है। जब तक नेतृत्व में हिस्सेदारी और लोकतान्त्रिक व्यवहार की उम्मीद न हों दूसरे पास आते नहीं और लालू जी से परिवार से अलग नेता और लोकतान्त्रिक आचारण की उम्मीद करना कुछ ज़्यादा ही मुश्किल लक्ष्य है। दुर्भाग्य यह है कि जिस बिहार को अब नई राजनीति की ज़रूरत है वहाँ सब कुछ दो थके पुराने चेहरों के इर्द-गिर्द चलता दिखता है।

    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
    Previous Articleदक्षिण कोरिया में सरकार की मेहनत रंग लाई, बढ़ने लगी जन्म दर, बहुत तेज घट रही थी जनसंख्या
    Next Article पूर्वी थाईलैंड में पलटी चार्टर्ड बस, हादसे में 18 लोगों की मौत हो गई और 31 अन्य लोग घायल

    Related Posts

    ट्रंप की तकरीर से NATO में दरार!

    June 25, 2025

    ईरान ने माना- उसके परमाणु ठिकानों को काफी नुकसान हुआ, आकलन हो रहा है

    June 25, 2025

    Satya Hindi News Bulletin। 25 जून, शाम तक की ख़बरें

    June 25, 2025
    Leave A Reply Cancel Reply

    ग्रामीण भारत

    गांवों तक आधारभूत संरचनाओं को मज़बूत करने की जरूरत

    December 26, 2024

    बिहार में “हर घर शौचालय’ का लक्ष्य अभी नहीं हुआ है पूरा

    November 19, 2024

    क्यों किसानों के लिए पशुपालन बोझ बनता जा रहा है?

    August 2, 2024

    स्वच्छ भारत के नक़्शे में क्यों नज़र नहीं आती स्लम बस्तियां?

    July 20, 2024

    शहर भी तरस रहा है पानी के लिए

    June 25, 2024
    • Facebook
    • Twitter
    • Instagram
    • Pinterest
    ग्राउंड रिपोर्ट

    मूंग की फसल पर लगा रसायनिक होने का दाग एमपी के किसानों के लिए बनेगा मुसीबत?

    June 22, 2025

    केरल की जमींदार बेटी से छिंदवाड़ा की मदर टेरेसा तक: दयाबाई की कहानी

    June 12, 2025

    जाल में उलझा जीवन: बदहाली, बेरोज़गारी और पहचान के संकट से जूझता फाका

    June 2, 2025

    धूल में दबी जिंदगियां: पन्ना की सिलिकोसिस त्रासदी और जूझते मज़दूर

    May 31, 2025

    मध्य प्रदेश में वनग्रामों को कब मिलेगी कागज़ों की कै़द से आज़ादी?

    May 25, 2025
    About
    About

    Janta Yojana is a Leading News Website Reporting All The Central Government & State Government New & Old Schemes.

    We're social, connect with us:

    Facebook X (Twitter) Pinterest LinkedIn VKontakte
    अंतराष्ट्रीय

    पाकिस्तान में भीख मांगना बना व्यवसाय, भिखारियों के पास हवेली, स्वीमिंग पुल और SUV, जानें कैसे चलता है ये कारोबार

    May 20, 2025

    गाजा में इजरायल का सबसे बड़ा ऑपरेशन, 1 दिन में 151 की मौत, अस्पतालों में फंसे कई

    May 19, 2025

    गाजा पट्टी में तत्काल और स्थायी युद्धविराम का किया आग्रह, फिलिस्तीन और मिस्र की इजरायल से अपील

    May 18, 2025
    एजुकेशन

    गाजियाबाद घटना के बाद महिला आयोग सख्त, ऑनलाइन होमवर्क पर लगाई रोक  

    February 7, 2026

    एग्जाम सेंटर पर रही अनुपस्थित, फिर भी बनी राज्य टॉपर, अब मिली 5 साल जेल की सजा

    February 2, 2026

    लाखों उम्मीदवारों का इंतजार खत्म, IIM कोझिकोड ने घोषित किए CAT 2025 के नतीजे

    December 24, 2025
    Copyright © 2017. Janta Yojana
    • Home
    • Privacy Policy
    • About Us
    • Disclaimer
    • Feedback & Complaint
    • Terms & Conditions

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.