
Uttar Pradesh
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Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश में राजनीति और प्रशासन के टकराव की खबरें लगभग हर हफ्ते किसी न किसी मुद्दे को लेकर सामने आती रहती हैं। अब हाल ही में इसी कड़ी में एक नया मामला सामने आया है जिसने राजनीति और प्रशासन के बीच टकराव को और गंभीर बना दिया है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर के विधायक बेदीराम से विवाद में उलझे CHC प्रभारी डॉ. योगेंद्र यादव पर कार्रवाई हो गई है। स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें तत्काल प्रभाव से पद से निष्कासित कर दिया है और मुख्यालय से अटैच कर दिया है।
आखिर क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, ये मामला उस वक़्त सुर्खियों में आया जब विधायक बेदीराम और CHC प्रभारी डॉ. योगेंद्र यादव के बीच जमकर बहस छिड़ गई। विधायक अपने क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर निरीक्षण के लिए गए थे, जहां अस्पताल की व्यवस्थाओं में कमियों को लेकर उन्होंने गंभीर रूप से नाराज़गी जताई। इस दौरान डॉ. यादव और विधायक के बीच जमकर बहस भी हो गई। इसके बाद ये मामला इतना बढ़ गया कि वीडियो और खबरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं।
स्वास्थ्य विभाग की सख्ती
विवाद बढ़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल इस मामले पर संज्ञान लिया। विभाग ने जांच बैठाई और प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक डॉ. योगेंद्र यादव को CHC प्रभारी के पद से हटा दिया। अब उन्हें मुख्यालय से अटैच कर दिया गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, सरकारी सेवाओं में अनुशासन और जनप्रतिनिधियों के साथ सहयोग बनाए रखना प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी का का है। ऐसे में किसी भी तरह का विवाद बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विधायक का पक्ष
विधायक बेदीराम ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य सिर्फ क्षेत्र की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कराना है। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में गंभीर रूप से अव्यवस्थाएं थीं, जिनकी तरफ ध्यान दिलाने पर डॉ. यादव ने सहयोगात्मक रवैया नहीं दिखाया। उन्होंने कहा, “मैं जनता का प्रतिनिधि हूं, यदि मैं अस्पताल की स्थिति देखकर सवाल खड़े करता हूं तो यह मेरा हक़ है। अधिकारियों को जनता के लाभ के लिए चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ तालमेल बैठाना चाहिए।”
डॉ. यादव का पक्ष
दूसरी तरफ, डॉ. योगेंद्र यादव ने खुद पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि वे निरंतर CHC पर सेवाएं सुधारने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विधायक के साथ बातचीत के दौरान गलतफहमी हो गई, लेकिन उनका किसी का अपमान करने का कोई इरादा नहीं था। हालांकि अब विभागीय आदेश के बाद उन्हें मुख्यालय में रिपोर्ट करने के आदेश दिए गए हैं।
राजनीति में भी गूंज
यह विवाद सिर्फ स्वास्थ्य विभाग तक सीमित नहीं रहा बल्कि अब राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का गंभीर विषय बन गया है। विपक्षी दलों ने इस घटना को अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल की बड़ी कमी बताया। वहीं सत्तारूढ़ दल के नेताओं का कहना है कि जनता से जुड़े मुद्दों पर लापरवाही किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
जनता की उम्मीदें
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में काफी लंबे वक़्त से सुविधाओं की कमी रही है। डॉक्टरों और स्टाफ की अनुपलब्धता, दवाइयों की कमी और मशीनों के खराब रहने की शिकायतें सामान्य हो गयी हैं। ऐसे में विधायक और अधिकारियों के बीच विवाद से आम जनता की समस्याएं ज्यादा बढ़ सकती हैं। लोगों की मांग है कि सरकार विवाद सुलझाने के साथ-साथ अस्पतालों की व्यवस्था सुधारने पर भी गंभीरता से ध्यान दे।
विवाद चाहे जिस भी स्तर हो, उसका खामियाज़ा हमेशा आम जनता को ही भुगतना पड़ता है। अब देखना यह होगा कि मुख्यालय अटैच किए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग CHC की व्यवस्था सुधारने के लिए क्या कदम उठाता है।