
नेता विपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को पुणे की एक विशेष एमपी/एमएलए अदालत में कहा कि उनकी जान को खतरा है। उनका यह बयान उनके और शिकायतकर्ता सत्यकी सावरकर के बीच चल रहे राजनीतिक विवादों और सावरकर के परिवार की पृष्ठभूमि से जुड़ा था। यह मामला उस वक्त उठे जब मार्च 2023 में लंदन में दिए गए राहुल गांधी के एक भाषण में विनायक दामोदर सावरकर के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी की गई थी।
राहुल गांधी ने अपनी याचिका में, जो उनके वकील मिलिंद दत्तात्रेय पवार के जरिए दाखिल की गई थी, राज्य से रोकथाम सुरक्षा की मांग की। उन्होंने इसे एक संवैधानिक दायित्व बताते हुए कहा कि यह कदम मुकदमे की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जरूरी है।
राहुल गांधी ने इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू उठाते हुये कहा कि महात्मा गांधी की हत्या एक सोची-समझी साजिश का परिणाम थी। उन्होंने याचिका में यह भी लिखा कि सत्यकी सावरकर ने 29 जुलाई को दिए गए एक बयान में स्वीकार किया था कि वह नाथूराम गोडसे और गोपाल गोडसे, जो महात्मा गांधी के हत्यारे थे, और विनायक दामोदर सावरकर के सीधे वंशज हैं।
इस बात को ध्यान में रखते हुए, राहुल गांधी की याचिका ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता की वंशावली से जुड़ी हिंसक और संविधान विरोधी प्रवृत्तियों का इतिहास, राहुल गांधी के लिए एक गंभीर खतरे का कारण बन सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि महात्मा गांधी की हत्या एक विशिष्ट विचारधारा के तहत की गई साजिश का हिस्सा थी और ऐसी घटनाओं के पुनरावृत्ति को टाला जाना चाहिए।
राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मामला
यह मामला तब शुरू हुआ जब राहुल गांधी ने लंदन में एक भाषण के दौरान कहा कि विनायक दामोदर सावरकर ने एक मुस्लिम व्यक्ति पर हमला किया था और इसे आनंददायक बताया था। यह दावा उन्होंने सावरकर के कथित लेखों के आधार पर किया था। हालांकि, सत्यकी सावरकर ने इसका खंडन किया और इसे झूठा, भ्रामक और मानहानिकारक बताया।
अब, सत्यकी सावरकर राहुल गांधी की मानहानि के आरोप में उन्हें आईपीसी की धारा 500 के तहत दोषी ठहराने और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 357 के तहत मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी।