
Vice President of India 2025
Vice President of India 2025
Vice President of India 2025: देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद अब नए उपराष्ट्रपति के नाम को लेकर राजनीतिक गलियारों हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें स्वास्थ्य लाभ की शुभकामनाएं दी हैं। अब संविधान के अनुच्छेद 68 के अंतर्गत छह महीने के अंदर, यानी सितंबर 2025 तक नए उपराष्ट्रपति का चुनाव होना अनिवार्य है।
गौर करने वाली बात यह है कि यह समयसीमा बिहार विधानसभा चुनावों से ठीक पहले की है और ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा इस संवैधानिक नियुक्ति का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए अवश्य करेगी।
बिहार फॉर्मूला: हरिवंश सिंह सबसे आगे?
बिहार को ध्यान में रखते हुए जिन नामों की सबसे अधिक चर्चा हो रही है, उनमें राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह सबसे आगे हैं। वे न सिर्फ JDU के वरिष्ठ नेता हैं, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के बेहद करीबी माने जाते हैं और राज्यसभा संचालन का अनुभव भी रखते हैं। इसके अलावा अन्य नामों में कर्पूरी ठाकुर के पुत्र रामनाथ ठाकुर और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का भी नाम शामिल हैं, लेकिन नीतीश कुमार की स्वास्थ्य स्थिति और मौजूदा भूमिका उन्हें इस पद के लिए उपयुक्त नहीं बनाती। वहीं रामनाथ ठाकुर को भारत रत्न दिए जाने के बाद, उनकी उम्मीदवारी की संभावना कम हो जाती है।
नड्डा, राजनाथ, गडकरी या निर्मला?
जेपी नड्डा, जिनका अध्यक्ष पद का कार्यकाल मार्च 2025 में खत्म हो रहा है, मोदी-शाह के करीबी हैं और उन्हें उपराष्ट्रपति बनाकर पार्टी में नई संतुलन हो सकता है। राजनाथ सिंह का नाम भी सामने आ रहा है, लेकिन रक्षा मंत्री के तौर पर उनकी महत्वपूर्ण भूमिका उनके नाम को कमजोर बनाती है। नितिन गडकरी, जो RSS के करीबी माने जाते हैं, शायद ही मोदी-शाह की पहली पसंद हों।
निर्मला सीतारमण को दक्षिण भारत और महिला प्रतिनिधित्व के कारण कुछ लाभ मिल सकता है, लेकिन राष्ट्रपति पहले से महिला होने के कारण यह संतुलन शायद न बदले।
क्या कांग्रेस को तोड़ने की कोशिश है थरूर का नाम?
शशि थरूर का नाम भी चर्चाओं में बना हुआ है, जिसे कई पत्रकारों ने कांग्रेस को घेरने की भाजपा की रणनीति बताया है। थरूर हाल के सालों में प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति और कुछ अभियानों की प्रशंसा कर चुके हैं। लेकिन उन्हें उपराष्ट्रपति बनने के लिए या तो भाजपा में शामिल होना पड़ेगा या सर्वसम्मति वाले उम्मीदवार के रूप में उभरना होगा — जो वर्तमान परिस्थिति में बेहद मुश्किल लगता है।
सहयोगी दलों को साधने की तैयारी
NDA के पास संसद में बहुमत है लेकिन सहयोगी दलों के समर्थन के बिना भाजपा कोई बड़ा कदम नहीं उठाना चाहेगी। इसलिए हरिवंश नारायण सिंह जैसे नाम पर दांव लगाना तर्कसंगत होगा, जिससे बिहार विधानसभा चुनावों में गठबंधन की ताकत भी मजबूत हो।
फैसला अभी बाकी, पर संकेत साफ हैं
हालांकि भाजपा का अंतिम फैसला हमेशा रहस्यमय रहता है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को देखें तो हरिवंश नारायण सिंह की उम्मीदवारी सबसे व्यावहारिक मानी जा रही है। वहीं भाजपा अपने अंदरुनी समीकरणों और सहयोगियों को ध्यान में रखकर अंतिम नाम तय करेगी। बता दे, उपराष्ट्रपति पद के लिए उठने वाले हर क़दम पर अब देश की निगाहें टिकी होंगी।