
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के एक हालिया बयान ने सियासी गलियारों में एक बार फिर हलचल मचा दी है। शनिवार को कांग्रेस के वार्षिक लीगल कॉन्क्लेव के दौरान उन्होंने दिवंगत पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली को लेकर ऐसा दावा किया, जिस पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी आपत्ति जताई और उसे फेक न्यूज करार दिया।
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा, मुझे याद है जब मैं कृषि कानूनों के खिलाफ संघर्ष कर रहा था… वो (अरुण जेटली) अब हमारे बीच नहीं हैं, इसलिए शायद मुझे ऐसा नहीं कहना चाहिए, लेकिन फिर भी कहूंगा। उन्हें मुझे धमकाने के लिए भेजा गया था।”
राहुल ने आगे बताया कि अरुण जेटली ने उन्हें चेतावनी दी थी, अगर तुम सरकार का विरोध करते रहे और कृषि कानूनों पर हमारे खिलाफ मोर्चा खोलते रहे, तो हमें तुम्हारे खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ेगी।
इसके जवाब में राहुल ने कहा, मैंने उन्हें साफ कहा कि शायद आपको अंदाजा नहीं है कि आप किससे बात कर रहे हैं। हम कांग्रेस वाले हैं ना डरते हैं, ना झुकते हैं। हमें तो अंग्रेज नहीं झुका पाये।
BJP का पलटवार, झूठ पर झूठ बोल रहे हैं राहुल गांधी
राहुल गांधी के इस बयान पर भाजपा ने तुरंत तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, Fake News Alert! राहुल गांधी का दावा है कि अरुण जेटली ने उन्हें 2020 में कृषि कानूनों पर धमकाया था, जबकि जेटली जी का निधन 24 अगस्त 2019 को हो गया था।

मालवीय ने यह भी स्पष्ट किया कि कृषि कानूनों का प्रारूप जून 2020 में केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष पेश किया गया था और ये कानून सितंबर 2020 में संसद से पारित हुए। ऐसे में राहुल गांधी का दावा न सिर्फ तथ्यात्मक रूप से गलत है, बल्कि जानबूझकर गढ़ी गई राजनीतिक कहानी प्रतीत होता है।
बेटा बोला, पिता की आत्मा को शांति से रहने दें
अरुण जेटली के बेटे और डीडीसीए अध्यक्ष रोहन जेटली ने भी राहुल के बयान पर नाराजगी जताई। उन्होंने लिखा, राहुल गांधी कह रहे हैं कि मेरे पिता ने कृषि कानूनों पर उन्हें धमकाया था, जबकि उनका निधन 2019 में हो गया था और ये कानून 2020 में आए थे।
उन्होंने कहा कि उनके पिता कभी भी किसी को विचारों के विरोध पर धमकाने वाले नहीं थे। वो एक सच्चे लोकतांत्रिक थे जो संवाद और सम्मान में विश्वास रखते थे। राहुल गांधी को अब हमारे बीच न रहने वालों के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।