Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • कृषि भवन, शास्त्री भवन होंगे ध्वस्त, सेंट्रल विस्टा में बनेंगी 3 हजार करोड़ से नई बिल्डिंगें
    • Nawabon Ki Nagri : लखनऊ नहीं बल्कि इस शहर को भी कहते हैं नवाबों की नगरी
    • Lucknow Gomti River Cruise: लखनऊ में चलेगा गोमती रिवर क्रूज़, ओपन एयर रेस्टोरेंट और पार्टी की मिलेगी सुविधाएं
    • लखनऊ के राष्ट्र प्रेरणा स्थल में अब देना होगा इतना प्रवेश शुल्क, यूपी दिवस पर बहुत कुछ है ख़ास
    • Kaushambi History: ये है राजा परीक्षित का किला, जो महाभारत काल से जुड़ा हुआ है
    • Bateshwar Bah Agra: आगरा का रहस्यमयी बटेश्वर: शिव मंदिर, डाकुओं की आस्था और यमुना का अनोखा प्रवाह
    • Best Eye Surgeons:ये हैं लखनऊ के बेस्ट आई सर्जन की लिस्ट, जानिए कौन हैं सबसे अनुभवी आँखों के डॉक्टर
    • Lucknow Orthopedic Doctors: ये हैं लखनऊ के बेस्ट ऑर्थोपेडिक डॉक्टर्स की लिस्ट
    • About Us
    • Get In Touch
    Facebook X (Twitter) LinkedIn VKontakte
    Janta YojanaJanta Yojana
    Banner
    • HOME
    • ताज़ा खबरें
    • दुनिया
    • ग्राउंड रिपोर्ट
    • अंतराष्ट्रीय
    • मनोरंजन
    • बॉलीवुड
    • क्रिकेट
    • पेरिस ओलंपिक 2024
    Home » Ulka Pind Kya Hain: किन-किन जगहों पर गिरे हैं उल्का पिंड, कैसे गिरते हैं उल्का पिंड क्या कारण हैं, आइए जानते हैं
    Tourism

    Ulka Pind Kya Hain: किन-किन जगहों पर गिरे हैं उल्का पिंड, कैसे गिरते हैं उल्का पिंड क्या कारण हैं, आइए जानते हैं

    By March 10, 2025No Comments6 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    Ulka Pind Kya Hai (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

    Ulka Pind Kya Hai (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

    Ulka Pind Kya Hota Hai: उल्का पिंड अंतरिक्ष से धरती पर गिरने वाले बड़े पत्थर या धातु के टुकड़े होते हैं, जो पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते ही घर्षण के कारण जलने लगते हैं। कभी-कभी ये जलने के बावजूद पूर्ण रूप से नष्ट नहीं होते और जब यह धरती से टकराते हैं, तो बड़े-बड़े गड्ढे बना देते हैं। कुछ स्थानों पर ये गड्ढे समय के साथ झीलों में परिवर्तित हो गए। भारत और विश्वभर में ऐसे कई स्थान हैं जहां उल्का पिंड के गिरने से गड्ढे बने, जिनका ऐतिहासिक और वैज्ञानिक महत्व बहुत अधिक है।

    भारत में उल्का पिंड गिरने से बने प्रमुख स्थान

    भारत में कई स्थानों पर उल्का पिंडों के गिरने के प्रमाण मिले हैं, जिनमें सबसे प्रसिद्ध लोणार झील, रामगढ़ क्रेटर और शिवपुरी की डोहन झील हैं।

    लोणार झील (Lonar Lake)

    महाराष्ट्र की लोणार झील, भारत में उल्का पिंड के प्रभाव से बनी सबसे प्रसिद्ध झीलों में से एक है। यह झील लगभग 52,000 साल पहले एक बड़े उल्का पिंड के टकराने से बनी थी, जिसका व्यास लगभग 1.8 किलोमीटर और गहराई 137 मीटर है। यह झील विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें मीठे और खारे पानी की दो परतें पाई जाती हैं, जो इसे वैज्ञानिकों के लिए एक शोध का अनूठा केंद्र बनाती हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और महाराष्ट्र सरकार ने इस झील को संरक्षित करने के लिए इसे ‘वन्यजीव अभयारण्य’ घोषित किया है।

    वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध बताते हैं कि इस झील के चारों ओर की मिट्टी और चट्टानों में उच्च मात्रा में ग्लासीय संरचनाएँ और बैक्टीरिया पाए जाते हैं, जो मंगल ग्रह की सतह से मिलते-जुलते हैं। इस झील को पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनाने के लिए राज्य सरकार ने इसे “अंतरिक्ष विज्ञान केंद्र” के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है।

    (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

    (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

    रामगढ़ क्रेटर (Ramgarh Crater)

    राजस्थान के बारां जिले में स्थित रामगढ़ क्रेटर भी उल्का पिंड के प्रभाव से बनी एक महत्वपूर्ण संरचना है। इसका व्यास लगभग 3.5 किलोमीटर है और वैज्ञानिकों के अनुसार, यह लगभग 800,000 साल पहले उल्का पिंड के गिरने से बना था। चारों ओर घने जंगलों से घिरा यह क्रेटर पर्यटन के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल बन सकता है। हालांकि अभी तक इसे संरक्षित क्षेत्र घोषित नहीं किया गया है, लेकिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने इसे ऐतिहासिक धरोहर के रूप में मान्यता देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    डोहन झील

    मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित डोहन झील भी उल्का पिंड के गिरने से बनी मानी जाती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि हजारों साल पहले एक उल्का पिंड के टकराने से यह झील बनी थी, जो समय के साथ एक प्राकृतिक जलाशय के रूप में विकसित हो गई। राज्य सरकार ने इसे पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र मानते हुए इसके संरक्षण की योजना बनाई है और इसे एक इको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित किया जा रहा है।

    विश्व में उल्का पिंड गिरने से बने प्रमुख स्थान (Places Formed Due To Fall Of Meteorite)

    भारत के अलावा दुनिया में भी कई स्थानों पर उल्का पिंडों के गिरने से विशाल गड्ढे बने हैं। इनमें अमेरिका का बैरिंगर क्रेटर, रूस का तुंगुस्का प्रभाव क्षेत्र और कनाडा की मानिकौगन झील प्रमुख हैं।

    बैरिंगर क्रेटर (Barringer Crater)

    (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

    (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

    अमेरिका में स्थित बैरिंगर क्रेटर, जिसे “मेट्योर क्रेटर” भी कहा जाता है, दुनिया का सबसे प्रसिद्ध उल्का प्रभाव स्थल है। यह लगभग 50,000 साल पहले एक उल्का पिंड के गिरने से बना था, जिसकी चौड़ाई 1.2 किलोमीटर और गहराई लगभग 170 मीटर है। इस क्रेटर का नाम अमेरिकी वैज्ञानिक डेनियल बैरिंगर के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने पहली बार यह सिद्ध किया कि यह गड्ढा वास्तव में एक उल्का पिंड के प्रभाव से बना था। अमेरिकी सरकार और नासा इस क्रेटर का गहन अध्ययन कर रहे हैं और इसे एक महत्वपूर्ण भूवैज्ञानिक स्थल के रूप में संरक्षित किया गया है।

    तुंगुस्का (Tunguska)

    (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

    (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

    रूस में तुंगुस्का घटना, जिसे उल्का प्रभाव का सबसे बड़ा उदाहरण माना जाता है, 30 जून 1908 को हुई थी। इस दिन साइबेरिया के तुंगुस्का क्षेत्र में एक विशाल उल्का पिंड या धूमकेतु के टकराने से लगभग 2,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में पेड़ नष्ट हो गए। हालांकि इस घटना में कोई गड्ढा नहीं बना, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि यह एक वायुमंडलीय विस्फोट था, जिसने पूरे क्षेत्र में जबरदस्त तबाही मचाई थी। इस घटना पर आज भी शोध किया जा रहा है, और रूस सरकार ने इसे संरक्षित क्षेत्र घोषित कर दिया है।

    मानिकौगन झील (Manicouagan Lake)

    (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

    (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

    कनाडा की मानिकौगन झील भी उल्का पिंड के प्रभाव से बनी मानी जाती है। इसका व्यास लगभग 100 किलोमीटर है और वैज्ञानिकों का मानना है कि यह झील लगभग 215 मिलियन वर्ष पहले एक बड़े उल्का पिंड के टकराने से बनी थी। यह झील उपग्रह से देखने पर एक पूर्ण गोलाकार आकृति में दिखाई देती है, जो इसे अन्य झीलों से अलग बनाती है। कनाडा सरकार और अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्थाएँ इस झील पर शोध कर रही हैं ताकि पृथ्वी पर उल्का प्रभावों के दीर्घकालिक प्रभावों को समझा जा सके।

    सरकारों द्वारा उठाए गए कदम और वैज्ञानिक अनुसंधान

    विश्वभर की सरकारें और वैज्ञानिक संस्थान उल्का पिंडों के प्रभाव से बने गड्ढों और झीलों पर शोध कर रहे हैं ताकि यह समझा जा सके कि पृथ्वी पर ऐसे प्रभाव किस प्रकार बदलते रहे हैं। भारत सरकार ने लोणार झील जैसे महत्वपूर्ण स्थलों को संरक्षित करने के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं। महाराष्ट्र सरकार ने इसे जैव-विविधता संरक्षण क्षेत्र घोषित किया है और वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देने के लिए विशेष अनुदान भी दिया है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) जैसे संगठन उल्का पिंडों के प्रभाव और उनके संभावित खतरों पर शोध कर रहे हैं। नासा का “प्लैनेटरी डिफेंस कोऑर्डिनेशन ऑफिस” पृथ्वी की ओर आने वाले संभावित खतरनाक उल्का पिंडों पर नजर रखता है और भविष्य में ऐसे टकरावों को रोकने के लिए संभावित तकनीकों पर काम कर रहा है।

    उल्का पिंडों के प्रभाव से बने गड्ढे और झीलें न केवल भूवैज्ञानिक महत्व रखती हैं, बल्कि वे अंतरिक्ष विज्ञान और पृथ्वी के अतीत को समझने के लिए भी आवश्यक हैं। भारत और दुनिया के कई स्थानों पर उल्का पिंडों के गिरने से प्राकृतिक संरचनाएँ बनी हैं, जिन्हें संरक्षित करना और उनका अध्ययन करना महत्वपूर्ण है। सरकारें और वैज्ञानिक संस्थान इन घटनाओं के अध्ययन के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं ताकि भविष्य में पृथ्वी पर उल्का प्रभाव से होने वाले खतरों को रोका जा सके।

    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
    Previous Articleमार्क कार्नी होंगे कनाडा के अगले पीएम, ट्रूडो की जगह लेंगे, क्या है बड़ी चुनौती?
    Next Article भारत की जीत के बाद महू में रैली, हिंसा के लिए जिम्मेदार कौन?

    Related Posts

    कृषि भवन, शास्त्री भवन होंगे ध्वस्त, सेंट्रल विस्टा में बनेंगी 3 हजार करोड़ से नई बिल्डिंगें

    January 26, 2026

    Nawabon Ki Nagri : लखनऊ नहीं बल्कि इस शहर को भी कहते हैं नवाबों की नगरी

    January 26, 2026

    Lucknow Gomti River Cruise: लखनऊ में चलेगा गोमती रिवर क्रूज़, ओपन एयर रेस्टोरेंट और पार्टी की मिलेगी सुविधाएं

    January 25, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    ग्रामीण भारत

    गांवों तक आधारभूत संरचनाओं को मज़बूत करने की जरूरत

    December 26, 2024

    बिहार में “हर घर शौचालय’ का लक्ष्य अभी नहीं हुआ है पूरा

    November 19, 2024

    क्यों किसानों के लिए पशुपालन बोझ बनता जा रहा है?

    August 2, 2024

    स्वच्छ भारत के नक़्शे में क्यों नज़र नहीं आती स्लम बस्तियां?

    July 20, 2024

    शहर भी तरस रहा है पानी के लिए

    June 25, 2024
    • Facebook
    • Twitter
    • Instagram
    • Pinterest
    ग्राउंड रिपोर्ट

    मूंग की फसल पर लगा रसायनिक होने का दाग एमपी के किसानों के लिए बनेगा मुसीबत?

    June 22, 2025

    केरल की जमींदार बेटी से छिंदवाड़ा की मदर टेरेसा तक: दयाबाई की कहानी

    June 12, 2025

    जाल में उलझा जीवन: बदहाली, बेरोज़गारी और पहचान के संकट से जूझता फाका

    June 2, 2025

    धूल में दबी जिंदगियां: पन्ना की सिलिकोसिस त्रासदी और जूझते मज़दूर

    May 31, 2025

    मध्य प्रदेश में वनग्रामों को कब मिलेगी कागज़ों की कै़द से आज़ादी?

    May 25, 2025
    About
    About

    Janta Yojana is a Leading News Website Reporting All The Central Government & State Government New & Old Schemes.

    We're social, connect with us:

    Facebook X (Twitter) Pinterest LinkedIn VKontakte
    अंतराष्ट्रीय

    पाकिस्तान में भीख मांगना बना व्यवसाय, भिखारियों के पास हवेली, स्वीमिंग पुल और SUV, जानें कैसे चलता है ये कारोबार

    May 20, 2025

    गाजा में इजरायल का सबसे बड़ा ऑपरेशन, 1 दिन में 151 की मौत, अस्पतालों में फंसे कई

    May 19, 2025

    गाजा पट्टी में तत्काल और स्थायी युद्धविराम का किया आग्रह, फिलिस्तीन और मिस्र की इजरायल से अपील

    May 18, 2025
    एजुकेशन

    लाखों उम्मीदवारों का इंतजार खत्म, IIM कोझिकोड ने घोषित किए CAT 2025 के नतीजे

    December 24, 2025

    मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने माहेश्वरी प्रसाद इंटर कॉलेज के वार्षिक समारोह में किया शिरकत, गरीब बच्चों की शिक्षा पहल की खुले दिल से प्रशंसा की

    November 1, 2025

    Doon Defence Dreamers ने मचाया धमाल, NDA-II 2025 में 710+ छात्रों की ऐतिहासिक सफलता से बनाया नया रिकॉर्ड

    October 6, 2025
    Copyright © 2017. Janta Yojana
    • Home
    • Privacy Policy
    • About Us
    • Disclaimer
    • Feedback & Complaint
    • Terms & Conditions

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.