
Jagdeep Dhankhar Biography (Image Credit-Social Media)
Jagdeep Dhankhar Biography (Image Credit-Social Media)
नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने वाले जगदीप धनखड़ का सफर काफी दिलचस्प रहा है। एक किसान में जन्मे जगदीप ने वकालत के बाद राजनीतिक यात्रा करते हुए देश के उपराष्ट्रपति पद को हासिल किया। जगदीप धनखड़ के बारे में कहा जाता है कि वे कभी पेशेवर राजनीतिज्ञ नहीं रहे। हालांकि उन्होंने अपने राजनीतिक सफर में तीन दलों की यात्रा की – जनता दल, काँग्रेस और भाजपा।
राजनीतिक सफर
धनखड़ ने अपना राजनीतिक सफर जनता दल के साथ शुरू किया था और बोफोर्स घोटाले वाले दौर में 1989 में झुंझुनूं से लोकसभा चुनाव जीत कर सांसद बन गए थे। वे तत्कालीन पीएम चंद्रशेखर की सरकार में कुछ समय के लिए संसदीय कार्य राज्य मंत्री रहे। देवी लाल से प्रभावित रहे धनखड़ ने बाद में पीवी नरसिम्हाराव के दौर में काँग्रेस का दामन थाम लिया।

कांग्रेस के बाद धनखड़ दस साल के लिए राजनीति से दूर रहे और वकालत करते रहे। 2008 में जाकर भाजपा जॉइन की। और 2019 में उन्हें जब बंगाल का गवर्नर बनाया गया तो ये एक चौंकाने वाला वाकया रहा। वजह ये थी कि इससे पहले राजनीतिक हलकों में धनखड़ एक अनजाना सा नाम थे। उनकी इसके पहले की उपलब्धि यही थी कि वे 1993 से 98 तक राजस्थान में कांग्रेस के विधायक रहे थे।
जब वे गवर्नर बने तो लगातार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से तनातनी बनी रही। गर्वनर पद से हटने के बाद धनखड़ को भाजपा ने किसान नेता के तौर पर प्रोजेक्ट किया और ‘किसान पुत्र’ करार देते हुए उन्हें उपराष्ट्रपति पद के लिए मनोनीत किया।
किसान परिवार में जन्मे
जगदीप धनखड़ का जन्म 18 मई, 1951 को राजस्थान के झुंझुनू जिले के एक सुदूर गाँव के एक कृषक परिवार में हुआ था। चित्तौड़गढ़ के सैनिक स्कूल से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने भौतिकी में स्नातक की उपाधि प्राप्त की और फिर राजस्थान विश्वविद्यालय से एलएलबी की उपाधि प्राप्त की।
सफल वकील

जगदीप धनखड़ ने एलएलबी करने के बाद वकालत का पेशा अपनाया और मेहनत के बल पर राजस्थान के अग्रणी वकीलों में से एक बन गए और राजस्थान उच्च न्यायालय तथा सर्वोच्च न्यायालय, दोनों में वकालत की। वे राजस्थान उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे।।धनखड़ ने राजस्थान में जाट समुदाय को ओबीसी का दर्जा देने सहित अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित मुद्दों पर वकालत करते हुए इन समुदायों में राजनीतिक कद हासिल किया।
अब ये देखना दिलचस्प होगा कि धनखड़ पूरी तरह रिटायरमेंट में चले जायेंगे या अभी उनकी कोई और राजनीतिक यात्रा देखने को मिलेगी।