
Union Budget 2026-27: 50 Tourist Spots, Big Boost for Small Cities
Union Budget 2026-27: पर्यटन देश के विकास में हमेशा से ही बड़ी भूमिका निभाता आया है। यह न सिर्फ विदेशी मुद्रा अर्जित करने का माध्यम है, बल्कि स्थानीय रोजगार, छोटे कारोबार और सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती देता है। होटल, होमस्टे, परिवहन, हस्तशिल्प और गाइड सेवाओं जैसे क्षेत्रों में लाखों लोगों को सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से काम मिलता है। यही कारण है कि सरकार पर्यटन को आर्थिक विकास और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत स्तंभ के रूप में देख रही है। केंद्र सरकार ने बजट 2026-27 में पर्यटन को आर्थिक विकास और रोजगार सृजन का बड़ा जरिया बनाने का स्पष्ट रोडमैप पेश किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया कि देशभर में 50 प्रमुख पर्यटन स्थलों को विकसित किया जाएगा, जिससे होमस्टे, होटल और ट्रैवल से जुड़े कारोबार को नई रफ्तार मिलेगी। इसके साथ ही टियर-2 और टियर-3 शहरों, खासकर मंदिर और धार्मिक शहरों की शहरी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए अगले पांच साल में 20,000 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि छोटे और मझोले शहर ही भारत की भविष्य की आर्थिक ताकत बन सकते हैं।
छोटे शहरों पर बड़ा फोकस
बजट 2026 का सबसे अहम संदेश यही है कि अब विकास केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार टियर-2 और टियर-3 शहरों को बेहतर सड़क, पानी, सफाई, परिवहन और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी सुविधाओं से लैस करना चाहती है। वित्त मंत्री ने कहा कि इन शहरों में निवेश और रोजगार की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें अब नीति और संसाधनों के जरिए आगे बढ़ाया जाएगा।
धार्मिक और ऐतिहासिक शहरों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी, क्योंकि यहां पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय रोजगार की संभावना सबसे अधिक होती है। इससे छोटे शहरों से बड़े शहरों की ओर होने वाले पलायन को भी कम किया जा सकेगा।
‘सिटी इकोनॉमिक रीजन’ की पहचान
सरकार शहरों को उनके आर्थिक सामर्थ्य के आधार पर ‘सिटी इकोनॉमिक रीजन’ (CER) के रूप में चिन्हित करेगी। हर रीजन की पहचान उसके प्रमुख क्षेत्र जैसे पर्यटन, मैन्युफैक्चरिंग, सेवाएं या लॉजिस्टिक्स को ध्यान में रखकर की जाएगी।
इस मॉडल का उद्देश्य यह है कि हर शहर अपनी ताकत के अनुसार विकसित हो और एक-दूसरे के पूरक बनें। इससे क्षेत्रीय असंतुलन कम होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
हर CER को 5,000 करोड़ रुपए की सहायता
बजट प्रस्ताव के तहत हर सिटी इकोनॉमिक रीजन को पांच साल में 5,000 करोड़ रुपए की मदद दी जाएगी। इस फंड का इस्तेमाल शहरी ढांचे, परिवहन, आवास, जल-निकासी, कचरा प्रबंधन और सार्वजनिक सुविधाओं के विकास में किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि मजबूत शहरी ढांचा निवेशकों को आकर्षित करेगा और स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
पर्यटन को बताया रोजगार आधारित विकास का मजबूत स्तंभ
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में पर्यटन को रोजगार सृजन का बड़ा माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि पर्यटन केवल कमाई का साधन नहीं है, बल्कि इससे होटल, होमस्टे, ट्रांसपोर्ट, हस्तशिल्प, गाइड सेवा और छोटे व्यापारियों को सीधा लाभ मिलता है।
सरकार का लक्ष्य है कि पर्यटन के जरिए युवाओं और स्थानीय समुदायों को आत्मनिर्भर बनाया जाए।
युवाओं के लिए विशेष स्किल ट्रेनिंग
बजट में पर्यटन से जुड़े विशेष स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम शुरू करने की घोषणा की गई है। इनमें होटल मैनेजमेंट, टूर गाइड, ट्रैवल मैनेजमेंट, डिजिटल बुकिंग और ग्राहक सेवा जैसे क्षेत्रों पर फोकस होगा।
ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में होमस्टे को बढ़ावा देने के लिए मुद्रा योजना के तहत आसान लोन दिए जाएंगे। इससे स्थानीय लोगों को स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे और गांव-देहात भी पर्यटन के नक्शे पर आएंगे।
50 बड़े पर्यटन स्थलों का विकास
सरकार राज्यों के सहयोग से देशभर में 50 प्रमुख पर्यटन स्थलों को विकसित करेगी। इन जगहों पर बेहतर सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी के साथ-साथ होटल, रिसॉर्ट और अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
होटलों को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दिया जाएगा, जिससे निवेशकों को सस्ती फंडिंग और टैक्स से जुड़ी सहूलियतें मिल सकें। इसका सीधा फायदा होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को मिलेगा।
धार्मिक और बौद्ध स्थलों पर खास ध्यान
बजट 2026 में धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को विशेष महत्व दिया गया है। मंदिर शहरों के साथ-साथ भगवान बुद्ध से जुड़े स्थलों के विकास पर भी जोर रहेगा। सरकार का उद्देश्य भारत को वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करना है, जिससे देश-विदेश के श्रद्धालु और पर्यटक बड़ी संख्या में आकर्षित हों।
मेडिकल और वेलनेस टूरिज्म को बढ़ावा
निजी क्षेत्र की भागीदारी से मेडिकल और वेलनेस टूरिज्म को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अस्पताल और आसान वीजा नियम लागू किए जाएंगे। योग, आयुर्वेद और वेलनेस से जुड़े भारत के पारंपरिक ज्ञान को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने की भी योजना है।
ज्ञान भारतम मिशन और सांस्कृतिक धरोहर
बजट में ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत एक करोड़ से ज्यादा पांडुलिपियों को सुरक्षित और डिजिटल करने की घोषणा की गई है। शिक्षण संस्थानों, संग्रहालयों और निजी संग्रहकर्ताओं के सहयोग से भारतीय ज्ञान प्रणाली का एक राष्ट्रीय डिजिटल संग्रह तैयार किया जाएगा।
यह पहल सांस्कृतिक पर्यटन और शोध को भी नई दिशा देने वाली साबित होगी।
बेहतर कनेक्टिविटी से मिलेगा पर्यटन को सहारा
पर्यटन को गति देने के लिए रेल कनेक्टिविटी पर भी बड़ा दांव खेला गया है। बजट में 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की योजना सामने आई है, जिनमें दिल्ली-वाराणसी, वाराणसी-सिलीगुड़ी, मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-चेन्नई, हैदराबाद-बेंगलुरु और चेन्नई-बेंगलुरु शामिल हैं।
इन कॉरिडोरों से धार्मिक, व्यापारिक और पर्यटन शहरों के बीच यात्रा आसान और तेज होगी।
बजट 2026-27 में पर्यटन को केवल एक सेक्टर नहीं, बल्कि समग्र विकास के इंजन के रूप में देखा गया है। 50 पर्यटन स्थलों का विकास, छोटे शहरों पर निवेश, स्किल ट्रेनिंग और बेहतर कनेक्टिविटी ये सभी कदम मिलकर भारत के पर्यटन मानचित्र को नया आकार दे सकते हैं। अगर योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन हुआ, तो आने वाले वर्षों में पर्यटन देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार का मजबूत आधार बन सकता है।
डिस्क्लेमर
यह लेख बजट 2026-27 से जुड़ी आधिकारिक घोषणाओं और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। योजनाओं का वास्तविक क्रियान्वयन और लाभ संबंधित सरकारी दिशानिर्देशों व राज्यों की नीतियों पर निर्भर करेगा।


