
Navratri Day 4 Maa Kushmanda (Image Credit-Social Media)
Navratri Day 4 Maa Kushmanda
Navratri Day 4: चैत्र नवरात्रि के नौ दिन मां के अलग-अलग रूपों को समर्पित होते हैं और हर दिन मां की पूजा-अर्चना करने का विधान भी अलग होता है।
आज हम नवरात्रि के चौथे दिन पूजे जाने वाली मां जगदम्बा के स्वरूप मां कुष्मांडा की बात करेंगे, जिन्हें जगत की आदिशक्ति के रूप में पूजा जाता है। माना जाता है कि मां कुष्मांडा की आराधना से यश और बल की वृद्धि होती है। मां कुष्मांडा को समर्पित पूरे देशभर में कई मंदिर हैं, जहां दर्शन करके भक्त मां की विशेष कृपा पा सकते हैं।
पहले बात करते हैं कि मध्य प्रदेश स्थित लमान माता मंदिर की, जो दतिया में स्थापित है। इस मंदिर की गिनती प्राचीन शक्तिपीठों में होती है। इस मंदिर को ‘नौकरी देने वाली देवी’ का मंदिर कहकर भी पुकारा जाता है। स्थानीय मान्यता है कि अगर किसी को नौकरी लगने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वह लमान माता के दर्शन जरूर करें। मंदिर में नवरात्रि के चौथे दिन मां को मालपुए का भोग लगाया जाता है और भारी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
उत्तर प्रदेश की धरती पर भी मां कुष्मांडा के दो मंदिर स्थापित हैं। एक मंदिर कानपुर में तो दूसरा वाराणसी में स्थित है। पहले बात करते हैं कानपुर के मां कुष्मांडा देवी मंदिर की। यह प्राचीन शक्तिपीठ मंदिर है, जहां का पवित्र जल आंखों पर लगाने से नेत्र रोगों से आराम मिलता है। देशभर से नेत्र विकारों से जूझ रहे लोग मंदिर में दर्शन के बाद पवित्र जल को अपने साथ लेकर जाते हैं। मंदिर में मां अष्टभुजी रूप में नहीं, बल्कि लेटी हुई प्रतिमा विराजित है। प्रतिमा से रहस्यमयी जल निकलता है, जिसे लोग अपने साथ लेकर जाते हैं।
तीसरा और आखिरी मंदिर वाराणसी में तुलसी मानस मंदिर के पास है। कुंड होने की वजह से मंदिर को दुर्गाकुंड मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर में लक्ष्मी, सरस्वती और काली जैसी देवियों की पूजा होती है, लेकिन नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा के रूप में तीनों देवियों को सजाया जाता है। मंदिर के बगल में दुर्गा कुंड नामक एक विशाल आयताकार जलकुंड है, जो मंदिर को आकर्षण का केंद्र बनाता है। हर साल कुंड में स्नान करने के लिए विशेष रूप से नवरात्रि में भारी संख्या में भक्त कुंड में स्नान के लिए पहुंचते हैं।


