
Marhi Mata Temple (Image Credit-Social Media)
Marhi Mata Temple
Marhi Mata Temple: देशभर में कई ऐसे मंदिर हैं, जो शक्तिपीठ या सिद्धपीठ नहीं हैं, लेकिन अपने चमत्कारों की वजह से भक्तों के बीच अटूट श्रद्धा रखते हैं।
ऐसा ही एक मंदिर छत्तीसगढ़ में है, जहां मां के दर्शन मात्र से निसंतान दंपति को संतान मिलती है और रोगी निरोगी काया के साथ घर जाता है। हम बात कर रहे हैं मरही माई मंदिर की, जो जंगलों के किनारे बसा है और हर साल आस-पास के राज्यों के लोग मां के दर्शन के लिए आते हैं।
बिलासपुर शहर की न्यू रेलवे कॉलोनी के जंगलों के पास मरही माई का चमत्कारी मंदिर है। मां को श्मशानवासिनी के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि मां की आराधना तंत्र को सिद्ध करने के लिए भी होती है। स्थानीय मान्यता है कि मां के दर्शन मात्र से बड़े से बड़ा तंत्र का काट मिल जाता है और मंदिर में मौजूद पेड़ से अपनी मन्नत मांगने से निसंतान दंपति को संतान की प्राप्ति होती है।
निसंतान दंपत्ति मंदिर में आकर मां की विशेष आराधना करते हैं और मन्नत पूरी होने के बाद अपनी इच्छा अनुसार दान-दक्षिणा भी करते हैं। मंदिर परिसर में एक प्राचीन पेड़ भी मौजूद है, जिसे मन्नत का पेड़ कहा जाता है। दर्शन करने आने वाले भक्त मनोकामना पूर्ति के लिए पेड़ पर लाल धागे बांधते हैं। कुछ स्थानीय मान्यताएं हैं कि मां पर विश्वास कर उनकी आराधना करने वाले भक्त निरोगी होकर मंदिर से जाते हैं।
मंदिर परिसर में पत्थर की कई प्रतिमाएं मौजूद हैं, जो मां के अलग-अलग रूपों का प्रतिनिधित्व करती हैं। परिसर में मां काली, दुर्गा और सरस्वती की प्रतिमाएं शिवलिंग के साथ स्थापित हैं। मंदिर में चमत्कारी चरण पादुका भी मौजूद हैं, जिन पर बड़े कांटे लगे हैं। मंदिर के मुख्य गर्भगृह में मां की प्रतिमा अस्त्र-शस्त्र के साथ विराजमान है। नवरात्रि में मां के दिव्य दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ लगती है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, मंदिर का इतिहास 1901 का है। मां की प्रतिमा स्वयंभू है, जो धरती को चीरकर निकली थी। माना जाता है कि एक साधारण व्यक्ति को मां की प्रतिमा रेलवे स्टेशन के पास जमीन में आधी दबी मिली थी, जिसके बाद प्रतिमा की स्थापना रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारी स्वर्गीय सदानंद आचारी ने की और मां का मंदिर भी बनवाया।


