
Bateshwar Bah Agra (Image Credit-Social Media)
Bateshwar Bah Agra
Bateshwar Bah Agra: आज हम आपको उत्तर प्रदेश के शहर आगरा में बसे बटेश्वर (बह) के बारे में बताने जा रहे हैं जो एक प्राचीन रहस्यमयी स्थल के लिए लोकप्रिय है। आइये इस स्थान के बारे में आपको विस्तार से बताते हैं और समझते हैं कि यहाँ का रहस्य क्या है।
आगरा जिले में यमुना के किनारे में स्थित है बटेश्वर (बह) ये बेहद प्राचीन होने के साथ साथ रहस्यमई भी है। इस स्थान को ‘भदावर की काशी’ भी कहा जाता है। यहाँ 101 शिव मंदिरों का समूह था जिसमे से अब लगभग 51 ही शेष बचे हैं। यहाँ आपको यमुना की उल्टी धारा, और कंस करार जैसे पुरातात्विक साक्ष्य भी देखने को मिलेगा। वहीँ इन मंदिरों का निर्माण लगभग 400 साल पहले भदावर राजा बदन सिंह ने करवाया था।
यमुना नदी के उलटे बहने का रहस्य
आगरा के बटेश्वर में यमुना नदी का प्रवाह सामान्य दिशा के विपरीत (उत्तरवाहिनी) हो जाता है। इस चीज़ को बेहद रहस्यमई माना जाता है साथ ही इसे काफी पवित्र भी समझा जाता है। ऐसा क्यों है इस रहस्य का खुलासा आज तक नहीं हो पाया है।
वहीँ यहाँ बने सभी मंदिर बलुआ पत्थर से बने हैं जिसे भदावर के राजा बदन सिंह ने बनवाया था। इसके साथ ही यहाँ का मुख्य मंदिर लोगों के बीच काफी प्रसिद्ध है। यहाँ भगवान् शिव की मूंछों वाली अनोखी प्रतिमा है जिसके दर्शन करने लोग दूर-दूर से आते हैं। यहाँ पर मान्यता है कि यहाँ स्थित शिवलिंग को आप कितने भी चावलों से ढकने की कोशिश कर लें लेकिन वो कभी भी पूरी तरह से नहीं ढकते।
कई अन्य मान्यताएं
ऐसी भी मान्यता है कि यहीं पांडवों के अज्ञातवास की तैयारी की गयी थी और कंस का किनारा भी कहा जाता है दरअसल ऐसी मान्यता है कि कंस वध के बाद श्री कृष्ण यहाँ आये थे। साथ ही साथ ये भी कहा जाता है कि जैनों के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ की जन्मस्थली भी यही है। इसी लिए इसे ‘शौर्यपुर’ भी कहा जाता है।
बटेश्वर (बह) मंदिरों में लगे कई विशाल घंटे डाकुओं द्वारा चढ़ाये गए हैं। जिनमे घुनघुन परिहार, पान सिंह तोमर जैसे डाकुओं के नाम शामिल हैं। जिससे डाकुओ की इस रहस्यमयी स्थल के प्रति आस्था का पता चलता है।
वहीँ हर साल कार्तिक मास में यहाँ बटेश्वर मेला भी लगता है जो भारत के सबसे प्राचीन और प्रमुख पशु मेलों में शामिल है।


