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Bhopal News: मध्य प्रदेश की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के अनुशासनहीन बर्ताव का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। भिंड से भाजपा विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह द्वारा कलेक्टर के साथ अभद्रता और मुक्का मारने का प्रयास करने के मामले को पार्टी संगठन ने बुरी तरह से घेर लिया है। जानकारी के मुताबिक, बीजेपी नेतृत्व अब कुशवाह को तलब कर उनसे जवाब-तलब करने की तैयारी में है।
अनुशासन सिखाने के बाद भी बिगड़े हालात
बीजेपी के सांसद और विधायकों को बीते एक साल में दो बार अनुशासन का पाठ अच्छी तरह से पढ़ाया जा चुका है। प्रधानमंत्री मोदी ने खुद सांसदों और विधायकों को जमीन पर रहकर कार्य करने और खुद पर संयम बनाए रखने को कहा थी। इसके बाद पचमढ़ी में आयोजित हुए तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में भी नेताओं को पार्टी लाइन में रहकर कायदे से बर्ताव करने की सीख दी गई थी। इसके बाद भी निरंतर ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिसने संगठन की चिंता गंभीर रूप से बढ़ा दी है।
महिला कलेक्टर से अभद्र टिप्पणी का मामला
डिंडोरी से विधायक ओमप्रकाश धुर्वे भी हाल ही के एक मामले में बुरी तरह विवादों में घिर गए थे। उन्होंने सार्वजनिक मंच पर महिला कलेक्टर पर अभद्र टिप्पणी करते किया और कहा था कि कलेक्टर जनता की सेवा के लिए भेजे गए हैं, न कि मुर्गा और बकरा खाने के लिए। उनकी इस टिप्पणी ने न सिर्फ प्रशासनिक अमले में आक्रोश पैदा किया बल्कि संगठन के अंदर भी उनकी गंभीर रूप से आलोचना भी हुई।
पहले भी लग चुकी है जमकर क्लास
यह पहली बार नहीं है जब बीजेपी संगठन को अपने विधायकों और नेताओं पर साख कार्रवाई करनी पड़ी हो। पिछले महीने भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने विधायक गोलू शुक्ला और प्रदीप अग्रवाल को तलब कर उनके पुत्रों की गुंडागर्दी पर जमकर फटकारा था। इसके अलावा सेमरिया से पूर्व विधायक केपी त्रिपाठी को महिला पुलिस अधिकारी से बुरा बर्ताव करने पर अनुशासन में रहने की नसीहत दी गई थी।
संगठन का रुख साफ़
बीजेपी संगठन का कहना है कि अनुशासनहीनता के मामलों को किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पार्टी लाइन को लांघने वाले नेताओं पर पहले भी कार्रवाई की गई है और आगे भी की जाएगी। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने स्पष्ट रूप से कहा है कि मर्यादा लांघने वाले चाहे विधायक हों या उनके परिवार वाले, उन पर संगठन कड़ी से कड़ी कार्रवाई करेगा।
बता दे, बीजेपी के इस कदम को संगठनात्मक रूप से मजबूत और अनुशासन बनाये रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि भिंड विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह और अन्य विवादों में घिरे नेताओं पर कब तक और किस तरह से कार्रवाई होती है।