
Celebrity Temples in India
Celebrity Temples in India
Celebrity Temples in India: भारत में मंदिरों का महत्व संस्कृति, परंपरा और लोगों की भावनाओं का जीवंत प्रतीक भी है। प्राचीन काल से ही हमारे देश में देवी-देवताओं की पूजा होती आई है। लेकिन क्या आप जानते है भारत के उन मंदिरों के बारे में जो देवी-देवताओं को समर्पित न होकर, मशहूर सेलेब्रिटीज़ और राजनेताओं के नाम पर बने हैं। इन मंदिरों का निर्माण उनके प्रशंसकों और अनुयायियों ने किया, जो उन्हें भगवान समान मानते हैं। कोई उनकी लोकप्रियता, त्याग या योगदान से प्रभावित हुआ, तो कोई उनकी सफलता और जीवन की प्रेरणा को पूजा योग्य मानता है।
अमिताभ बच्चन का मंदिर – कोलकाता

कोलकाता के आनंद नगरी में स्थित ‘बच्चन धाम’ अमिताभ बच्चन के प्रशंसकों की आस्था का अनोखा प्रतीक है। इस मंदिर की स्थापना उनके बड़े प्रशंसक संजय पटोदिया ने की थी जो उन्हें भगवान की तरह पूजते हैं। मंदिर में उनकी असली लंबाई से भी बड़ी फाइबरग्लास की मूर्ति स्थापित है, जिसके सामने रोज़ पूजा, आरती और दीया-बत्ती की जाती है। खास बात यह है कि यहां उनके जन्मदिन पर विशेष पूजा-पाठ का आयोजन होता है और बड़ी संख्या में फैंस उन्हें ‘सिनेमा का भगवान’ मानकर दर्शन करने आते हैं। मंदिर में उनकी फिल्मों में पहने गए जूतों को भी सुरक्षित रखा गया है और दीवारों पर ‘जय श्री अमिताभ बच्चन’ जैसे मंत्र लिखे गए हैं।इसके अलावा इस मंदिर में आरती से पहले 9 पन्ने अमिताभ चालीसा भी पढ़ी जाती है जिसके बाद लोगों को प्रसाद भी दिया जाता है। 24 घंटे खुले रहने वाले इस मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है ।
रजनीकांत का मंदिर – तमिलनाडु

तमिलनाडु के मदुरै में सुपरस्टार रजनीकांत के एक भक्त ने उनके सम्मान में अपने घर पर एक भव्य मंदिर बनवाया है। इस मंदिर में करीब 250 से 300 किलो वजन की उनकी विशाल प्रतिमा स्थापित की गई है, जहां उन्हें भगवान की तरह पूजा जाता है। रजनीकांत को उनके प्रशंसक प्यार से ‘थलाइवा’ कहकर संबोधित करते हैं और उनकी फिल्मों के प्रति अपनी आस्था को अद्भुत ढंग से व्यक्त करते हैं। उनकी किसी भी नई फिल्म की रिलीज़ से पहले फैंस बड़े-बड़े कटआउट बनाकर उन्हें दूध से स्नान कराते हैं, जो उनकी उपासना की एक खास परंपरा बन चुकी है। हाल के वर्षों में उद्घाटन किए गए इस मंदिर में रजनीकांत के जन्मदिन और तमिल नववर्ष जैसे विशेष अवसरों पर विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है, जो उनकी असीम लोकप्रियता को दर्शाता है।
नमो मंदिर – गुजरात

गुजरात के राजकोट जिले के एक गांव में नरेंद्र मोदी के प्रशंसकों ने उनके सम्मान में ‘नमो मंदिर’ का निर्माण किया है। अहमदाबाद से करीब 130 मील दूर स्थित इस मंदिर में प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिमा स्थापित है जहां उनके राजनीतिक करिश्मे और जनसेवा की भावना को श्रद्धांजलि स्वरूप पूजा-अर्चना की जाती है। इस मंदिर का निर्माण उनके समर्थकों ने लगभग चार वर्षों में पूरा किया और फरवरी 2015 में इसका औपचारिक उद्घाटन हुआ। यहां रोज़ सुबह-शाम आरती और हवन होते हैं और भक्त उन्हें ‘आधुनिक युग का भगवान’ कहकर पूजते हैं। इतना ही नहीं, भाजपा कार्यकर्ताओं और मोदी समर्थकों ने देश के अन्य हिस्सों में भी छोटे-छोटे मंदिर बनवाए हैं जहां मोदी की भक्ति और आस्था को एक अलग ही रूप मिलता है।
जयललिता का मंदिर – तमिलनाडु
तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री और करिश्माई नेता जयललिता को उनके समर्थक श्रद्धा से ‘अम्मा’ कहकर पुकारते थे। उनकी लोकप्रियता इतनी गहरी थी कि मदुरै में उनके सम्मान में एक मंदिर बनाया गया, जो उनके राजनीतिक गुरु एम.जी. रामचंद्रन के साथ उन्हें समर्पित है। इस मंदिर में जयललिता की प्रतिमा स्थापित है, जहां रोज़ाना पूजा-अर्चना और आरती की जाती है। उनके जीवनकाल में ही लोग उन्हें देवत्व का स्थान देने लगे थे और उनके निधन के बाद भी यह मंदिर उनकी याद और आस्था का केंद्र बना हुआ है। चेन्नई नहीं बल्कि मदुरै स्थित यह मंदिर जनता की अटूट भक्ति और जयललिता के प्रति उनके स्नेह का प्रतीक माना जाता है।
तेलंगाना में सोनिया गांधी का मंदिर

तेलंगाना के करीमनगर जिले के मल्लियाल कस्बे में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के सम्मान में एक अनोखा मंदिर बनाया गया है। यह मंदिर कांग्रेस नेताओं ने विशेष रूप से तेलंगाना राज्य के गठन में उनकी अहम भूमिका को श्रद्धांजलि देने के लिए बनवाया है। सफेद संगमरमर से निर्मित इस मंदिर में सोनिया गांधी की सुंदर संगमरमर की प्रतिमा स्थापित की गई है। इसका उद्घाटन 2 जून 2024 को तेलंगाना स्थापना दिवस के अवसर पर किया गया था। मंदिर की स्थापना कांग्रेस के जिला महासचिव नेवुरी वेंकट रेड्डी और उनकी पत्नी ममता द्वारा की गई।
सचिन तेंदुलकर का मंदिर – बिहार
बिहार के कैमूर जिले के अतरवलिया गांव में क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के सम्मान में एक विशेष मंदिर बनाया गया है। इस मंदिर में संगमरमर से बनी उनकी आदमकद मूर्ति स्थापित है, जिसमें वे भारतीय क्रिकेट टीम की नीली जर्सी पहने विश्व कप थामे हुए दिखाई देते हैं। मंदिर की दीवारों पर उनके शानदार क्रिकेट करियर की झलकियां उकेरी गई हैं, जो उनकी उपलब्धियों की याद दिलाती हैं। यहां रोज़ाना दीया जलाया जाता है और खास मौकों पर भजन और आरती भी की जाती है। इस मंदिर के निर्माण का श्रेय उनके सबसे बड़े प्रशंसक माने जाने वाले मुजफ्फरपुर निवासी सुधीर कुमार गौतम को जाता है, जिन्होंने सचिन के प्रति अपनी गहरी भक्ति और सम्मान को इस अद्भुत रूप में साकार किया।
एम.जी. रामचंद्रन (एमजीआर) का मंदिर
तमिलनाडु के महान अभिनेता और पूर्व मुख्यमंत्री एमजी रामचंद्रन (एमजीआर) को आज भी लोग गहरी श्रद्धा और भक्ति के साथ याद करते हैं। उनके सम्मान में मंदिर बनाए गए हैं जहां प्रतिदिन उनकी मूर्तियों पर फूल चढ़ाना और पूजा-अर्चना करना एक परंपरा बन चुकी है। विशेष रूप से मदुरै जिले के टी कुन्नथुर में 12 एकड़ भूमि पर जनवरी 2021 में एक संयुक्त मंदिर का उद्घाटन किया गया, जिसे एमजीआर और जयललिता दोनों को समर्पित किया गया है। यहां उनकी कांस्य मूर्तियाँ स्थापित हैं और धार्मिक विधियों के साथ उनकी आरती की जाती है। एमजीआर की लोकप्रियता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनके निधन के बाद कई लोगों ने गहरे सदमे में आत्महत्या तक कर ली थी। आज भी वे तमिलनाडु की जनता के बीच एक देवता के रूप में पूजनीय हैं।
आलोचना और विवाद
कई लोग इंसानों के नाम पर बनाए गए मंदिरों और मूर्तियों को भगवान का दर्जा देने का विरोध करते हैं। उनका मानना है कि ऐसा करना धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचा सकता है और समाज में असंतुलन पैदा कर सकता है। इसके अलावा, राजनीतिक दलों पर इन मंदिरों और धार्मिक स्थलों का इस्तेमाल प्रचार और वोट बैंक की राजनीति के लिए करने के आरोप भी लगते रहते हैं। ऐसे मुद्दे समय-समय पर सामाजिक और राजनीतिक बहसों को जन्म देते हैं।