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    Home » Disappearing Temple: बेहद चमत्कारिक है ये मंदिर, देखते ही देखते आँखों के सामने से हो जाता है ओझल
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    Disappearing Temple: बेहद चमत्कारिक है ये मंदिर, देखते ही देखते आँखों के सामने से हो जाता है ओझल

    Janta YojanaBy Janta YojanaDecember 28, 2025No Comments5 Mins Read
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    Stambheshwar Mahadev Temple (Image Credit-Social Media)

    Stambheshwar Mahadev Temple

    Disappearing Temple India: भारत देश यूं तो कई सारे चमत्कारों और उनसे जुड़ी पौराणिक कथाओं के लिए के लिए जाना जाता है। इतना ही नहीं यहां कई सारे मंदिर भी हैं और उनमें होते चमत्कार आपको हैरान कर देंगे लेकिन इन सभी मंदिरों के पीछे का कारण क्या है यह मान्यताएं हैं या उनके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण है इनका पता आप अपनी विवेक से लगा सकते हैं। लेकिन आज हम आपको जिस मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं वो आपकी आंखों के सामने ही क्षण भर में गायब हो जायेगा और कुछ ही देर में वह वापस दिखने लगता है। आइये जानते हैं क्या है इस मंदिर के पीछे का यह चमत्कार और कहां स्थित है यह मंदिर।

    देखते ही देखते आँखों के सामने से ओझल हो जाता है ये मंदिर

    भारत की संस्कृति काफी प्राचीन है और यहां पर आपको काफी प्राचीन मंदिर भी मिल जाएंगे। ऐसे में ही एक प्राचीन मंदिर के रहस्य पर से आज हम पर्दा उठाने जा रहे हैं। यह मंदिर कई रहस्याओं और चमत्कारों से भरा हुआ है हम बात कर रहे हैं गुजरात में स्थित स्तंभेश्वर महादेव मंदिर की। यह मंदिर अपने अनोखे चमत्कार और ऐतिहासिकता के लिए जाना जाता है। आइये जानते हैं क्या है इसके पीछे की पौराणिक कथा और आंखों के सामने से गायब होने की क्या है असली वजह।

    बेहद चमत्कारिक है महादेव का स्तंभेश्वर महादेव मंदिर

    गुजरात का स्तंभेश्वर महादेव मंदिर अपने चमत्कारों के लिए जाना जाता है ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव का यह मंदिर दिन में दो बार अपने भक्तों को दर्शन देता है और उसके बाद समुद्र की गोद में समा जाता है। यह खास मंदिर गुजरात के कावी- कंबोई गांव में स्थित है।

    आपको बता दे कि यह गांव अरब सागर के मध्य कांबी तट पर स्थित है यह चमत्कारी मंदिर सुबह और शाम दिन में सिर्फ दो बार ही नजर आता है। इसके बाद यह समुद्र की गोद में समा जाता है। समुद्र का पानी शिवलिंग का अभिषेक करता है और भक्त उनके दर्शन करने के लिए इंतजार करते हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि यह मंदिर प्रायश्चित करने का नतीजा है. जिसका उल्लेख शिव पुराण में भी मिलता है। आइये जानते हैं क्या है इसके पीछे की पौराणिक कथा।

    स्तंभेश्वर महादेव मंदिर के गायब होने की पौराणिक कथा

    शिव पुराण में उल्लेख मिलता है कि ताड़कासुर नाम के शिव भक्त ने भगवान शिव को अपनी तपस्या से प्रसन्न किया इसके बदले में शिव जी ने उसे मनवांछित वरदान मांगने को कहा। इस पर असुर को यह वरदान मिला कि शिव पुत्र के अलावा उसे कोई नहीं मार सकता लेकिन शिवपुत्र की आयु उस समय सिर्फ 6 दिन की होनी चाहिए। यह वरदान हासिल करने के बाद ताड़कासुर ने तीनों लोकों में त्राहि मचा दी। इसके बाद परेशान होकर देवताओं और ऋषि मुनियों ने प्रार्थना की तब श्वेत पर्वत कुंड से 6 दिन के कार्तिकेय जी उत्पन्न हुए। कार्तिकेय ने उसका वध कर दिया और बाद में जब उन्हें असुर के शिव भक्त होने की जानकारी मिली तब बेहद अफसोस भी हुआ।

    ऐसी मान्यता है कि कार्तिकेय को जब असुर के शिव भक्त होने का पता चला तो उन्हें इसका पछतावा हुआ। फिर उन्होंने भगवान विष्णु से प्रायश्चित करने का उपाय पूछा। इस पर भगवान विष्णु ने उन्हें एक शिवलिंग स्थापित करने के लिए कहा। जहां उन्हें रोज माफी मांगनी होगी इस तरह से उस जगह पर शिवलिंग की स्थापना हो गई। जिसे आज स्तंभेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता है यह मंदिर प्रतिदिन समुद्र में डूब जाता है और फिर वापस आकर अपने भक्तों को दर्शन देता है। इस मंदिर में महाशिवरात्रि और अमावस्या पर खास तरह की का मेला भी लगाया जाता है। इस मंदिर में दर्शन करने के लिए आपको एक पूरा दिन चाहिए होगा। जिससे आप इस चमत्कार को अपनी आंखों से देख सकें।

    मंदिर के गायब होने के पीछे की वजह

    भक्तों के लिए यह चमत्कार है लेकिन विज्ञान इसे चमत्कार नहीं बल्कि प्रकृति की एक मनोहरी परिघटना मानता है। दरअसल समुद्र किनारे मंदिर होने के कारण जब भी ज्वार भाटा उठना है तब पूरा मंदिर समुद्र में समा जाता है और इसी वजह से मंदिर के दर्शन आप तभी कर सकते हैं जब समुद्र में ज्वार काम होता है। ऐसा कई सालों से चला आ रहा है ज्वार के समय समुद्र का पानी मंदिर के अंदर आता है और शिवलिंग का अभिषेक करके वापस लौट जाता है। यह घटना प्रतिदिन सुबह और शाम को होती है। ऐसे में मंदिर आने के लिए आप सुबह और शाम दोनों समय समुद्र तट पर समय बिता सकते हैं और इस मनोहरी घटना को अपनी आंखों से देख सकते हैं।

    यह मंदिर गुजरात के प्रमुख शहर वडोदरा से 85 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है जहां पहुंचने के लिए आपको बसों का सहारा लेना पड़ेगा। यह प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है यहां पर सड़क, रेल और हवाई मार्ग से भी आप सुविधा अनुसार आसानी से आ सकते हैं। 

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