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    Home » Jaisalmer Patwa Ki Haveli History: तीस दशक का लंबा समय लगा था राजस्थान की इस हवेली का सिर्फ नक्शा तैयार करने में, जानें इतिहास
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    Jaisalmer Patwa Ki Haveli History: तीस दशक का लंबा समय लगा था राजस्थान की इस हवेली का सिर्फ नक्शा तैयार करने में, जानें इतिहास

    By January 5, 2025No Comments5 Mins Read
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    Jaisalmer Patwa Ki Haveli History (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

    Jaisalmer Patwa Ki Haveli History:�भारत के राजाओं और नवाबों के शौक और उनके शाही अंदाज के चर्चे तो पूरी दुनिया में व्याप्त हैं। अपने छोटे से छोटे शौक पर पानी की तरह पैसा बहाने को तैयार रहते थे ये नवाब। इसी कड़ी में राजस्थान के जैसलमेर शहर में एक ऐसी हवेली (Jaisalmer Ki Haveli) है, जो अद्भुत संरचना के लिए दुनिया में मशहूर है। जिसका निर्माण किसी राजा या नवाब ने नहीं बल्कि एक व्यापारी द्वारा करवाया गया था। एक खास तरह की वस्तुओं का व्यापार करने वाले व्यापारियों को पटवा भी कहा जाता है। इसलिए यह नायाब हवेली पटवा की हवेली (Patwa Ki Haveli) के नाम से मशहूर है।

    वैसे तो राजस्थान का जैसलमेर कई ऐतिहासिक फोर्ट, पैलेस और मंदिरों का एक गढ़ है, जहां पर्यटकों का आना जाना वर्ष भर बना रहता है। इसी कड़ी में पटवा की हवेली (Patwa Ki Haveli) भी राजस्थान का एक प्रमुख पर्यटन और ऐतिहासिक स्थल (Rajasthan Tourist And Historical Place) जाना जाता है। यह हवेली इसलिए भी खास है क्योंकि नायाब मेहराबों और पत्थरों पर उकेरी गईं कलाकृतियों से शिल्प कला का एक बेहतरीन दस्तावेज पेश करती है, यह पटवा की हवेली। जिसका सिर्फ नक्शा तैयार करने में करीब तीस दशक जितना समय लगा था। आइए जानते हैं राजस्थान के जैसलमेर में स्थित इस पटवा वाली हवेली के बारे में विस्तार से-

    पांच बेटों के लिए तैयार की गई थी यह विशाल हवेली (Patwa Ki Haveli Kyu Banai Gayi)

    (फोटो साभार- सोशल मीडिया)
    (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

    पटवों की हवेली नाम से राजस्थान के जैसलमेर में स्थित इस ऐतिहासिक हवेली को व्यापारी ने अपने पांच बेटों के लिए तैयार किया था। यही वजह है कि पटवों की हवेली पांच हवेलियों का एक समूह है। कहा जाता है इस हवेली का नक्शा तैयार करने से लेकर इसके निर्माण में 60 वर्ष का समय लग गया था। यानी तीस साल नक्शा बनाने में और इतने ही साल इसके पूरी तरह से बन कर तैयार होने में।

    पटवों की हवेली की यह है खूबी

    जैसलमेर की इस चर्चित पांच हवेलियों के समूह में तैयार विशालकाय पटवों की हवेली जिसे तैयार होने में आधी उम्र से भी ज्यादा का वक्त लगा इसकी कई विशेषताएं हैं। चलिए इन पांचों हवेली के बारे में एक-एक कर बात करते हैं। इस हवेली के समूह में पहली हवेली की खूबियों की बात करें तो इसे कोठारी की पटवा हवेली के नाम से जाना जाता है। इन पांचों हवेलियों में इस हवेली को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है।

    इस कोठारी की पटवा हवेली का निर्माण (विश्व प्रसिद्ध लोहागढ़ फोर्ट) गुमान चंद पटवा द्वारा किया गया था, जो एक प्रसिद्ध आभूषण व्यापारी था। कोठारी की पटवा हवेली के व्यापारी को लेकर स्थानीय लोगों का कहना है कि ये पटवा सोने और चांदी के साथ-साथ अफीम तस्करी करके बहुत पैसा कमाया जिसके बाद उसी पैसे से इस हवेली का निर्माण करवाया था।

    इन हवेलियों के अंदर मेहराब और कलाकृतियों को हवेली के मुख्य द्वार बेहद खास तरीके से बनाए गए हैं। हवेली के अंदर एक संग्रहालय है, जिसमें कलाकृतियों, चित्रों और शिल्प संरक्षित हैं। प्रत्येक हवेली में एक अलग शैली का मिरर वर्क और चित्रों का चित्रण है। कहा जाता है कि पटवों के पांच भाइयों और उनके परिवारों के लिए एक अलग हवेली थी। सभी हवेलियों में एक से एक बेहतरीन सुविधा मिलती थी।

    बेहद नायब है हवेली की नक्काशी

    (फोटो साभार- सोशल मीडिया)
    (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

    पटवा की ये हवेली वास्तुकला के लिहाज से भी बेहद नायाब है। इस हवेली की दीवारों पर कांच और मीने से खूबसूरती से कारीगरी देखने को मिलती है। झरोखे, मेहराब, बालकनियों और प्रवेश द्वार पर भी जटिल नक्काशी और पेंटिंग हैं। दीवारों के ऊपर राजस्थानी संस्कृति से जुडी हुई उत्कृष्ट चित्र और बेहतरीन नक्काशी देखने को मिलती है। इस पूरी हवेली में करीब 60 से अधिक मौजूद बालकनियों में मौजूद खम्भों पर अलग-अलग कलाकृतियां देखने को मिलती है।

    इसके अलावा इस हवेली के लगभग हर लकड़ी के दरवाजे बारीक डिजाइनों से सुसज्जित हैं। जो वास्तुकला का अनुपम उदाहरण हैं। अब यह हवेली नेशनल हैरिटेज का एक हिस्सा है। इसे देखने के लिए पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहता है। जैसलमेर और इसके पर्यटन स्थलों की सैर करने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च तक का समय अनुकूल रहता है।

    पटवों की हवेली में घूमने का समय (Patwa Ki Haveli Ghumne Ka Best Samay)

    (फोटो साभार- सोशल मीडिया)
    (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

    इस हवेली के आसपास मौजूद होटल में आप पारंपरिक भोजन में दाल बाटी चूरमा, मुर्ग-ए- सब्ज, मसाला रायता जैसे राजस्थान के कई पारंपारिक भोजन का लुत्फ़ उठा सकते हैं।

    यदि आप भी जैसलमेर में पटवों की हवेली में घूमने के लिए जाना चाहते हैं, तो सुबह 9 बजे से लेकर शाम 6 बजे के बीच कभी भी आप जा सकते हैं। पटवों की हवेली में प्रवेश शुल्क प्रति व्यक्ति से लगभग 20 रुपया लिया जाता है। अगर आप कैमरा लेकर जाना चाहते हैं तो उसका चार्ज अलग से है।

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