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    Home » Khajuraho Ka Itihas: खजुराहो में ऐसा क्या है, जो देता है इसे आज की सोच से टक्कर
    Tourism

    Khajuraho Ka Itihas: खजुराहो में ऐसा क्या है, जो देता है इसे आज की सोच से टक्कर

    Janta YojanaBy Janta YojanaJuly 19, 2025No Comments8 Mins Read
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    Khajuraho (Image Credit-Social Media)

    Khajuraho (Image Credit-Social Media)

    Khajuraho Ka Itihas: खजुराहो, मध्य प्रदेश के चतरपुर जिले में बसा एक छोटा सा शहर, भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का एक अनमोल रत्न है। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त खजुराहो अपने मंदिरों की जटिल नक्काशी और अनूठी वास्तुकला के लिए दुनियाभर में मशहूर है। ये मंदिर 9वीं से 13वीं शताब्दी के बीच चंदेल वंश के शासकों द्वारा बनवाए गए थे। इन मंदिरों की दीवारों पर उकेरी गई मूर्तियां जीवन, प्रेम, अध्यात्म और मानवता के विभिन्न पहलुओं को इतने खूबसूरत तरीके से दर्शाती हैं कि हर साल लाखों पर्यटक और इतिहास प्रेमी यहां खींचे चले आते हैं। खजुराहो सिर्फ मंदिरों का समूह नहीं, बल्कि भारतीय कला, संस्कृति और स्थापत्य कला का एक जीवंत दस्तावेज है। आइए, इस लेख में खजुराहो के इतिहास, मंदिरों, नक्काशी, महत्व और रोचक तथ्यों को विस्तार से जानते हैं, ताकि आपको ऐसा लगे जैसे आप इन मंदिरों की सैर पर निकल पड़े हों।

    खजुराहो का ऐतिहासिक परिचय

    खजुराहो का इतिहास चंदेल वंश के गौरवशाली काल से जुड़ा है। 9वीं से 13वीं शताब्दी के बीच चंदेल राजवंश ने इस क्षेत्र पर शासन किया और खजुराहो को अपनी राजधानी बनाया। उस समय इसे खजूरपुरा या खजूरवाहक के नाम से जाना जाता था। ऐसा माना जाता है कि इस नाम का संबंध खजूर के पेड़ों से है, जो इस क्षेत्र में बहुतायत में थे। चंदेल शासकों ने इस शहर को अपनी कला और संस्कृति का केंद्र बनाया और यहां 85 मंदिरों का निर्माण करवाया, जिनमें से आज केवल 25 मंदिर ही बचे हैं। ये मंदिर हिंदू और जैन धर्म के प्रतीक हैं, जो उस समय की धार्मिक सहिष्णुता को दर्शाते हैं।

    खजुराहो के मंदिरों का निर्माण मुख्य रूप से राजा यशोवर्मन, धनदेव, और विद्याधर जैसे शासकों के शासनकाल में हुआ। ये मंदिर न केवल धार्मिक स्थल थे, बल्कि कला, विज्ञान और संस्कृति के केंद्र भी थे। मंदिरों की दीवारों पर बनी मूर्तियां मानव जीवन के हर पहलू को दर्शाती हैं, चाहे वह प्रेम हो, युद्ध हो, या फिर अध्यात्म। 12वीं शताब्दी के बाद चंदेल वंश के पतन के साथ खजुराहो का वैभव भी कम हुआ, और ये मंदिर जंगलों और गुमनामी में खो गए। 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश इंजीनियर टी.एस. बर्ट ने इन मंदिरों को फिर से खोजा, जिसके बाद खजुराहो दुनिया के सामने आया।

    खजुराहो की वास्तुकला

    खजुराहो के मंदिर भारतीय स्थापत्य कला का एक उत्कृष्ट नमूना हैं। ये मंदिर नागर शैली में बने हैं, जो उत्तर भारत की मंदिर निर्माण कला की विशेषता है। इन मंदिरों की बनावट और नक्काशी इतनी जटिल और सटीक है कि यह आज भी वास्तुकारों और इतिहासकारों को हैरान करती है। मंदिरों का निर्माण बलुआ पत्थर से किया गया है, जिसे बिना किसी चिपकाने वाली सामग्री के जोड़ा गया। यह तकनीक उस समय की उन्नत इंजीनियरिंग का प्रतीक है।

    मंदिरों का डिज़ाइन: खजुराहो के मंदिर ऊंचे चबूतरों पर बने हैं, जिनके शिखर आसमान की ओर इशारा करते हैं। मंदिरों का आधार चौकोर है, और शिखर घुमावदार और पिरामिडनुमा हैं। मंदिरों में गर्भगृह, मंडप, और प्रवेश द्वार की संरचना होती है।

    नक्काशी और मूर्तियां: मंदिरों की दीवारों पर बनी मूर्तियां खजुराहो की सबसे बड़ी खासियत हैं। इनमें देवी-देवता, अप्सराएं, मिथुन (प्रेमी जोड़े), युद्ध के दृश्य, और रोजमर्रा की जिंदगी के चित्रण शामिल हैं। मूर्तियों की बारीकियां इतनी सटीक हैं कि कपड़ों की सिलवटें, आभूषण और चेहरे के भाव स्पष्ट दिखाई देते हैं।

    हिंदू और जैन मंदिर: खजुराहो में हिंदू मंदिरों के साथ-साथ जैन मंदिर भी हैं। हिंदू मंदिरों में शिव, विष्णु और शक्ति को समर्पित मंदिर प्रमुख हैं, जबकि जैन मंदिरों में आदिनाथ और पार्श्वनाथ मंदिर प्रसिद्ध हैं।

    प्रमुख मंदिर:

    कंदरिया महादेव मंदिर: यह खजुराहो का सबसे बड़ा और सबसे भव्य मंदिर है, जो भगवान शिव को समर्पित है। इसकी शिखर 31 मीटर ऊंची है, और इसकी दीवारों पर 900 से ज्यादा मूर्तियां हैं।

    लक्ष्मण मंदिर: भगवान विष्णु को समर्पित, यह मंदिर अपनी जटिल नक्काशी और संतुलित डिज़ाइन के लिए जाना जाता है।

    विश्वनाथ मंदिर: शिव को समर्पित, इस मंदिर में नंदी मूर्ति और खूबसूरत छतरियां हैं।

    आदिनाथ मंदिर: जैन तीर्थंकर आदिनाथ को समर्पित, यह मंदिर अपनी शांत सुंदरता के लिए मशहूर है।

    खजुराहो की मूर्तियों का रहस्य

    खजुराहो की मूर्तियां अपनी कामुक नक्काशी के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं, जो दुनिया भर में चर्चा का विषय रही हैं। इन मूर्तियों में प्रेम और कामुकता को इतने खुले और कलात्मक तरीके से दर्शाया गया है कि यह भारतीय संस्कृति की उदारता को दिखाता है। लेकिन इन मूर्तियों को सिर्फ कामुकता तक सीमित करना गलत होगा। ये मूर्तियां मानव जीवन के चार पुरुषार्थों – धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष – को दर्शाती हैं।

    कामुक मूर्तियां: मंदिरों की बाहरी दीवारों पर मिथुन (प्रेमी जोड़े) की मूर्तियां हैं, जो प्रेम और मानव संबंधों को दर्शाती हैं। ये मूर्तियां मंदिर के केवल 10-15% हिस्से में हैं, और बाकी मूर्तियां धार्मिक, सामाजिक और दैनिक जीवन को दर्शाती हैं।

    प्रतीकात्मक अर्थ: कुछ विद्वानों का मानना है कि ये मूर्तियां काम को जीवन का एक अभिन्न हिस्सा मानती हैं और इसे पवित्रता के साथ जोड़ती हैं। ये मंदिर के बाहरी हिस्से में हैं, जो यह संदेश देता है कि आध्यात्मिक यात्रा शुरू करने से पहले सांसारिक इच्छाओं को पीछे छोड़ना जरूरी है।

    कला का उत्कृष्ट नमूना: मूर्तियों की बारीकी और भावनात्मक गहराई उन्हें कला का एक उत्कृष्ट नमूना बनाती है। चाहे वह अप्सराओं के नृत्य का दृश्य हो या युद्ध के मैदान का चित्रण, हर मूर्ति में जीवंतता है।

    खजुराहो नृत्य महोत्सव

    हर साल फरवरी में खजुराहो में होने वाला नृत्य महोत्सव देश-विदेश के शास्त्रीय नृत्य प्रेमियों के लिए एक बड़ा आकर्षण है। इस सात दिवसीय उत्सव में भारत के प्रमुख शास्त्रीय नृत्य जैसे कथक, भरतनाट्यम, ओडिसी, कथकली और मणिपुरी प्रस्तुत किए जाते हैं। मंदिरों की पृष्ठभूमि में ये नृत्य प्रदर्शन एक जादुई अनुभव देते हैं।

    क्या खास है: कंदरिया महादेव मंदिर के सामने खुले मंच पर प्रदर्शन होते हैं, जो रात के समय लाइटिंग के साथ और भी मनमोहक लगते हैं।

    क्या करें: नृत्य महोत्सव के टिकट पहले से बुक करें, स्थानीय हस्तशिल्प की खरीदारी करें, और मंदिरों की रात की रोशनी में तस्वीरें लें।

    टिप्स: फरवरी में मौसम सुहावना रहता है, लेकिन रातें ठंडी हो सकती हैं, इसलिए हल्का स्वेटर साथ रखें।

    खजुराहो के अन्य आकर्षण

    खजुराहो सिर्फ मंदिरों तक सीमित नहीं है। इसके आसपास कई अन्य दर्शनीय स्थल हैं जो आपकी यात्रा को और यादगार बनाते हैं।

    रानेह फॉल्स: खजुराहो से 20 किमी दूर यह झरना अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए मशहूर है। ग्रेनाइट चट्टानों के बीच बहता पानी इंद्रधनुष जैसा नजारा बनाता है।

    पन्ना नेशनल पार्क: खजुराहो से 40 किमी दूर यह पार्क टाइगर्स, तेंदुओं और विभिन्न पक्षियों के लिए जाना जाता है। जंगल सफारी और केन नदी में बोटिंग का मजा लिया जा सकता है।

    अजयगढ़ और कालिंजर किला: चंदेल वंश के ये किले इतिहास प्रेमियों के लिए खास हैं। इनमें प्राचीन मूर्तियां और स्थापत्य कला देखने लायक है।

    पुरातत्व संग्रहालय: खजुराहो में यह संग्रहालय चंदेल काल की मूर्तियों और अवशेषों को प्रदर्शित करता है।

    खजुराहो की यात्रा और टिप्स

    खजुराहो की यात्रा हर यात्री के लिए एक अनोखा अनुभव है। चाहे आप इतिहास, कला, या प्रकृति के शौकीन हों, यह शहर आपको निराश नहीं करेगा। यहाँ कुछ जरूरी टिप्स हैं:

    सर्वश्रेष्ठ समय: अक्टूबर से मार्च तक का समय खजुराहो घूमने के लिए सबसे अच्छा है। फरवरी में नृत्य महोत्सव के दौरान भीड़ ज्यादा होती है, इसलिए पहले से होटल बुक करें।

    कैसे पहुंचें:

    हवाई मार्ग: खजुराहो का अपना हवाई अड्डा है, जो दिल्ली, मुंबई और वाराणसी से जुड़ा है।

    रेल मार्ग: नजदीकी रेलवे स्टेशन महोबा (63 किमी) और सतना (117 किमी) हैं। वहां से टैक्सी या बस उपलब्ध है।

    सड़क मार्ग: जयपुर, दिल्ली, आगरा और भोपाल से नियमित बसें चलती हैं।

    क्या करें: मंदिरों का भ्रमण, लाइट एंड साउंड शो, स्थानीय खाना जैसे दाल बाफला और मालपुआ ट्राई करें, और हस्तशिल्प की खरीदारी।

    क्या न करें: मंदिरों की मूर्तियों को छूने या नुकसान पहुंचाने से बचें। स्थानीय नियमों का पालन करें।

    खजुराहो का सांस्कृतिक महत्व

    खजुराहो सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और दर्शन का प्रतीक है। ये मंदिर उस समय की उदारता और धार्मिक सहिष्णुता को दर्शाते हैं, जब हिंदू और जैन समुदाय एक साथ फलते-फूलते थे। मंदिरों की नक्काशी में मानव जीवन के हर पहलू को दर्शाया गया है, जो यह दिखाता है कि भारतीय संस्कृति में जीवन को पूर्णता के साथ स्वीकार किया जाता था।

    धार्मिक सहिष्णुता: हिंदू और जैन मंदिरों का एक साथ होना चंदेल शासकों की सहिष्णुता को दर्शाता है।

    कला का केंद्र: खजुराहो उस समय का एक प्रमुख कला केंद्र था, जहां मूर्तिकारों और वास्तुकारों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

    वैश्विक पहचान: यूनेस्को विश्व धरोहर की मान्यता ने खजुराहो को वैश्विक पर्यटन के नक्शे पर ला दिया।

    रोचक तथ्य

    खजुराहो में मूल रूप से 85 मंदिर थे, जिनमें से 25 आज भी बचे हैं।

    मंदिरों की मूर्तियों में 10% से भी कम मूर्तियां कामुक हैं, फिर भी ये सबसे ज्यादा चर्चा में रहती हैं।

    कंदरिया महादेव मंदिर की शिखर पर 84 छोटे शिखर हैं, जो इसे अनूठा बनाते हैं।

    खजुराहो नृत्य महोत्सव 1975 से हर साल आयोजित होता है।

    मंदिरों का निर्माण बिना किसी चिपकाने वाली सामग्री के हुआ, जो इंजीनियरिंग का कमाल है।

    खजुराहो सिर्फ मंदिरों का शहर नहीं, बल्कि एक ऐसी जगह है जहां इतिहास, कला और संस्कृति का संगम होता है। इसके मंदिर न केवल वास्तुकला का चमत्कार हैं, बल्कि मानव जीवन के हर रंग को दर्शाते हैं। चाहे आप मंदिरों की नक्काशी को समझने आएं, नृत्य महोत्सव का आनंद लेने, या बस इतिहास की गलियों में खो जाने, खजुराहो आपको एक अविस्मरणीय अनुभव देगा। इसकी शांति, सुंदरता और रहस्य आपको बार-बार यहां खींच लाएंगे। तो अगली बार जब आप मध्य प्रदेश की यात्रा की योजना बनाएं, खजुराहो को अपनी लिस्ट में जरूर शामिल करें।

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