
Maharashtra Famous Ganesh Pandal
Maharashtra Famous Ganesh Pandal
Maharashtra Famous Ganesh Pandal: आज गणपति बाप्पा की स्थापना होगी और अगले 10 दिनों तक महाराष्ट्र समेत पूरे भारत में गणेशोत्सव का उत्सव चलेगा। इस दौरान लाखों भक्त अपने-अपने घरों और मोहल्लों में गणेश की मूर्तियाँ स्थापित करते हैं। लेकिन सबसे आकर्षण का केंद्र होते हैं विशाल और भव्य गणेश पंडाल जहाँ कला, सजावट, आस्था और समाज सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। मुंबई, पुणे, नागपुर, हैदराबाद, दिल्ली और अन्य शहरों में बने ये पंडाल अपनी भव्यता से दुनिया भर के पर्यटकों को भी अपनी ओर खींच लाते हैं।
लालबागचा राजा (मुंबई)
लालबागचा राजा की स्थापना वर्ष 1934 में स्थानीय मछुआरों और व्यापारियों द्वारा की गई थी। उस समय लालबाग का बाज़ार बंद हो जाने के बाद उन्होंने गणपति बप्पा से स्थायी बाज़ार की मन्नत मांगी थी और जब उनकी मनोकामना पूर्ण हुई तो कृतज्ञता स्वरूप पहली बार इस भव्य पंडाल का आयोजन किया गया। तभी से यह गणेशोत्सव श्रद्धा और आस्था का प्रतीक बन गया। ‘नवसाचा गणपति’ यानी इच्छा पूर्ण करने वाले गणपति के रूप में प्रसिद्ध लालबागचा राजा के दर्शन के लिए हर साल लाखों भक्त उमड़ते हैं। यहां दो विशेष पंक्तियाँ होती हैं। ‘मन्नत की लाइन’ और ‘मुखदर्शन लाइन’ जो भक्तों की अटूट श्रद्धा को दर्शाती हैं। पंडाल की सजावट हर साल किसी सामाजिक या सांस्कृतिक थीम पर आधारित होती है और गणपति की विशाल, राजसी मूर्ति कला और संस्कृति की भव्यता का प्रतीक मानी जाती है। दर्शन के लिए आम लोगों से लेकर फिल्मी सितारे, राजनेता और उद्योगपति तक घंटों लंबी कतार में खड़े होते हैं। बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सामान्य और VIP लाइनें बनाई जाती हैं। साथ ही आधुनिक समय में लाइव ऑनलाइन दर्शन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे देश-विदेश के भक्त भी इस आस्था के महासागर में शामिल हो पाते हैं।
अंधेरीचा राजा (मुंबई)
अंधेरीचा राजा गणपति पंडाल अपनी अनोखी मूर्ति और सजावट के लिए विशेष पहचान रखता है। यहाँ हर साल गणपति की मूर्ति अलग डिजाइन और नई थीम के साथ सजाई जाती है, जिससे इसकी भव्यता और आकर्षण और भी बढ़ जाता है। भक्तों को यहाँ का माहौल सादगी, अपनापन और नजदीकी का अनुभव कराता है, मानो बप्पा उनके अपने घर के सदस्य हों। यही कारण है कि यह पंडाल न सिर्फ मुंबई बल्कि पूरे देश में प्रसिद्ध है। बॉलीवुड सितारों, टीवी कलाकारों और नामी हस्तियों की उपस्थिति यहाँ आम बात है, जो विशेष पूजा और दर्शन के लिए आते हैं। देशभर से हजारों भक्त यहाँ पहुँचते हैं और इसे ‘इच्छा पूरी करने वाले गणपति’ का दर्जा भी प्राप्त है। खास बात यह है कि ‘अंधेरीचा राजा’ का पंडाल पूरे 21 दिनों तक प्रतिष्ठित रहता है और हर साल इसकी थीम मुंबई भर में चर्चा का विषय बनती है।
गणेश गलीचा राजा (मुंबई)
मुंबई का प्रसिद्ध गणेश गली पंडाल जिसे ‘गणेश गलीचा राजा’ कहा जाता है, वर्ष 1928 में स्थापित हुआ था और यह शहर के सबसे पुराने गणेश पंडालों में से एक माना जाता है। इसकी खासियत है हर साल बदलने वाली थीम आधारित सजावट जिसमें किसी प्रसिद्ध मंदिर, ऐतिहासिक धरोहर या धार्मिक स्थल की झांकी प्रस्तुत की जाती है। कभी यह सजावट तिरुपति बालाजी मंदिर की भव्यता दिखाती है तो कभी स्वतंत्रता आंदोलन या अन्य ऐतिहासिक विषयों पर आधारित होती है। इस पंडाल का वातावरण हमेशा भक्तिमय और सांस्कृतिक रहता है, जहाँ श्रद्धालुओं को अद्भुत झांकियों के साथ धार्मिक कार्यक्रमों का भी अनुभव मिलता है। यही वजह है कि गणेश गलीचा राजा हर साल न केवल मुंबईकरों बल्कि पूरे देश के भक्तों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता है।
गिरगांवचा राजा (मुंबई)
गिरगांव चौपाटी स्थित गणपति पंडाल और वहाँ की मंडल परंपरा मुंबई की सबसे पुरानी और ऐतिहासिक परंपराओं में गिनी जाती है। माना जाता है कि इस क्षेत्र में सार्वजनिक गणेशोत्सव की शुरुआत लगभग 1928 के आसपास हुई थी, जो स्वतंत्रता संग्राम की भावना और सामाजिक जागरूकता से भी गहराई से जुड़ी रही। यहाँ के मंडल न केवल धार्मिक आस्था बल्कि सामाजिक कार्यों, सांस्कृतिक आयोजनों और सामुदायिक एकता के लिए भी प्रसिद्ध रहे हैं। स्वतंत्रता-पूर्व काल से चली आ रही यह परंपरा आज भी स्थानीय समुदाय को जोड़ने का माध्यम है। विशेष रूप से गिरगांव चौपाटी पर होने वाला गणपति विसर्जन तो मुंबई का सबसे बड़ा आकर्षण बन चुका है। जहाँ भव्य शोभायात्रा में सजीव सांस्कृतिक झलक के साथ हजारों भक्त सम्मिलित होते हैं। इस मौके पर सुरक्षा, यातायात, पुलिस और मेडिकल व्यवस्था के विशेष इंतज़ाम किए जाते हैं, क्योंकि इस भव्य आयोजन को देखने देश-दुनिया से श्रद्धालु आते हैं।
जीएसबी सेवा मंडल (मुंबई)
मुंबई का जीएसबी सेवा मंडल गणपति पंडाल अपनी भव्यता और अनूठी परंपरा के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यहाँ स्थापित गणपति की मूर्ति असली सोने और चांदी के आभूषणों से सुसज्जित होती है, जिसमें लगभग 69 किलो सोना और 336 किलो चांदी का प्रयोग किया जाता है। यही कारण है कि यह मंडल देश का सबसे धनी पंडाल माना जाता है और बीमा राशि के लिहाज़ से भी सबसे बड़ा है। इस पंडाल की पहचान केवल आभूषणों की भव्यता तक सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ का धार्मिक और वेदिक माहौल भी उतना ही खास है। पूरे आयोजन में वेदिक मंत्रोच्चार, पारंपरिक पूजा-पाठ और हवन का विशेष महत्व होता है। साथ ही यहाँ प्रसाद के रूप में दक्षिण भारतीय व्यंजन जैसे उडुपी खाना, पुलियोगरे, पायसम और इडली भक्तों को परोसे जाते हैं, जो इस मंडल की दक्षिण भारतीय सांस्कृतिक विरासत को और भी जीवंत बना देते हैं।
मानाचा गणपति (पुणे)
पुणे के कस्बा पेठ में स्थित कसबा गणपति को ‘मानाचा गणपति’ कहा जाता है और यह शहर का सबसे प्राचीन एवं सम्मानित गणपति माना जाता है। लगभग 1400 वर्षों के इतिहास से जुड़ा यह गणपति पुणे का ग्रामदैवत भी है, जिसकी पूजा परंपरा आज भी पूरे गौरव के साथ निभाई जाती है। लोकमान्य बाळ गंगाधर टिळक ने जब गणेशोत्सव को सार्वजनिक उत्सव के रूप में प्रारंभ किया था तब कसबा गणपति इस आंदोलन और परंपरा का केंद्र बना। तभी से यहाँ की पूजा और विसर्जन समारोह पुणे के गणेशोत्सव की मुख्य धारा माने जाते हैं। धार्मिक और पारंपरिक वातावरण में यहाँ का गणेशोत्सव भक्तों के लिए गहरी आस्था और सांस्कृतिक एकता का अनुभव कराता है।
श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति (पुणे)
पुणे का श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति पंडाल महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि पूरे देश में अपनी भव्यता और धार्मिक महत्त्व के लिए जाना जाता है। इसकी स्थापना 1893 में प्रसिद्ध मिठाई विक्रेता श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई ने की थी और इसकी प्राणप्रतिष्ठा स्वयं लोकमान्य बाल गंगाधर टिळक द्वारा संपन्न की गई थी। यहाँ की गणपति मूर्ति स्वर्णाभूषित और अत्यंत आकर्षक है, जिसे कुशल कलाकारों ने विशेष धार्मिक विधियों का पालन करते हुए तैयार किया है। मूर्ति की भव्यता भक्तों की गहरी आस्था और विश्वास का प्रतीक है। दगडूशेठ गणपति मंडल केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, वृद्धाश्रम और अन्य सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाता है। इसकी लोकप्रियता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हर साल बॉलीवुड और क्रिकेट जगत की अनेक प्रसिद्ध हस्तियाँ यहाँ दर्शन के लिए आती हैं। जिससे यह पंडाल श्रद्धा और सामाजिक सेवा का अनूठा संगम बन गया है।
तुलसीबाग गणपति (पुणे)
पुणे का तुलसीबाग गणपति पंडाल अपनी विशाल मूर्ति और भव्य सजावट के लिए विशेष प्रसिद्ध है। यहाँ की गणपति मूर्ति लगभग 13 से 15 फीट ऊँची होती है और ग्लास फाइबर से निर्मित होने के कारण बेहद आकर्षक दिखाई देती है। इसे हर साल 200 किलो से अधिक चांदी के आभूषणों से सजाया जाता है, जिससे इसकी भव्यता और भी बढ़ जाती है। तुलसीबाग पंडाल की खासियत इसकी हर साल बदलने वाली थीम है, जो कभी सामाजिक मुद्दों पर तो कभी भारतीय सांस्कृतिक धरोहर और धार्मिक विषयों पर आधारित होती है। उदाहरण के तौर पर पिछली बार यहाँ उड़ीसा के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर की झांकी प्रस्तुत की गई थी। वहीं विसर्जन के अवसर पर तुलसीबाग गणपति की शोभायात्रा एक विशेष आकर्षण होती है, जिसमें अनूठी झांकियाँ भक्तों और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। यही कारण है कि यह पंडाल पुणे के सबसे प्रमुख और चर्चित गणपति उत्सवों में गिना जाता है।
नागपुर का टेकड़ी गणपति मंदिर
नागपुर के सीताबर्डी क्षेत्र में स्थित टेकेदी गणपति मंदिर लगभग 250 वर्ष पुराना है और इसे विदर्भ के अष्टविनायक में प्रथम स्थान का गौरव प्राप्त है। भोसले शासनकाल में स्थापित इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहाँ भगवान गणेश की स्वयंभू मूर्ति पीपल के पेड़ के नीचे विराजमान मानी जाती है। हर साल यह मूर्ति भक्तों के लिए आस्था और आकर्षण का केंद्र बनती है, जिसे बड़े ही भव्य ढंग से पूजा जाता है। विशेष अवसरों पर गणपति को चांदी का मुकुट पहनाया जाता है, जो उनकी शोभा और भव्यता को और भी बढ़ा देता है। यही कारण है कि टेकेदी गणपति मंदिर विदर्भ ही नहीं, बल्कि पूरे महाराष्ट्र के श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है।