
Why Ranthambore Is Famous Worldwide
Ranthambore National Park: राजस्थान का नाम आते ही रेगिस्तान, किले और राजसी विरासत की तस्वीर आंखों के सामने उभर आती है। लेकिन इसी राजस्थान में एक ऐसी जगह भी है जहां रेगिस्तान के उलट घने जंगल, जंगली जानवर, ऐतिहासिक धरोहरें और धार्मिक आस्था एक साथ देखने को मिलती हैं। हम बात कर रहे हैं रणथम्भौर की, जो न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया में अपने रॉयल बंगाल टाइगर्स और समृद्ध इतिहास के लिए मशहूर है। हाल ही में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी और बिजनेसमैन रॉबर्ट वाड्रा के बेटे रेहान वाड्रा की सगाई को लेकर रणथम्भौर फिर चर्चा में आ गया है। ऐसे में यह जानना दिलचस्प हो जाता है कि आखिर रणथम्भौर क्यों इतना खास है और यहां घूमने के लिए कौन-कौन सी जगहें जरूर देखनी चाहिए-
कितनी खूबसूरत जगह है रणथम्भौर
रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में स्थित है और करीब 400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। साल 1980 में इसे राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिला था। इससे पहले यह इलाका जयपुर रियासत के राजाओं का शिकारगाह हुआ करता था। आज रणथम्भौर देश के सबसे प्रसिद्ध टाइगर रिज़र्व में गिना जाता है। जहां रॉयल बंगाल टाइगर के साथ तेंदुआ, स्लॉथ भालू, सांभर, चीतल, नीलगाय और कई दुर्लभ पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं।
यहां की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जंगल पहाड़ियों, झीलों और खुले मैदानों से घिरा हुआ है, जिससे सफारी के दौरान जानवरों को खुले में देखने का अनुभव मिलता है। जीप और कैंटर सफारी के जरिए पर्यटक जंगल के भीतर जाकर वाइल्डलाइफ को बेहद करीब से देख सकते हैं, जो जिंदगी भर याद रहने वाला अनुभव बन जाता है।
शाही आरामगाह – सुजान शेर बाग
रणथम्भौर के बीचों-बीच स्थित सुजान शेर बाग होटल को भारत के सबसे लग्जरी जंगल रिसॉर्ट्स में गिना जाता है। यही वह होटल है, जहां रेहान वाड्रा और अवीवा बेग की सगाई की रस्में होने की खबरें सामने आई हैं। जंगल के बीच बसे इस होटल में रॉयल शेर सुइट और टेंटेड जंगल सुइट जैसे शानदार विकल्प मौजूद हैं।
यहां ठहरना किसी राजसी जीवनशैली का अनुभव लेने जैसा है। होटल की बुकिंग आमतौर पर दो रात और तीन दिन के पैकेज में होती है। जिसमें लग्जरी सुविधाओं के साथ-साथ वाइल्डलाइफ सफारी और प्रकृति के बीच शांति का अनुभव भी शामिल होता है।
ऐतिहासिक रणथम्भौर किला
रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान के भीतर पहाड़ी पर स्थित रणथम्भौर किला इस क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान है। दसवीं शताब्दी में बने इस किले को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है। यह किला कभी चौहान वंश की शक्ति का प्रतीक माना जाता था।
किले की ऊंचाई से पूरे जंगल का नजारा बेहद आकर्षक दिखाई देता है। किले के भीतर कई प्राचीन मंदिर, जलाशय और खंडहर मौजूद हैं। जो यहां के गौरवशाली अतीत की कहानी बयां करते हैं। इतिहास प्रेमियों के लिए यह किला किसी खजाने से कम नहीं है।
आस्था का केंद्र त्रिनेत्र गणेश मंदिर
रणथम्भौर किले के अंदर स्थित त्रिनेत्र गणेश मंदिर धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह देश का एकमात्र ऐसा मंदिर है। जहां भगवान गणेश की तीन नेत्रों वाली प्रतिमा विराजमान है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मन्नतें जरूर पूरी होती हैं।
शादी, सगाई या किसी भी शुभ कार्य से पहले देशभर से लोग भगवान गणेश को निमंत्रण पत्र भेजते हैं। यह परंपरा आज भी निभाई जाती है, जो इस मंदिर की विशेष धार्मिक मान्यता को दर्शाती है।
वाइल्डलाइफ और फोटोग्राफी का स्वर्ग है पदम तालाब
रणथम्भौर के भीतर स्थित पदम तालाब वन्य जीव प्रेमियों और फोटोग्राफर्स के बीच बेहद लोकप्रिय है। यह झील जानवरों के पानी पीने का प्रमुख स्थान है, जहां अक्सर बाघ, हिरण और अन्य जीव दिखाई देते हैं।
तालाब के पास बने प्राचीन खंडहर और चारों ओर फैली हरियाली इस जगह को और भी खास बना देती है। सूर्यास्त के समय यहां का नजारा बेहद मनमोहक होता है।
शांति और हरियाली का ठिकाना जोगी महल
जोगी महल कभी जयपुर के राज परिवार का विश्राम स्थल हुआ करता था। आज यह महल अपनी ऐतिहासिक संरचना और आसपास की हरियाली के लिए जाना जाता है। महल के पास मौजूद विशाल बरगद का पेड़ पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। यह स्थान उन लोगों के लिए आदर्श है, जो प्रकृति के बीच सुकून के कुछ पल बिताना चाहते हैं।
रणथम्भौर क्यों है खास?
रणथम्भौर सिर्फ एक नेशनल पार्क नहीं, बल्कि यह इतिहास, आस्था और प्रकृति का अनोखा संगम है। यहां एक ओर जंगल की रोमांचक सफारी है, तो दूसरी ओर सदियों पुरानी विरासत और धार्मिक मान्यताएं। शायद यही वजह है कि रणथम्भौर आज भी देश-विदेश के पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है और हर किसी के दिल में अपनी खास जगह बना लेता है।
रणथम्भौर कैसे पहुंचें?
रणथम्भौर राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में स्थित है और देश के बड़े शहरों से यहां पहुंचना काफी आसान है। आप सड़क, रेल या हवाई मार्ग तीनों विकल्पों में से अपनी सुविधा के अनुसार यात्रा कर सकते हैं।
हवाई मार्ग से
रणथम्भौर का नजदीकी एयरपोर्ट जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जो यहां से लगभग 160 किलोमीटर दूर स्थित है।
जयपुर एयरपोर्ट से सवाई माधोपुर या रणथम्भौर के लिए टैक्सी और कैब आसानी से मिल जाती हैं। सड़क मार्ग से यह सफर करीब 3 से 4 घंटे में पूरा हो जाता है।
रेल मार्ग से
रणथम्भौर पहुंचने का सबसे सुविधाजनक तरीका रेल मार्ग माना जाता है।
यहां का नजदीकी रेलवे स्टेशन सवाई माधोपुर जंक्शन है। जो रणथम्भौर नेशनल पार्क से लगभग 10 किलोमीटर दूर है।
दिल्ली, मुंबई, जयपुर, आगरा और कोटा जैसे बड़े शहरों से सवाई माधोपुर के लिए सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं। स्टेशन से टैक्सी या ऑटो लेकर आप आसानी से पार्क या होटल तक पहुंच सकते हैं।
सड़क मार्ग से
रणथम्भौर सड़क मार्ग से भी अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
जयपुर से सवाई माधोपुर की दूरी करीब 160 किलोमीटर है। जिसे आप कार या बस से तय कर सकते हैं।
राजस्थान रोडवेज और प्राइवेट बसें जयपुर, कोटा और आगरा से नियमित रूप से चलती हैं। खुद की कार से आने वाले पर्यटकों के लिए रास्ता साफ और सुविधाजनक है।
घूमने का सही समय
रणथम्भौर घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच माना जाता है। जब मौसम सुहावना रहता है और जंगल सफारी का मजा दोगुना हो जाता है।


