
Saras Rajsakhi Fair 2025 (Image Credit-Social Media)
Saras Rajsakhi Fair 2025
जयपुर, 31 दिसंबर। सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला–2025 अब अपने अंतिम सप्ताह में पहुँच चुका है और इसी के साथ इसकी रौनक अपने शिखर पर नजर आ रही है। नववर्ष की पूर्व संध्या पर मेला जयपुरवासियों के साथ-साथ देश-विदेश से आए पर्यटकों के लिए सबसे पसंदीदा आकर्षण बन गया है। सर्दियों की सुहानी शामें, रंगीन माहौल और देसी स्वादों का संगम मेले को खास बना रहा है। छुट्टियों का आनंद लेने, पारंपरिक खरीदारी करने और ग्रामीण संस्कृति को करीब से देखने के लिए रोज़ाना बड़ी संख्या में लोग मेले में पहुंच रहे हैं, जिससे फुटफॉल में लगातार इज़ाफ़ा दर्ज किया जा रहा है।
मेले का सांस्कृतिक मंच इन दिनों दर्शकों से खचाखच भरा रहता है। बुधवार को आयोजित सांस्कृतिक संध्या में हरियाणा की लोकसंस्कृति की झलक कलाकार ज्योति दास की प्रस्तुति में देखने को मिली। डफ और झूमर नृत्य की ताल पर दर्शक खुद को थिरकने से रोक नहीं पाए। वहीं गौरव राणा द्वारा प्रस्तुत राजस्थानी लोक नृत्य ने मरुस्थलीय संस्कृति की जीवंत तस्वीर मंच पर उतार दी। पारंपरिक वेशभूषा, भावपूर्ण प्रस्तुतियां और लोकसंगीत की गूंज ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया।
सरस राजसखी मेला केवल मैदान तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी इसकी खास चर्चा हो रही है। सोशल मीडिया पर मेला ट्रेंड करता नजर आ रहा है। आम लोग ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स भी मेले की रौनक, स्टॉल्स की विविधता और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की आकर्षक रील्स व पोस्ट साझा कर रहे हैं, जिससे मेले की लोकप्रियता और तेजी से बढ़ रही है।
खरीदारी के शौकीनों के लिए यह मेला किसी खजाने से कम नहीं है। जूट से बने आकर्षक पर्स और सजावटी सामान पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते नजर आते हैं। टेराकोटा और मिट्टी से बने पारंपरिक बर्तन अपनी सादगी और कलात्मकता से लोगों को खूब आकर्षित कर रहे हैं। इसके अलावा विभिन्न राज्यों से आई हथकरघा सिल्क की साड़ियां और रंग-बिरंगे दुपट्टे महिलाओं की पहली पसंद बने हुए हैं। हर स्टॉल देश की ग्रामीण कला और शिल्प की एक अलग कहानी बयां करता है।
कुल मिलाकर, सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला–2025 अपने अंतिम सप्ताह में भी पूरे जोश और उमंग के साथ जयपुर की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत कर रहा है। यह मेला न केवल खरीदारी और मनोरंजन का केंद्र है, बल्कि भारतीय लोककला, संस्कृति और परंपराओं का जीवंत उत्सव भी है, जिसका अनुभव लेने से जयपुरवासी ही नहीं, बल्कि देश-विदेश से आए पर्यटक भी स्वयं को रोक नहीं पा रहे हैं।


