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    Home » Tanjavur Maratha Palace History: तमिलनाडु की यात्रा में तंजावुर मराठा पैलेस नहीं देखा तो क्या देखा
    Tourism

    Tanjavur Maratha Palace History: तमिलनाडु की यात्रा में तंजावुर मराठा पैलेस नहीं देखा तो क्या देखा

    Janta YojanaBy Janta YojanaJuly 24, 2025No Comments6 Mins Read
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    Tanjavur Maratha Palace History 

    Tanjavur Maratha Palace History 

    Tanjavur Maratha Palace History: भारत के इतिहास में महलों और किलों की एक समृद्ध परंपरा रही है, जहां स्थापत्य कला, संस्कृति और राजवंशों की अनगिनत कहानियां और उनसे जुड़ी धरोहरें संग्रहीत हैं। इन्हीं अनमोल धरोहरों में से एक है तंजावुर मराठा पैलेस, जो तमिलनाडु के तंजावुर शहर में स्थित है। यह महल सिर्फ अपनी भव्यता और शिल्पकला के लिए नहीं, बल्कि द्रविड़ और यूरोपीय स्थापत्य के अद्भुत संगम के लिए भी प्रसिद्ध है। आज यह महल न केवल इतिहासकारों और स्थापत्य प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, बल्कि देश-विदेश के पर्यटकों को भी अपनी ओर खींचता है। आप भी अगर तमिलनाडु की यात्रा का प्लान बना रहें हैं तो अपनी लिस्ट में तंजावुर मराठा पैलेस को जरूर शामिल करें। वरना ये यात्रा आपकी अधूरी मानी जाएगी।

     तंजावुर मराठा पैलेस कहां स्थित है

    तंजावुर मराठा पैलेस तमिलनाडु के तंजावुर शहर के राजकृष्णपुरम क्षेत्र में स्थित है, जो अपनी सांस्कृतिक धरोहर और ऐतिहासिक महत्व के लिए विख्यात है। यह शहर चोल राजवंश की राजधानी रहा है और इसके अनेक मंदिर, ऐतिहासिक स्थल और सांस्कृतिक विरासत इसे दक्षिण भारत का एक प्रमुख पर्यटन स्थल बनाते हैं। महल का स्थान भी इसे विशेष बनाता है क्योंकि यह शहर के हृदयस्थल में स्थित है, जिससे यहां पहुंचना सुविधाजनक होता है।

    तंजावुर मराठा पैलेस का ऐतिहासिक महत्व

    इस भव्य महल का इतिहास 1534 ईस्वी से शुरू होता है, जब सेवप्पा नायक ने इसका निर्माण करवाया। 1535 में यह महल पूरी तरह बनकर तैयार हुआ। आरंभ में यह महल नायक वंश के अधीन था, लेकिन समय के साथ इसकी सत्ता परिवर्तित होती रही। 1674 में मराठा शासकों ने इस महल पर अधिकार कर लिया और उनके शासनकाल में महल ने नई भव्यता प्राप्त की। इसके बाद अंग्रेजों के अधीन आने पर यह महल ब्रिटिश शासन के तहत भी रहा। इस महल का इतिहास इसकी दीवारों में समाया हुआ है, जो अलग-अलग युगों के स्थापत्य और सांस्कृतिक प्रभाव को अपने भीतर संजोए हुए हैं।

     स्थापत्य कला का अनूठा उदाहरण

    तंजावुर मराठा पैलेस द्रविड़, मराठा, ब्रिटिश और यूरोपीय स्थापत्य शैली का मिश्रित स्वरूप प्रस्तुत करता है। विशाल परिसर में फैले इस महल की दीवारों, छतों और स्तंभों पर की गई चित्रकारी और भित्ति चित्र आज भी जीवंत प्रतीत होते हैं। इसकी वास्तुकला में लकड़ी, ईंट और पत्थर का अत्यंत कुशलता से उपयोग किया गया है। जिससे इसकी भव्यता और मजबूती दोनों झलकती हैं। महल के ऊंचे बुर्ज, खुले आंगन, भव्य गलियारे और दरबार हॉल इसकी विशालता और सौंदर्य को दर्शाते हैं।

    तंजावुर मराठा पैलेस में दर्शनीय स्थल

    तंजावुर मराठा पैलेस केवल एक महल नहीं, बल्कि एक संपूर्ण ऐतिहासिक परिसर है, जिसमें कई भवन, मंदिर, संग्रहालय और हॉल शामिल हैं। यहां हर दर्शनीय स्थल का अपना इतिहास और महत्व है, जो इसे और भी रोचक बनाता है।

    रॉयल पैलेस म्यूजियम

    रॉयल पैलेस म्यूजियम भोसले राजवंश के स्वामित्व में है और यहां शाही हथियारों, मूर्तियों तथा राजघराने द्वारा उपयोग की जाने वाली वस्तुओं का संग्रह प्रदर्शित किया गया है। इस संग्रहालय में प्रदर्शित वस्तुएं उस समय की संस्कृति, जीवनशैली और युद्ध कौशल का परिचय कराती हैं। पर्यटकों के लिए यह एक अनूठा अनुभव होता है, जहां वे मराठा शासनकाल की झलक पा सकते हैं।

     मराठा दरबार हॉल

    महल के भीतर स्थित मराठा दरबार हॉल भव्यता और शाही ठाठ का प्रतीक है। इसे आज आर्ट गैलरी में बदल दिया गया है, लेकिन इसकी दीवारों पर लगे मध्यकालीन चित्रों और देवताओं की पेंटिंग्स अब भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। यह दरबार हॉल न केवल शासकों के दरबार के आयोजन का स्थल था, बल्कि यहां कला और संस्कृति से जुड़े आयोजन भी होते थे।

     सरस्वती महल लाइब्रेरी

    सरस्वती महल को अब एक पुस्तकालय के रूप में विकसित किया गया है, जो भारत के प्राचीनतम और समृद्धतम पुस्तकालयों में से एक माना जाता है। इसमें तमिल, तेलुगु और मराठी भाषाओं में लाखों दुर्लभ पांडुलिपियां संग्रहित हैं, जो विद्वानों और शोधकर्ताओं के लिए अनमोल धरोहर हैं। इस पुस्तकालय की पांडुलिपियां भारतीय साहित्य, इतिहास और संस्कृति का अद्वितीय संग्रह प्रस्तुत करती हैं।

     बेल टावर और वॉच टॉवर

    महल परिसर में स्थित बेल टावर और वॉच टॉवर भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। इन टावरों से महल और उसके आसपास के क्षेत्र का विहंगम दृश्य देखने को मिलता है। ये टावर महल की सुरक्षा व्यवस्था का भी महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं, जहां से पूरे क्षेत्र की निगरानी की जाती थी।

     तंजावुर मराठा सरफोजी द्वितीय द्वारा यूरोप से मंगवाई गईं थी पांडुलिपियां, आज भी हैं मौजूद

    कहा जाता है कि मराठा शासनकाल में तंजावुर के राजा सरफोजी द्वितीय न केवल एक कुशल शासक थे, बल्कि विद्या, कला और विज्ञान में भी गहरी रुचि रखते थे। उनके कार्यकाल में सरस्वती महल लाइब्रेरी ने अनोखे संग्रह के चलते असाधारण ख्याति प्राप्त की। एक बार राजा सरफोजी द्वितीय ने यूरोप से दुर्लभ विज्ञान और चिकित्सा से जुड़ी पुस्तकों का संग्रह मंगवाया, जिन्हें आज भी सरस्वती महल लाइब्रेरी में संरक्षित देखा जा सकता है। इसके अतिरिक्त, उनके संरक्षण में महल परिसर में नाट्यशालाएं और संगीत सभाएं भी आयोजित होती थीं, जिससे यह स्थल उस युग में भी सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बना रहा। यह किस्सा बताता है कि तंजावुर मराठा पैलेस केवल सत्ता का प्रतीक नहीं, बल्कि विद्या और संस्कृति का भी पोषक रहा है।

    तंजावुर मराठा पैलेस घूमने का समय और शुल्क

    तंजावुर मराठा पैलेस पर्यटकों के लिए प्रतिदिन सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक खुला रहता है। भारतीय पर्यटकों के लिए प्रवेश शुल्क मात्र ₹10 प्रति व्यक्ति है, जबकि विदेशी पर्यटकों को ₹60 का शुल्क देना होता है। यदि आप अपने साथ कैमरा लेकर जाते हैं, तो उसके लिए अलग से शुल्क निर्धारित है।

     पर्यटन के दृष्टिकोण से तंजावुर मराठा पैलेस का महत्व

    तंजावुर मराठा पैलेस सिर्फ एक ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि दक्षिण भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का जीवंत उदाहरण है। स्थापत्य प्रेमियों, इतिहासकारों, कलाकारों और शोधकर्ताओं के लिए यह स्थल अद्वितीय है। यह महल प्रतिवर्ष हजारों देशी-विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करता है, जो इसकी भव्यता और इतिहास से रूबरू होने आते हैं। महल परिसर में स्थानीय हस्तशिल्प और कलाकृतियों की दुकानें भी हैं। जहां से पर्यटक स्मृति चिह्न खरीद सकते हैं। राज्य सरकार के संरक्षण और रखरखाव के कारण यह महल आज भी अपने मूल स्वरूप में चमक बिखेर रहा है।

    भारत के अन्य प्रमुख महलों की श्रृंखला में तंजावुर मराठा पैलेस

    भारत में ऐसे अनेक महल हैं, जो स्थापत्य कला और ऐतिहासिक महत्व के कारण प्रसिद्ध हैं। राजस्थान का सिटी पैलेस, मैसूर का अम्बा विलास महल, हैदराबाद का चौमहल्ला पैलेस और मध्य प्रदेश का ग्वालियर किला जैसे महलों की श्रृंखला में तंजावुर मराठा पैलेस भी अपनी अलग पहचान रखता है। दक्षिण भारत की धरोहरों में इसका नाम प्रमुखता से लिया जाता है।तंजावुर मराठा पैलेस इतिहास, स्थापत्य और संस्कृति का एक अद्भुत संगम है, जो समय के साथ और भी गौरवशाली बनता गया है। इसकी भव्यता, कलात्मकता और ऐतिहासिक महत्व इसे दक्षिण भारत के सबसे प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल करते हैं। यदि आप ऐतिहासिक स्थलों में रुचि रखते हैं या फिर स्थापत्य कला के अनोखे नमूनों को देखने के शौकीन हैं, तो तंजावुर मराठा पैलेस आपके लिए एक यादगार अनुभव हो सकता है। यह महल केवल एक भ्रमण स्थल नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और कला की अनमोल धरोहर है, जो आज भी अपने दर्शकों को अतीत की यात्रा पर ले जाती है।

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