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    West Bengal Ka Itihas: बेहद रोचक है पश्चिम बंगाल से जुड़ा नामकरण का इतिहास, अंग्रेजों ने सुलगाई थी यहां जाति धर्म की चिंगारी

    Janta YojanaBy Janta YojanaApril 9, 2025No Comments5 Mins Read
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    West Bengal Ka Itihas (Photo – Social Media)

    West Bengal Ka Itihas (Photo – Social Media)

    West Bengal History in Hindi: जब हम ‘पश्चिम बंगाल’ का नाम सुनते हैं, तो स्वाभाविक रूप से यह प्रश्न उठता है। भारत के पूर्वी भाग में स्थित इस राज्य के नाम में ‘पश्चिम’ क्यों है? इस प्रश्न का उत्तर हमें इतिहास के उन पन्नों में मिलता है, जहां विभाजन, संस्कृति और राजनीति की जटिल गाथाएं लिखी गई हैं।

    बंगाल का विभाजन बना नामकरण की पृष्ठभूमि

    ब्रिटिश शासन के दौरान, बंगाल एक विशाल प्रांत था, जिसमें वर्तमान बांग्लादेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, और उड़ीसा शामिल थे। प्रशासनिक और राजनीतिक कारणों से, 1905 में लॉर्ड कर्ज़न ने बंगाल का विभाजन किया, जिससे पूर्वी बंगाल और असम का नया प्रांत बना, जिसकी राजधानी ढाका थी।

    यह विभाजन मुख्यतः धार्मिक आधार पर था, जिसमें पूर्वी भाग में मुस्लिम बहुसंख्यक और पश्चिमी भाग में हिंदू बहुसंख्यक थे। हालांकि, इस विभाजन का व्यापक विरोध हुआ, विशेषकर हिंदू समुदाय द्वारा, जिन्होंने इसे ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति का हिस्सा माना। विरोध के परिणामस्वरूप, 1911 में विभाजन रद्द कर दिया गया।

    1947 का विभाजन और ‘पश्चिम बंगाल’ का उद्भव

    भारत की स्वतंत्रता के समय, 1947 में, देश का विभाजन हुआ, जिससे बंगाल भी प्रभावित हुआ। बंगाल का पश्चिमी भाग, जहां हिंदू बहुसंख्यक थे, भारत का हिस्सा बना और ‘पश्चिम बंगाल’ कहलाया, जबकि पूर्वी भाग, मुस्लिम बहुसंख्यक क्षेत्र, पाकिस्तान का हिस्सा बना और ‘पूर्वी बंगाल’ या ‘पूर्वी पाकिस्तान’ कहलाया।

    इस प्रकार, ‘पश्चिम बंगाल’ नाम भौगोलिक दिशा से अधिक विभाजन के संदर्भ में था, अर्थात्, विभाजित बंगाल का पश्चिमी हिस्सा। पूर्वी पाकिस्तान में सांस्कृतिक, भाषाई और राजनीतिक भेदभाव के कारण 1971 में एक स्वतंत्रता संग्राम हुआ, जिसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश का गठन हुआ।

    प्लासी की ऐतिहासिक लड़ाई से है बंगाल का गहरा नाता

    बंगाल पर ईस्ट इंडिया कंपनी का कब्ज़ा प्लासी की लड़ाई (1757) के बाद शुरू हुआ और यह भारतीय उपमहाद्वीप में ब्रिटिश सत्ता की नींव रखने वाली निर्णायक घटना बनी। इस कब्ज़े की कहानी सिर्फ सैन्य शक्ति की नहीं थी, बल्कि राजनीतिक चालबाज़ियों, विश्वासघात, और स्थानीय सत्ता संघर्षों की भी थी।

    ईस्ट इंडिया कंपनी ने बंगाल पर कैसे कब्जा किया

    18वीं शताब्दी में बंगाल भारत का सबसे समृद्ध प्रांत था। यहां की रेशमी वस्त्र, मसाले, और अन्य व्यापारिक वस्तुएं यूरोप में बेहद लोकप्रिय थीं।

    ईस्ट इंडिया कंपनी ने पहले तो व्यापार के बहाने यहां की ज़मीनी हकीकत को समझा और फिर धीरे-धीरे सत्ता में दखल देना शुरू किया।

    नवाब सिराजुद्दौला का अंग्रेजों से रहा 36 का आंकड़ा

    सिराजुद्दौला 1756 में बंगाल के नवाब बने। वह ब्रिटिशों की बढ़ती ताकत से नाखुश थे। उन्होंने कलकत्ता (अब कोलकाता) पर हमला करके वहां से ईस्ट इंडिया कंपनी को खदेड़ दिया। यह ब्रिटिशों के लिए सीधा अपमान था।

    वहीं अंग्रेज सैनिक अफसर रॉबर्ट क्लाइव ने नवाब के दरबार में मौजूद असंतुष्ट दरबारियों और सैन्य अधिकारियों से संपर्क साधा। जिसमें सबसे बड़ा नाम मीर जाफर का था।

    मीर जाफर: गद्दारी की पहचान

    मीर जाफर बंगाल सेना का सेनापति था। वह खुद नवाब बनने की महत्वाकांक्षा रखता था। जब रॉबर्ट क्लाइव ने उसे सत्ता का लालच दिया, तो उसने नवाब सिराजुद्दौला के खिलाफ षड्यंत्र रचने का वादा कर लिया।

    प्लासी की लड़ाई में मीर जाफर ने 50,000 सैनिकों के साथ नवाब के पक्ष में युद्ध में भाग लेने का नाटक किया।

    लेकिन जब असली लड़ाई शुरू हुई, तो मीर जाफर और उसके सैनिकों ने ब्रिटिश फौज के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की। सिराजुद्दौला के असली सहयोगी युद्ध में मरते रहे और मीर जाफर तमाशा देखता रहा। इस गद्दारी का नतीजा यह रहा कि, नवाब सिराजुद्दौला हार गया, पकड़ा गया और मार दिया गया।

    मीर जाफर को ईस्ट इंडिया कंपनी ने कठपुतली नवाब बना दिया। लेकिन असली सत्ता कंपनी के हाथ में आ गई।

    इसके बाद क्या हुआ

    इस युद्ध में ब्रिटिशों को मिली जीत के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल की वित्तीय नकेल मिल गई। बंगाल की राजस्व व्यवस्था का पूरा नियंत्रण कंपनी के पास आ गया। 1764 में बक्सर की लड़ाई (Battle of Buxar) में भी ब्रिटिशों ने निर्णायक जीत हासिल की, जिससे उन्हें बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी (कर संग्रह करने का अधिकार) मिल गई।

    धीरे-धीरे भारत भर में कब्ज़ा बढ़ता गया, क्योंकि बंगाल में सफल होने के बाद कंपनी को आत्मविश्वास और धन, दोनों मिल गया था। बंगाल पर ईस्ट इंडिया कंपनी का कब्ज़ा केवल बाहरी आक्रमण से नहीं हुआ, बल्कि यह भीतर के विश्वासघात और सत्ता के लालच की वजह से हुआ। मीर जाफर इतिहास में एक ऐसे गद्दार के रूप में दर्ज हुआ, जिसकी गद्दारी ने पूरे भारत को अंग्रेजों की गुलामी की ओर धकेल दिया।

    बांग्लादेश की वर्तमान में सांस्कृतिक यात्रा

    बांग्लादेश अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें संगीत, नृत्य, कला और साहित्य शामिल हैं। विशेष रूप से, बांग्लादेश की जामदानी साड़ी और नक्सीकांथा कढ़ाई विश्वप्रसिद्ध हैं। हाल के वर्षों में, बांग्लादेश ने आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण प्रगति की है, विशेषकर वस्त्र उद्योग में, जो विश्व में दूसरा सबसे बड़ा है। हालांकि, राजनीतिक अस्थिरता और मानवाधिकारों के मुद्दे भी सामने आए हैं। 2024 में, प्रधानमंत्री शेख हसीना के पद छोड़ने के बाद, नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार बनी, जो वर्तमान में चुनौतियों का सामना कर रही है। ‘पश्चिम बंगाल’ का नामकरण इतिहास की उन घटनाओं का परिणाम है, जिन्होंने इस क्षेत्र की राजनीतिक और सांस्कृतिक संरचना को आकार दिया। बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल, दोनों, अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और इतिहास के माध्यम से दक्षिण एशिया की विविधता और जटिलता को प्रदर्शित करते हैं।

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