
Chambal River Wildlife (Image Credit-Social Media)
Chambal River Wildlife
Chambal River Wildlife: चंबल का नाम सुनते ही मन में पहली छवि डाकुओं की आती है। चंबल की धरती पर आधारित कई फिल्में बन चुकी हैं, जिसमें डाकू और अपहरण के अलावा कुछ नहीं होता है, लेकिन असल में सच्चाई काफी अलग है।
चंबल भले ही डाकुओं की धरती रही हो, लेकिन वहां की खूबसूरती ऊंचे पहाड़ों को टक्कर देती है। अगर आप कुछ अलग और नया अनुभव करना चाहते हैं, तो चंबल की कुछ जगहों पर जरूर समय बिताएं। यह जगह आपको मानसिक शांति देगी।
चंबल खुद में सुंदरता, गहरी घाटियों और वन्यजीवों को समेटे है। यहां की चंबल नदी में पाए जाने वाले घड़ियाल और डॉल्फिन बहुत दुर्लभ होते हैं, और नदी का साफ पानी मन को शांति और सुकून देता है। चंबल की नदी बहुत साफ होती है, क्योंकि वह पूज्यनीय नहीं है। हमारे देश में हर नदी को पवित्र मानकर पूजा जाता है, लेकिन चंबल की नदी शापित मानी जाती है, और यही कारण है कि नदी का पानी बाकी नदियों की तुलना में साफ रहता है।
अगर आप वन्यजीव के शौकीन हैं और पशु-प्रेमी हैं तो राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य जरूर जाएं। यहां अलग-अलग पक्षियों के साथ-साथ कई अलग-अलग 400 से अधिक प्रजाति के सरीसृप देखने को मिल जाते हैं। यहां बोट सफारी का मजा भी ले सकते हैं। चंबल के बीहड़ इलाके में अध्यात्म की झलक भी देखने को मिलती है। चंबल के पास बसे मुरैना में प्रसिद्ध ककनमठ शिव मंदिर है, जिसे 11वीं शताब्दी में राजा कीर्तिराज ने बनवाया था।
माना जाता है कि मंदिर का निर्माण सिर्फ बड़े पत्थरों की सहायता से किया गया था और किसी तरह के सीमेंट और मिट्टी का इस्तेमाल नहीं किया गया था, लेकिन आज भी यह शिव मंदिर पूरी मजबूती के साथ खड़ा है। यह भी कहा जाता है कि मंदिर का निर्माण भूतों ने एक रात में किया था। यही कारण है कि इस सांस्कृतिक विरासत को देखने के लिए पर्यटक दूर-दूर से आते हैं।
इस मंदिर में पूजा-पाठ नहीं होती है और खंडहर होने की वजह से यह एक सांस्कृतिक विरासत के रूप में स्थापित हो चुका है। चंबल नदी के किनारे कई घाटियां भी देखने को मिल जाती हैं, जो किसी रेतीले पहाड़ की तरह लगती हैं। शांत बहती नदी और ऊंची-नीची घाटियों का नजारा मन को बहुत शांति देता है।


