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    Home » मालशेज घाट : पश्चिमी घाट में बसा स्वर्ग
    Tourism

    मालशेज घाट : पश्चिमी घाट में बसा स्वर्ग

    Janta YojanaBy Janta YojanaJune 7, 2025No Comments6 Mins Read
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    Malshej Ghat (Image Credit-Social Media)

    Malshej Ghat (Image Credit-Social Media)

    Malshej Ghat: हमारे देश भारत की एक विशेषता है कि यहां हर तरह के मौसम महसूस करने और देखने को मिलते हैं। हर मौसम का अपना अलग मज़ा है, कहीं सर्दियों में जाकर सुहावने दिन का आनंद ले सकते हैं तो कहीं गर्मी के दिनों में जाकर ठंड का एहसास कर सकते हैं। बरसात के दिनों में अगर प्राकृतिक सुंदरता देखनी है तो कुछ राज्यों की घाटी में जाकर उस हिल स्टेशन का लुत्फ़ उठाएं। मानसून के दिनों में घूमने वाली ऐसी ही एक जगह है महाराष्ट्र राज्य में स्थित मालशेज घाट। पश्चिमी घाट में यह मालशेज घाट एक खूबसूरत पहाड़ी दर्रा पुणे और ठाणे जिलों के बीच की सीमा पर स्थित है, जहां ट्रेकिंग, रॉक क्लाइंबिंग और बर्ड वॉचिंग कर सकते हैं।

    मॉनसून के दौरान यह हिल स्टेशन हरियाली, झरनों से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है और दूसरी ओर यहां स्थित शांत झीलों के बीच आप प्रकृति को निहार सकते हैं। वैसे तो मालशेज घाट साल में कभी भी जाया जा सकता है, जहां हर मौसम का अलग एहसास होता है। लेकिन सबसे मनमोहक मौसम जून से सितंबर के बीच मानसून का होता है, जब प्रकृति हरियाली से भरपूर अपनी ओर आकर्षित करती है। अक्टूबर से फरवरी तक मौसम में ठंड का अनुभव कर सकते हैं और सुहाना मौसम रहता है।

    सड़क किनारे सफर में आप कई झरनों के पानी के साथ फोटोग्राफी का आनंद भी ले सकते हैं। मालशेज़ घाट एक ऐतिहासिक स्थल है जिसकी कड़ी मराठा साम्राज्य से जुड़ी हुई है। छत्रपति शिवाजी महाराज के कई प्रतिष्ठित व्यक्ति जिन्होंने मराठा साम्राज्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी इस स्थल से जुड़े हैं। मालशेज घाट के निकट जुन्नार जहां शिवाजी महाराज का जन्म हुआ था भी घूमने जा सकते हैं।यहां देखने लायक कई मनोरम स्थल है जिनका आप अपने परिवार या दोस्तों के साथ आनंद ले सकते हैं। इनमें प्रमुख हैं :

    हरिश्चंदगढ़ किला :

    6वीं शताब्दी में निर्मित समुद्र तल से करीब 1400 किमी की ऊंचाई पर स्थित यह किला सैलानियों के लिए खास आकर्षण का केंद्र है। यह ऐतिहासिक किला अपने ऊबड़ खाबड़ वाली जगह, प्राचीन गुफाओं और मूर्तियों के कारण मशहूर है। इस किले में केदारेश्वर गुफा में मंदिर जैसी आकृतियां हैं और पानी में आंशिक रूप से डूबा हुआ एक विशाल शिवलिंग भी है जिसे लोग श्रद्धा से देखने आते हैं।

    ज्यादातर लोग ट्रेकिंग के जरिए इस किले में आते समय रास्ते में प्राकृतिक सुंदरता और हरियाली देखते बनती हैं। इस किले में ऊपर लटकती हुई चट्टान जिसे कोंकण क्रैक कहते हैं मुख्य आकर्षण का केंद्र रहता है। यहां से घाटी के आसपास का मनोरम दृश्य बहुत सुहावना लगता है। यहां से सूर्योदय देखने के लिए भी पर्यटकों की अच्छी भीड़ जमा होती है।

    पिंपलगांव जोगा बांध :

    महाराष्ट्र के पुष्पावती नदी पर बना यह बांध प्रकृति और पक्षी प्रेमियों के लिए पसंदीदा जगह है। खासकर इस जगह भारी तादाद में प्रवासी पक्षी आते हैं जिनमें फ्लेमिंगो, सारस,कॉर्मोरेंट्स आदि प्रमुख हैं। इस जगह परिवार, दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने के साथ शांत वातावरण में फोटोग्राफी का आनंद भी ले सकते हैं।

    फ्लेमिंगो पॉइंट :

    पिंपलगांव जोगा बांध के पास भारी तादाद में आने वाले प्रवासी पक्षियों को देखने के लिए मालशेज घाट का फ्लेमिंगो पॉइंट सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। हरे भरे घाटी के बीच नीले रंग के पानी की झील में गुलाबी रंग के पंख फैलाते ये फ्लेमिंगोज एक सुनहरा दृश्य प्रस्तुत करते हैं। इन प्रवासी पक्षियों के अलावा अन्य पक्षी और जानवर भी आपको देखने को मिल जाएंगे।

    अजोबा पहाड़ी किला :

    यह किला पर्यटकों को रोमांचक अनुभव के साथ आध्यात्म से भी परिचय कराता है। ट्रेकिंग के जरिए आप घने जंगलों और चट्टानों से गुजरते हुए यहां पहुंच सकते हैं। शांत और खूबसूरत वातावरण का एहसास करने ज्यादातर लोग यहां आते हैं।

    रामायण कथा से जुड़े होने के कारण इस जगह का पौराणिक महत्व भी है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान राम ने जब सीता का त्याग किया था तब माता सीता यहीं महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में रुकी थीं। यहां समुद्र तट पर स्थित लव-कुश गुफाएं भी आकर्षण का केंद्र हैं।

    कुक्कड़ेश्वर मंदिर :

    महाराष्ट्र के कुक्कड़ नदी के किनारे भगवान शिव को समर्पित यह कुक्कड़ेश्वर मंदिर करीब 800 साल पुराना है। पत्थरों से बना यह मंदिर अपने स्थापत्य कला के लिए मशहूर है। महाशिवरात्रि और श्रावण महीने में यह स्थान शिव भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। भारी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां घूमने आते हैं।

    भीमाशंकर वन्यजीव अभ्यारण्य:

    इस अभ्यारण्य में आप कई प्रकार के वनस्पति, जीव, पक्षी देख सकते हैं। इसमें घने जंगलों के बीच होकर प्राकृतिक परिवेश में आप ट्रेकिंग ट्रेल्स का आनंद ले सकते हैं। वन्यजीव प्रेमियों के लिए यह एक खास जगह है।

    मालशेज वॉटरफॉल :

    यह झरना मॉनसून के मौसम में अपने खूबसूरती के चरम पर रहता है। हरे भरे वादियों में ऊंचाई से गिरता झरना अपने पानी के आवाज़ से सैलानियों को मंत्रमुग्ध कर देता है। यहां पर्यटक फोटोग्राफी और प्रकृति दोनों का लुत्फ़ उठा सकते हैं।

    कोंकणकडा :

    यह जगह महाराष्ट्र के ग्रैंड कैन्यन के नाम से भी मशहूर है। पश्चिमी घाट के इस दर्रा से वहां के प्राकृतिक और हरे भरे परिवेश का दृश्य लोगों का मन मोह लेता है। ट्रेकर्स और रोमांचक गतिविधियों के प्रेमी लोगों के लिए यह जगह खास आकर्षण का केंद्र रहता है।

    कैसे पहुंचें ?

    हवाई मार्ग से मालशेज घाट पहुंचने के लिए निकटतम हवाई अड्डा पुणे का अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है जो देश के बाकी शहरों से अच्छी तरह जुड़ा है। यहां से ये घाट करीब 115 किमी की दूरी पर स्थित है। बस या टैक्सी के द्वारा यहां सैलानी पहुंच सकते हैं।

    रेल मार्ग से यहां पहुंचने के लिए पुणे के अलावा कल्याण रेलवे स्टेशन जो 85 किमी की दूरी पर निकटतम रेलवे स्टेशन है। बस और टैक्सी के माध्यम से आप मालशेज घाट पहुंच सकते हैं।

    सड़क मार्ग से मालशेज घाट मुंबई और पुणे दोनों प्रमुख शहरों से आसानी से पहुंचा जा सकता है। मुंबई से मालशेज घाट करीब 130 किमी और पुणे से 120 किमी की दूरी पर है। अपने निजी वाहन, टैक्सी या बस के द्वारा यहां पहुंचा जा सकता है।

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