
Bihar Politics: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले 1 अगस्त 2025 से 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने का ऐलान कर सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। इस योजना से 1.67 करोड़ घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिलने वाली है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह ऐलान वोट बटोरने के लिए किया गया तात्कालिक फैसला है, या फिर लंबे समय तक टिक सकने वाली नीतिगत योजना?
महिला आरक्षण के बाद बिजली फ्री एक टारगेटेड चुनावी पैकेज?
महिलाओं के लिए 35% आरक्षण का फैसला पहले ही नीतीश सरकार को महिला मतदाताओं के बीच मजबूत स्थिति दिला चुका है। अब मुफ्त बिजली का ऐलान सीधे तौर पर घरेलू महिलाओं, गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की जेब को राहत देने वाला है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह ‘वोट-बैंक माइक्रो टारगेटिंग’ का हिस्सा है। महिला आरक्षण के बाद यह योजना ‘घर-घर तक पहुंचने’ और परिवारों में ‘महिला मतदाता को प्रभावित करने’ का एक शक्तिशाली हथियार बन सकती है।
यू-टर्न या यूटिलिटी? नीतीश की नीयत पर सवाल
दिलचस्प बात यह है कि 12 जुलाई को ही बिहार सरकार के वित्त विभाग ने मुफ्त बिजली की खबरों को “भ्रामक” बताया था। लेकिन ठीक एक हफ्ते के भीतर नीतीश कुमार ने न सिर्फ उस खबर की पुष्टि की, बल्कि यूनिट सीमा को 100 से बढ़ाकर 125 कर दिया।
यही नहीं, नीतीश पहले मुफ्त योजनाओं के मुखर विरोधी रहे हैं। वे सार्वजनिक मंचों से कहते रहे हैं कि “मुफ्त बिजली देने से ज्यादा गलत कुछ नहीं।” अब वही मुख्यमंत्री सबसे बड़ी मुफ्त बिजली योजना लेकर सामने आए हैं। यह पलटी नीतीश की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है। विरोधी इसे सियासी दबाव में लिया गया फैसला मान रहे हैं।
तेजस्वी की काट या जनता की राहत?
विश्लेषकों की नजर में यह घोषणा विपक्षी नेता तेजस्वी यादव के वादे 200 यूनिट मुफ्त बिजली की काउंटर स्ट्रेटेजी है। नीतीश जानते हैं कि मुफ्त बिजली जैसे वादे ग्रामीण बिहार में सीधे असर करते हैं, खासकर तब जब महंगाई चरम पर हो और बिजली बिल मध्यम वर्ग पर बोझ बना हो।
शहरी क्षेत्रों में 125 यूनिट बिजली की बचत का मतलब प्रति माह करीब 700 रुपये की राहत है। यह सीधे तौर पर बिजली से चलने वाले घरेलू उपकरणों पर निर्भर परिवारों को फायदेमंद लगेगा।
नीतीश के फैसले की सियासी कीमत
जहाँ एक ओर यह ऐलान जनता को साधने की कोशिश है, वहीं दूसरी ओर नीतीश को ‘यू-टर्न बाबू’ कहकर विपक्ष ने हमला बोल दिया है। सोशल मीडिया पर उनके पुराने भाषण वायरल हैं, जहां वे मुफ्त योजनाओं को ‘लोकलुभावन और नुकसानदायक’ कहते रहे हैं। राजद ने बयान दिया, नीतीश जी ने खुद को झूठा साबित कर दिया है। सत्ता के लिए वे कोई भी दिशा बदल सकते हैं।”
योजना की जमीनी हकीकत और आर्थिक बोझ
यह योजना अगर पूरी तरह लागू होती है, तो इसके पीछे भारी सब्सिडी का बोझ राज्य सरकार पर पड़ेगा। वित्त विभाग पहले ही आशंका जता चुका है कि राजस्व घाटा और ऊर्जा कंपनियों की वित्तीय सेहत पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, 10,000 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य और कुटीर ज्योति योजना जैसे प्रावधान जमीनी स्तर पर लागू करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी।
मास्टरस्ट्रोक या मौकापरस्ती?
125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना नीतीश कुमार के लिए एक बड़ा चुनावी दांव है, जो महिला आरक्षण के साथ मिलकर ‘वोटर्स का सोशल इंजीनियरिंग पैकेज’ बन सकता है। लेकिन उनकी नीतिगत विश्वसनीयता को इससे झटका भी लग सकता है। यदि यह योजना सही ढंग से लागू हुई, तो यह नीतीश कुमार की चुनावी नैया पार लगा सकती है, वरना यह एक सस्ती लोकप्रियता की मिसाल बनकर रह जाएगी।