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    अंडमान-निकोबार: समुद्र, जंगल और रहस्य से भरी वह यात्रा जिसे आँखें कभी भूल नहीं पातीं

    Janta YojanaBy Janta YojanaMarch 13, 2026No Comments6 Mins Read
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    Andaman Nicobar Travel

    Andaman Nicobar Travel

    Andaman Nicobar Travel: अंडमान-निकोबार की यात्रा केवल पर्यटन नहीं होती, वह एक ऐसा अनुभव है जो धीरे-धीरे मन में उतरता है—समुद्र की अनंत नीली लहरों, घने वर्षावनों की नमी, रहस्यमयी जनजातियों की उपस्थिति और समुद्र के भीतर छिपी रंगीन दुनिया के साथ। जब विमान पोर्ट ब्लेयर के ऊपर मंडराने लगता है तो नीचे फैला गहरे नीले समुद्र का विस्तार और उसके बीच बिखरे हरे द्वीपों का दृश्य किसी चित्रकार की कल्पना जैसा लगता है। लगता है मानो प्रकृति ने अपनी सबसे सुंदर रचना यहीं बनाकर छोड़ दी हो। अंडमान-निकोबार का हर द्वीप एक अलग कहानी कहता है—कहीं इतिहास की, कहीं रोमांच की, तो कहीं समुद्र के भीतर छिपी जीवंत दुनिया की।

    अंडमान की यात्रा में सबसे रहस्यमय अनुभवों में से एक है बारातांग द्वीप की यात्रा। यह रास्ता सामान्य पर्यटन मार्ग जैसा नहीं है। यहाँ पहुँचने के लिए परमिट लेना पड़ता है और वाहनों को समूह में जंगल के भीतर से जाने की अनुमति दी जाती है, क्योंकि यह क्षेत्र विश्व की सबसे प्राचीन जनजातियों में से एक जारवा जनजाति का निवास क्षेत्र है। सुबह-सुबह जब काफिले की गाड़ियाँ एक साथ जंगल की सड़क पर चलती हैं तो दोनों ओर घना वर्षावन इतना सघन होता है कि सूरज की रोशनी मुश्किल से जमीन तक पहुँचती है। हवा में मिट्टी और पत्तों की गंध होती है और बीच-बीच में ऐसा लगता है जैसे जंगल स्वयं आपको देख रहा हो।

    इस यात्रा का एक अनकहा आकर्षण यह भी होता है कि शायद रास्ते में कहीं जारवा जनजाति के लोग दिख जाएँ। ये लोग आधुनिक सभ्यता से लगभग पूरी तरह दूर रहते हैं और उनका जीवन हजारों वर्षों से लगभग उसी रूप में चला आ रहा है। कभी-कभी जंगल के किनारे से अचानक कुछ लोग दिख जाते हैं—नंगे पैर, धनुष-बाण लिए, बिल्कुल चुपचाप देखते हुए। वह क्षण अजीब-सा रोमांच और रहस्य पैदा करता है, मानो आप किसी दूसरे युग के लोगों को देख रहे हों।

    बारातांग पहुँचने पर एक और अद्भुत प्राकृतिक दृश्य देखने को मिलता है—चूना पत्थर की गुफाएँ (Limestone Caves)। नाव से मैंग्रोव के बीच से होकर वहाँ पहुँचना ही अपने आप में एक अनुभव है। मैंग्रोव के जड़ों से भरे पानी में नाव धीरे-धीरे आगे बढ़ती है और ऊपर झुकी शाखाएँ ऐसा आभास देती हैं मानो कोई प्राकृतिक सुरंग बन गई हो। गुफाओं के भीतर चूना पत्थर की लटकती संरचनाएँ हजारों वर्षों में बनी हैं—कहीं वे शिवलिंग जैसी दिखती हैं, कहीं झरने की धार जैसी। प्रकृति ने चुपचाप समय के साथ पत्थरों को मूर्तियों में बदल दिया है।

    लेकिन इस यात्रा में रोमांच कभी-कभी अचानक भय में भी बदल सकता है। गुफाओं को देखकर जब हम वापस पार्किंग की ओर लौटे और गाड़ी स्टार्ट हुई, तभी अचानक जंगल से लगभग आठ-दस जारवा स्त्री-पुरुष निकलकर गाड़ी के आसपास आ गए। उन्होंने गाड़ी को चारों ओर से घेर लिया और डिग्गी तथा दरवाजे खोलने की कोशिश करने लगे। वातावरण कुछ ही क्षणों में तनावपूर्ण हो गया। ड्राइवर ने घबराहट में अपनी तरफ का शीशा खोल दिया, और तभी उनमें से एक ने किसी नुकीली चीज से उसके हाथ पर वार कर दिया। वह क्षण बेहद भयावह था—जंगल, जनजाति और हम सब एक बंद गाड़ी के भीतर। लेकिन ड्राइवर ने तुरंत गाड़ी तेजी से आगे बढ़ा दी और हम किसी तरह वहाँ से निकल सके। आज भी उस घटना को याद करने पर शरीर में सिहरन दौड़ जाती है। अंडमान का जंगल केवल सुंदर ही नहीं, रहस्यमय और खतरनाक भी है।

    अंडमान की यात्रा का दूसरा रूप है समुद्र के भीतर छिपी अद्भुत दुनिया। नील द्वीप (अब शहीद द्वीप) में मैंने स्कूबा डाइविंग का अनुभव किया था। शुरुआत में प्रशिक्षकों ने हमें जमीन पर बैठाकर विस्तार से प्रशिक्षण दिया—पानी के अंदर इस्तेमाल होने वाले संकेत, सांस लेने की तकनीक और सुरक्षा के नियम। उसके बाद हमें समुद्र के बीच नाव से कई किलोमीटर दूर ले जाया गया। वहाँ जब गैस सिलेंडर और मास्क के साथ धीरे-धीरे समुद्र में उतरना शुरू किया तो ऊपर की दुनिया धीरे-धीरे गायब हो गई और एक नई दुनिया सामने खुल गई।

    करीब 40 फीट नीचे समुद्र के भीतर पहुँचते ही ऐसा लगा मानो किसी रंगीन शहर में प्रवेश कर गए हों। चारों ओर फैले कोरल गार्डन किसी जीवित बगीचे की तरह दिख रहे थे। लाल, पीले, नीले और बैंगनी रंग की हजारों मछलियाँ बिल्कुल शरीर के पास से तैरती हुई गुजर रही थीं। कुछ इतनी करीब आ जाती थीं कि लगता था जैसे हाथ बढ़ाकर छू लें। कोरल की संरचनाएँ भी अलग-अलग आकारों में थीं—कहीं मधुमक्खी के छत्ते जैसी, कहीं फूलगोभी जैसी, कहीं तेंदुए की त्वचा जैसी और कहीं मानव मस्तिष्क की संरचना जैसी। उस शांत पानी के भीतर केवल अपनी सांसों की आवाज सुनाई देती थी और सामने फैली एक जीवित, रंगीन दुनिया दिखाई देती थी। वह अनुभव इतना रोमांचकारी था कि समय का एहसास ही नहीं रहा। लेकिन बाद में सोचने पर लगता है कि वह एक जोखिम भरा साहस भी था—क्योंकि समुद्र की गहराई हमेशा अनिश्चित होती है।

    एलीफेंट बीच (हैवलॉक द्वीप) भी अंडमान की यात्रा का एक अद्भुत पड़ाव है। यहाँ पहुँचने के लिए समुद्र के रास्ते जाना पड़ता है। बीच की रेत सफेद और पानी इतना पारदर्शी कि नीचे पड़े कोरल साफ दिखाई देते हैं। कई जगह समुद्र में टूटे हुए मृत कोरल भी दिखाई देते हैं जिन्हें पार करते हुए आगे बढ़ना पड़ता है। वहीं समुद्र में चलते-चलते हाथ में स्टार फिश उठाने का अनुभव भी मिला—मानो समुद्र का कोई जीवंत सितारा हाथ में आ गया हो।

    पोर्ट ब्लेयर में समुद्री रोमांच का एक और अद्भुत अनुभव है सी वॉकिंग या हेलमेट डाइविंग। इसमें एक विशेष हेलमेट पहनकर सीधे समुद्र की सतह के नीचे चला जाता है। सिर पर भारी हेलमेट होता है जिसमें ऊपर से हवा आती रहती है और आप समुद्र के भीतर चलते हुए मछलियों और कोरल को बिल्कुल पास से देख सकते हैं। समुद्र की उस शांत दुनिया में चलते हुए लगता है मानो किसी दूसरे ग्रह पर आ गए हों।

    हाल के वर्षों में एलीफेंट द्वीप के पास एक और रोमांचक सुविधा शुरू हुई है—सेमी सबमरीन। यह नाव आधी पानी के ऊपर और आधी नीचे होती है। नीचे बने कांच के कक्ष से समुद्र के भीतर की दुनिया साफ दिखाई देती है। जब नाव धीरे-धीरे आगे बढ़ती है तो खिड़कियों के सामने रंग-बिरंगी मछलियाँ, कोरल रीफ और समुद्री पौधे गुजरते जाते हैं। ऐसा लगता है जैसे किसी विशाल प्राकृतिक एक्वेरियम के बीच बैठकर समुद्र की जिंदगी देख रहे हों।

    अंडमान-निकोबार की यात्रा इसलिए अनोखी है क्योंकि यहाँ एक ही जगह पर प्रकृति के कई रूप दिखाई देते हैं—घने जंगल, रहस्यमयी जनजातियाँ, ऐतिहासिक स्मृतियाँ, सफेद समुद्र तट और समुद्र के भीतर की अद्भुत जैविक दुनिया। यह यात्रा केवल देखने की नहीं, महसूस करने की यात्रा है। कभी जंगल का भय रोमांच में बदल जाता है, कभी समुद्र की गहराई आश्चर्य में। और जब लौटते समय विमान फिर से उन द्वीपों के ऊपर उड़ता है, तो मन में बस यही भावना रह जाती है कि प्रकृति ने धरती पर अगर कहीं अपना स्वर्ग बनाया है तो उसका एक अंश अंडमान-निकोबार के इन द्वीपों में जरूर बसता है।

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