
3 Iconic Places Near India Gate That Will Make Your Trip Memorable
Best Places To Visit Near India Gate Delhi: दिल्ली को अगर भारत का दिल कहा जाए, तो इंडिया गेट उसकी धड़कन है। यहां हर दिन सुबह से देर शाम तक लोगों की आवाजाही बनी रहती है। कोई परिवार के साथ पिकनिक मनाने आता है, तो कोई दोस्तों के साथ तस्वीरें खिंचवाने। इंडिया गेट सिर्फ एक स्मारक नहीं है, बल्कि यह भारतीय सैनिकों के बलिदान और देशभक्ति की भावना का प्रतीक भी है।
खुले मैदान, हरियाली, शाम के वक्त जलती रोशनी और बीचों-बीच स्थित अमर जवान ज्योति ये सब मिलकर इस जगह को खास बना देते हैं। लेकिन अक्सर इंडिया गेट घूमने के बाद लोगों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि अब आगे कहां जाएं। अगर आप भी यही सोचते हैं, तो आपके लिए इंडिया गेट के पास ही मौजूद कुछ ऐसी ऐतिहासिक जगहें हैं, जो आपकी यात्रा को और यादगार बना सकती हैं-
हुमायूं का मकबरा
दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में स्थित हुमायूं का मकबरा इतिहास और स्थापत्य कला में रुचि रखने वालों के लिए किसी खजाने से कम नहीं है। यह मकबरा मुगल सम्राट हुमायूं की याद में उनकी पत्नी बेगम हमीदा बानो बेगम द्वारा बनवाया गया था। इसका निर्माण कार्य 1565 ईस्वी में शुरू हुआ और 1572 ईस्वी में पूरा हुआ। हुमायूं का मकबरा भारत का पहला ऐसा स्मारक माना जाता है, जिसमें चारबाग शैली का इस्तेमाल किया गया। इसी शैली ने आगे चलकर ताजमहल जैसी ऐतिहासिक इमारतों को प्रेरित किया। लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से बनी यह इमारत फारसी और मुगल स्थापत्य कला का बेहतरीन उदाहरण है।
इस मकबरे की खास बात यह है कि यहां कदम रखते ही एक अलग ही शांति का एहसास होता है। हरे-भरे बाग, ऊंचा गुंबद और संतुलित डिजाइन इसे दिल्ली के सबसे खूबसूरत ऐतिहासिक स्थलों में शामिल करता है। यही वजह है कि इसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल का दर्जा भी दिया है। इंडिया गेट से हुमायूं का मकबरा लगभग 6 से 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आप यहां जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम मेट्रो स्टेशन के जरिए आसानी से पहुंच सकते हैं।
लोधी गार्डन
अगर आप इंडिया गेट के आसपास किसी ऐसी जगह की तलाश में हैं, जहां थोड़ी शांति मिले और भीड़-भाड़ से दूर सुकून के पल बिताए जा सकें, तो लोधी गार्डन सबसे बेहतर विकल्प है। यह गार्डन दिल्ली के साउथ सेंट्रल इलाके में स्थित है और स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों के बीच भी काफी लोकप्रिय है।
लोधी गार्डन का इतिहास 15वीं और 16वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है। यहां लोधी वंश के शासकों से संबंधित कई ऐतिहासिक मकबरे मौजूद हैं, जिनमें सिकंदर लोधी और मोहम्मद शाह के मकबरे प्रमुख हैं। ब्रिटिश काल के दौरान इस पूरे इलाके को एक सुंदर बगीचे के रूप में विकसित किया गया, ताकि इन ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखा जा सके।
आज लोधी गार्डन सिर्फ एक ऐतिहासिक स्थल नहीं रह गया है। सुबह-सुबह यहां लोग वॉक, योग और मेडिटेशन करते नजर आते हैं, तो दिन के समय परिवार और कपल्स हरियाली के बीच समय बिताते हैं। इतिहास और प्रकृति का ऐसा मेल दिल्ली में बहुत कम देखने को मिलता है।
इंडिया गेट से लोधी गार्डन की दूरी करीब 3.4 किलोमीटर है। यहां पहुंचने के लिए जोर बाग मेट्रो स्टेशन सबसे नजदीकी विकल्प है, जो येलो लाइन पर स्थित है।
जामा मस्जिद
दिल्ली की ऐतिहासिक पहचान की बात हो और जामा मस्जिद का जिक्र न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। चांदनी चौक इलाके में स्थित यह मस्जिद भारत की सबसे बड़ी और भव्य मस्जिदों में से एक है। इसका निर्माण मुगल सम्राट शाहजहां ने 17वीं शताब्दी में करवाया था। 1644 में शुरू हुआ इसका निर्माण कार्य 1656 में पूरा हुआ। लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से बनी यह मस्जिद मुगल स्थापत्य कला की शानदार मिसाल है। इसके ऊंचे गुंबद, लंबी मीनारें और विशाल प्रांगण इसे देखने लायक बनाते हैं। एक समय में यहां हजारों लोग एक साथ नमाज अदा कर सकते हैं।
जामा मस्जिद सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह दिल्ली की सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा भी है। यहां से आपको पुरानी दिल्ली की असली रौनक देखने को मिलती है। मस्जिद घूमने के बाद आप चांदनी चौक की गलियों में घूम सकते हैं और वहां के मशहूर स्ट्रीट फूड का स्वाद भी ले सकते हैं।
इंडिया गेट से जामा मस्जिद लगभग 5.8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां पहुंचने के लिए जामा मस्जिद या चांदनी चौक मेट्रो स्टेशन का इस्तेमाल किया जा सकता है।
अगर आप दिल्ली घूमने आए हैं और इंडिया गेट देख चुके हैं, तो आपकी यात्रा यहीं खत्म नहीं होनी चाहिए। हुमायूं का मकबरा, लोधी गार्डन, जामा मस्जिद
इन तीनों जगहों को एक दिन में आसानी से घूमा जा सकता है। ये स्थल न सिर्फ देखने में खूबसूरत हैं, बल्कि दिल्ली के इतिहास को समझने का मौका भी देते हैं। अगली बार जब आप इंडिया गेट जाएं, तो इन ऐतिहासिक जगहों को अपनी लिस्ट में जरूर शामिल करें। क्योंकि दिल्ली दिल्ली घूमने का लुत्फ हम तभी उठा सकते हैं जब हम इसके इतिहास से जुड़ते हैं।


