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    Bihar Famous Devi Mata Mandir: ये हैं बिहार में प्रसिद्ध और पवित्र सिद्ध देवी मंदिर, जहां नवरात्र पर होती है हर मुराद पूरी

    Janta YojanaBy Janta YojanaApril 5, 2025No Comments6 Mins Read
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    Bihar Famous Devi Mata Mandir

    Bihar Famous Devi Mata Mandir

    Bihar Famous Devi Mata Mandir: भारत में देवी की पूजा आदिकाल से होती आ रही है। शक्ति, भक्ति और श्रद्धा की परंपरा हमारे देश की आत्मा है। देवी दुर्गा, काली, लक्ष्मी, सरस्वती आदि अनेक रूपों में मां की आराधना होती है। इन्हीं में से एक पावन भूमि है बिहार, जहां देवी की पूजा बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ की जाती है। यहां शक्ति के प्रतीक इन देवी मंदिरों में दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं और मुंहमांगी मनोकामनाएं पूर्ण होने का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। आइए, जानते हैं बिहार के कुछ प्रमुख और पवित्र देवी मंदिरों के बारे में विस्तार से-

    1. भारत का सबसे प्राचीन देवी मंदिर मुण्डेश्वरी देवी मंदिर (कैमूर, भभुआ)

    मुण्डेश्वरी देवी मंदिर बिहार के कैमूर जिले के भभुआ में स्थित है। इसे भारत का सबसे प्राचीन जीवित मंदिर माना जाता है। यह मंदिर 625 ईस्वी से भी पहले का है। इसकी मूर्तियां तथा स्थापत्य कला अत्यंत अद्भुत है।

    इस मंदिर में देवी दुर्गा के ‘मुण्डेश्वरी’ रूप की पूजा होती है, जो चार भुजाओं वाली हैं और सिंह पर सवार हैं। यहां से देवी के साथ भगवान शिव की भी पूजा होती है। नवरात्रि के समय यहां विशेष पूजा और भव्य मेले का आयोजन होता है। माना जाता है कि इस मंदिर में की गई पूजा विशेष फलदायी होती है और मनोकामना शीघ्र पूर्ण होती है।

    2. पटनेश्वरी देवी मंदिर (पटना सिटी)

    पटनेश्वरी मंदिर पटना सिटी (पुराने पटना) में स्थित है। यह माता दुर्गा के एक विशिष्ट रूप को समर्पित है। इस मंदिर को बहुत पुराना और ऐतिहासिक माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि पटना शहर का नाम भी पटनेश्वरी देवी के नाम पर पड़ा है। यहां की देवी को नगर की रक्षिका माना जाता है।

    विशेषकर दुर्गा पूजा और नवरात्रि के समय यहाँ भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। मंदिर में देवी की आरती, पुष्पांजलि और हवन अत्यंत शुभ माने जाते हैं।

    3. मां काली मंदिर (दरभंगा)

    दरभंगा का काली मंदिर मिथिला क्षेत्र की आस्था का केंद्र है। यह मंदिर बिहार के प्रमुख तंत्र साधना स्थलों में से एक माना जाता है। यहां की देवी अत्यंत जाग्रत मानी जाती हैं। काली पूजा के समय इस मंदिर का वातावरण अत्यंत भक्ति से भर जाता है। श्रद्धालु यहां दीपदान, बलि और विशेष मंत्र जाप करते हैं।

    यह मंदिर एक विशाल परिसर में स्थित है और आसपास का वातावरण भी अत्यंत शांत और आध्यात्मिक होता है।

    4. मां छिन्नमस्तिका मंदिर (रामगढ़ – बिहार/झारखंड सीमा पर)

    यह मंदिर बिहार और झारखंड की सीमा पर स्थित है और देवी छिन्नमस्तिका को समर्पित है। छिन्नमस्तिका देवी तंत्र परंपरा की एक प्रमुख देवी हैं, जो आत्म-बलिदान और पराक्रम की प्रतीक मानी जाती हैं।

    यह मंदिर विशेष रूप से तांत्रिक साधकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां नवरात्रि में विशेष पूजा की जाती है और शक्तिपूजा के दौरान यह स्थान ऊर्जा से भर जाता है।

    5. मां त्रिपुर सुंदरी मंदिर (बांका जिला)

    बांका जिले में स्थित यह मंदिर देवी त्रिपुर सुंदरी को समर्पित है, जो सौंदर्य, शक्ति और ज्ञान की प्रतीक हैं। मंदिर पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को चढ़ाई चढनी होती है, जो अपने आप में एक तीर्थ यात्रा का अनुभव देती है।

    यहां देवी के दर्शन मात्र से ही मन शांत हो जाता है। विशेषकर दुर्गा पूजा, नवरात्रि और चैती दुर्गा मेले के समय हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

    6. मां सती स्थान (सीतामढ़ी)

    सीतामढ़ी जिला, जिसे माता सीता की जन्मभूमि माना जाता है, यहां पर स्थित मां सती स्थान भी एक प्रमुख शक्तिपीठ माना जाता है। मान्यता है कि जब माता सती का शरीर जल रहा था, तो उनके अंग जहां – जहां गिरे, वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई और यह मंदिर उन्हीं शक्तिपीठों में से एक है। यहां दर्शन करने वाले भक्तों को देवी की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है। यह मंदिर धार्मिक रूप से भी महत्वपूर्ण है और पर्यटन की दृष्टि से भी आकर्षक स्थान है।

    7. मां ज्वाला देवी मंदिर (कैमूर)

    कैमूर जिले में स्थित यह मंदिर देवी ज्वाला को समर्पित है। यहाँ देवी की प्रतिमा के समीप एक प्राकृतिक ज्योति जलती रहती है, जिसे चमत्कारी माना जाता है।

    इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहाँ बलि नहीं दी जाती, बल्कि केवल फूल और नारियल चढ़ाए जाते हैं। नवरात्रि के समय यहां भारी संख्या में भक्त पहुंचते हैं और देवी की आराधना करते हैं। यहां का वातावरण अत्यंत आध्यात्मिक होता है।

    8. मां वैष्णवी मंदिर (गया)

    गया, जो पितृपक्ष श्राद्ध के लिए प्रसिद्ध है, वहां देवी वैष्णवी का भी एक प्राचीन मंदिर स्थित है। यह मंदिर गया पर्वत की तलहटी में है और तीर्थयात्रियों के लिए विशेष महत्व रखता है।

    यहां पर देवी को विष्णु स्वरूप की बहन माना जाता है । वैष्णवी देवी की पूजा विशेष रूप से विवाह, संतान और स्वास्थ्य संबंधी कामनाओं के लिए की जाती है।

    बिहार में नवरात्रि की भव्यता और लोक आस्था

    बिहार में नवरात्रि के समय देवी मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है। हर गली, हर मोहल्ले में देवी दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। पटना, गया, दरभंगा, भागलपुर, और मुजफ्फरपुर जैसे बड़े शहरों में भव्य दुर्गा पंडाल बनाए जाते हैं। भक्तगण उपवास, कीर्तन, हवन और जागरण कर मां की भक्ति में लीन रहते हैं। बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में भी देवी की पूजा अत्यंत श्रद्धा से की जाती है। लोकगीत, सोहर, देवी जागरण और भजन की गूंज चारों ओर सुनाई देती है। महिलाएं देवी का ‘सोहारी’ गीत गाकर अपने घर-परिवार की मंगलकामना करती हैं।

    देवी मंदिरों का सांस्कृतिक और सामाजिक प्रभाव

    बिहार के देवी मंदिर न केवल धार्मिक स्थल हैं बल्कि ये सामाजिक समरसता, नारी शक्ति और लोक परंपरा के प्रतीक भी हैं। इन मंदिरों में सभी जाति, धर्म और वर्ग के लोग एक साथ पूजा करते हैं, जिससे सामाजिक समरसता और एकता का संदेश मिलता है। बच्चियों का कन्या पूजन, महिलाएं द्वारा सामूहिक देवी पाठ और युवाओं द्वारा सेवा और सुरक्षा की भावना – यह सब मंदिरों के माध्यम से समाज में सकारात्मक ऊर्जा और एकता का संचार करते हैं।

    बिहार देवी भक्ति की उस धारा को दर्शाता है जहां श्रद्धा, आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम होता है। यहां के देवी मंदिर न केवल धार्मिक आस्था के केंद्र हैं, बल्कि ये आत्मिक शांति, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव के प्रतीक हैं। यदि आप कभी बिहार की यात्रा करें, तो इन देवी मंदिरों का दर्शन अवश्य करें। कहा जाता है कि “जो भक्त सच्चे मन से माता के इन मंदिरों में झोली फैलाकर जाता है, उसकी झोली कभी खाली नहीं लौटती।”

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