Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • Danteshwari Temple: जानिए क्यों प्रसिद्ध है दंतेवाड़ा का 400 साल पुराना दंतेश्वरी मंदिर और रहस्यमयी इच्छा-पूर्ति स्तंभ
    • दुनिया का सबसे बड़ा चिड़ियाघर कहां है? जानिए 1800 एकड़ में फैले इस विशाल जू की खासियत
    • रेलवे को बड़ी सौगात: कसारा-मनमाड, दिल्ली-अंबाला और बल्लारी-होसपेटे लाइन का विस्तार
    • वैलेंटाइन डे पर लास्ट मिनट पर करें ये प्लान, लखनऊ की इन जगहों पर बन जायेगा आपका दिन ख़ास
    • मैजेंटा लाइन विस्तार: 89 किमी की सबसे लंबी दिल्ली मेट्रो लाइन, 17 नए इंटरचेंज से बढ़ेगी कनेक्टिविटी
    • India Gate के पास छिपा है दिल्ली का इतिहास, ये 3 जगहें बना देंगी ट्रिप यादगार
    • Chhari Dhandh Wetland: कच्छ का छारी-ढंढ वेटलैंड बना रामसर साइट, 283 से ज्यादा पक्षियों का है बसेरा
    • सिंगापुर जाने वालों के लिए बड़ा अपडेट, 30 जनवरी से लागू हुआ नया नियम
    • About Us
    • Get In Touch
    Facebook X (Twitter) LinkedIn VKontakte
    Janta YojanaJanta Yojana
    Banner
    • HOME
    • ताज़ा खबरें
    • दुनिया
    • ग्राउंड रिपोर्ट
    • अंतराष्ट्रीय
    • मनोरंजन
    • बॉलीवुड
    • क्रिकेट
    • पेरिस ओलंपिक 2024
    Home » La Martiniere Girls College History: बेगम के नाम पर तैयार की गई इमारत, आज दुनिया में बेहतरीन गर्ल्स कॉलेज के नाम पर है मशहूर
    Tourism

    La Martiniere Girls College History: बेगम के नाम पर तैयार की गई इमारत, आज दुनिया में बेहतरीन गर्ल्स कॉलेज के नाम पर है मशहूर

    By January 24, 2025No Comments5 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    Lucknow La Martiniere Girls College Ka Itihas Khursheed Manzil History

    La Martiniere Girls College History: लखनऊ का गौरवशाली अतीत पौराणिक कथाओं और ऐतिहासिक स्थलों से समृद्ध है। जो एक लंबे समय से विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले आगंतुकों एवं पर्यटकों को आकर्षित करने का सबब बनते हैं। शहर के स्थापत्य परिदृश्य में शानदार इमारतें हैं जो नवाबों के ठाठ बाठ का साक्ष्य प्रस्तुत करती हैं। इस कड़ी में नादिर शाह द्वारा दिल्ली की लूटपाट, सिखों, मराठों और रोहिल्लाओं के आक्रमण और 1803 में ब्रिटिश सैनिकों द्वारा दिल्ली पर कब्जे के कारण मुगल सत्ता का पतन हुआ, जिसके कारण प्रांतीय गवर्नरों का उदय हुआ। इस बात से कतई इंकार नहीं किया जा सकता कि अवध के शासकों, विशेष रूप से नवाबों ने वास्तुकला के प्रयासों के लिए काफी संसाधन और ऊर्जा समर्पित की है। इन नवाबों ने अपने शाही खजाने से राजधानी लखनऊ को राजसी संरचनाओं से अलंकृत किया, जो समय की कसौटी पर खरी उतरीं और जिनमें से आज भी कई इमारतें मौजूद हैं। एक सदी के अंतराल में, शहर वास्तुकला की भव्यता के खजाने में तब्दील हो गया, जिसमें कई महल, स्मारक प्रवेश द्वार, मस्जिदें, इमामबाड़े, कर्बला और अन्य प्रभावशाली स्मारक सम्मिलित हैं। जिसके पीछे नवाब आसफ-उद-दौला (1775-1797) और नवाब सआदत अली खान (1798-1814) का नाम विपुल निर्माता के तौर पर आता है, जिन्होंने धार्मिक वास्तुकला के संरक्षण में अपने पूर्ववर्तियों को पीछे छोड़ दिया, जिसके परिणामस्वरूप शहर के भीतर सौ से अधिक स्मारकों का निर्माण हुआ, जिनमें से अधिकांश अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में हैं। आसफ-उद-दौला के शासनकाल ने लखनऊ और अवध की कलात्मक भव्यता के शिखर को चिह्नित किया।अवध के नवाबों ने लखनऊ शहर को उत्कृष्ट वास्तुकला से समृद्ध कर दिया। शहर का शायद ही कोई ऐसा स्थान शेष बचा हो जो नवाबी वास्तुकला और कलात्मकता के प्रतीक चिन्हों से वंचित हो। उनके द्वारा विशिष्ट रूप से निर्मित अनेक स्मारकों और इमारतों में,खुर्शीद मंजिल का भी नाम शामिल है। जो आज लामार्टिनियर गर्ल्स कॉलेज के नाम से जानी जाती है। आइए जानते हैं लखनऊ में मौजूद खुर्शीद मंजिल से जुड़े इतिहास के बारे में –

    मुगल और यूरोपीय फैशन का अनोखा मिश्रण शैली

    अवध के नवाबों ने लखनऊ शहर को उत्कृष्ट वास्तुकला से समृद्ध कर दिया। शहर के चप्पे चप्पे में नवाबी वास्तुकला और कलात्मकता के उदाहरण नज़र आते हैं। उनके द्वारा विशिष्ट रूप से निर्मित अनेक स्मारकों और इमारतों में,खुर्शीद मंजिल को चूना , लखौरी और बेल से बनाया गया है। इस शहर में अनगिनत प्राचीन इमारतें इसी सामग्री से बनाई गई थीं, ताकि सभी एक समान बनावट के साथ नजर आएं। यहां कुछ इमारतों को मुगल शैली में इंडो-सरसेनिक शैली में डिजाइन किया गया है, वहीं कुछ यूरोपीय शैली में ढली हुई हैं। उस समय यह दोनों ही शैलियां बेहद लोकप्रिय मानी जाती थीं।

    खुर्शीद मंजिल की आंतरिक संरचना

    खुर्शीद मंजिल एक दो मंजिला इमारत है जिसमें एक बड़ा केंद्रीय गुंबद और आठ बहुत ही विशिष्ट अष्टकोणीय टावर हैं, जो इमारत की ऊंचाई के बारबर बने हैं। खुर्शीद मंजिल का डिजाइन और निर्माण 1911 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए काम कर रहे कैप्टन डंकन मैक लेओड द्वारा किया गया था। उनकी सेवाओं को नवाब ने अपने भवनों की मरम्मत और निर्माण की देखरेख के लिए नियोजित किया था। इस इमारत की डिजाइन तैयार करने में हेक्सागोनल टावर्स, बैटलमेंट, खंदक और ड्रॉब्रिज जैसी कुछ विशेषताएं फ्रांसीसी उद्यमी, मेजर जनरल क्लाउड मार्टिन की इमारतों से ली गई थीं।

    अवध प्रांत के छठे शासक ने अपनी पत्नी खुर्शीद के लिए डाली थी इस इमारत की बुनियाद

    लखनऊ में मौजूद खुर्शीद मंजिल के निर्माण के पीछे एक बड़ी रोचक कहानी छिपी हुई है। इस इमारत का निर्माण नवाब सआदत अली खान, जो अवध प्रांत के छठे शासक थे, अपनी खूबसूरत बेगम खुर्शीद ज़ादी के लिए करवाया गया था। जिसे नवाब एक सुंदर महल बनाना चाहते थे। लेकिन नवाब का यह ख्वाब अधूरा ही रह गया। नवाब की बेगम खुर्शीद और नवाब सआदत अली खान दोनों की मृत्यु खुर्शीद मंजिल के पूरा होने से पहले ही हो गई थी। यह सआदत अली खान के जीवनकाल में पूरा नहीं हो सका और 1818 में उनके बेटे गाजी-उद-दीन हैदर ने इसे पूरा किया।अवध के नवाब की पत्नी खुर्शीद ज़ादी के नाम पर दो इमारतें हैं। एक महल है और दूसरा समाधि है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि दोनों को अलग-अलग शैलियों में बनाया गया है। जबकि नवाब सआदत अली खान के बेटे द्वारा उनकी मृत्यु के बाद बने उनके मकबरे का निर्माण मुगल शैली में किया गया है। वहीं जो खुर्शीद मंजिल उनके पिता द्वारा उनके जीवनकाल में बनाया गया था, उसे यूरोपीय शैली की तर्ज पर बनाया गया। महल का नाम बेगम के नाम पर खुर्शीद मंजिल रखा गया है।

    इस तरह खुर्शीद मंजिल बना ला मार्टिनियर गर्ल्स कॉलेज

    खुर्शीद मंजिल से ला मार्टिनियर गर्ल्स कॉलेज तक के सफर की बात करें तो अंग्रेजी हुकूमत के दौरान मेजर जनरल क्लॉड मार्टिन, जिनकी महिलाओं की शिक्षा के लिए एक विशेष संस्थान खोलने की दिली तमन्ना थी। मेजर जनरल क्लाउड मार्टिन एक फ्रांसीसी सैनिक थे, जिनका जन्म और पालन-पोषण 1735 में ल्योन, फ्रांस में हुआ था। क्लाउड मार्टिन फ्रांस के एक बुर्जुआ परिवार से थे, जहां उनके पिता एक ताबूत निर्माता थे। उसी दौरान 1871 में जब ब्रिटिश सरकार ने खुर्शीद मंजिल को ला मार्टिनियर के मैनेजमेंट के सामने पेश किया तो बेहद प्रफुल्लित हुए। इस प्रकार, जिस महल की बुनियाद बेगम के लिए डाली गई थी उसे एक विशेष यूरोपीय पब्लिक स्कूल में परिवर्तित कर दिया गया। यह खुर्शीद मंज़िल यूरोपीय पब्लिक स्‍कूल के रूप में जाना गया। ला मार्टिनियर की दिली ख्वाहिश होने के कारण उनके मरणोपरांत, इस मंज़िल को लड़कियों के कॉलेज में परिवर्तित कर दिया गया। जो ला मार्टिनियर के तीन प्रमुख संस्‍थानों (कलकत्‍ता, फ्रांस तथा लखनऊ) में से एक है। यह शिक्षण संस्थान आज भी छात्राओं को सभी प्रकार की उच्च स्तरीय आधुनिक शिक्षा प्रदान करने के लिए लोकप्रिय है।

    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
    Previous Articleअमेरिकी संसद में हिंसा करने वालों को माफी क्यों? जानें कितना गंभीर अपराध था
    Next Article डोनाल्ड ट्रंप को शपथ लिए एक हफ्ता भी नहीं हुआ, तीसरी बार राष्ट्रपति बनने की तैयारी में चल दिया बड़ा दांव

    Related Posts

    Danteshwari Temple: जानिए क्यों प्रसिद्ध है दंतेवाड़ा का 400 साल पुराना दंतेश्वरी मंदिर और रहस्यमयी इच्छा-पूर्ति स्तंभ

    February 18, 2026

    दुनिया का सबसे बड़ा चिड़ियाघर कहां है? जानिए 1800 एकड़ में फैले इस विशाल जू की खासियत

    February 14, 2026

    रेलवे को बड़ी सौगात: कसारा-मनमाड, दिल्ली-अंबाला और बल्लारी-होसपेटे लाइन का विस्तार

    February 14, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    ग्रामीण भारत

    गांवों तक आधारभूत संरचनाओं को मज़बूत करने की जरूरत

    December 26, 2024

    बिहार में “हर घर शौचालय’ का लक्ष्य अभी नहीं हुआ है पूरा

    November 19, 2024

    क्यों किसानों के लिए पशुपालन बोझ बनता जा रहा है?

    August 2, 2024

    स्वच्छ भारत के नक़्शे में क्यों नज़र नहीं आती स्लम बस्तियां?

    July 20, 2024

    शहर भी तरस रहा है पानी के लिए

    June 25, 2024
    • Facebook
    • Twitter
    • Instagram
    • Pinterest
    ग्राउंड रिपोर्ट

    मूंग की फसल पर लगा रसायनिक होने का दाग एमपी के किसानों के लिए बनेगा मुसीबत?

    June 22, 2025

    केरल की जमींदार बेटी से छिंदवाड़ा की मदर टेरेसा तक: दयाबाई की कहानी

    June 12, 2025

    जाल में उलझा जीवन: बदहाली, बेरोज़गारी और पहचान के संकट से जूझता फाका

    June 2, 2025

    धूल में दबी जिंदगियां: पन्ना की सिलिकोसिस त्रासदी और जूझते मज़दूर

    May 31, 2025

    मध्य प्रदेश में वनग्रामों को कब मिलेगी कागज़ों की कै़द से आज़ादी?

    May 25, 2025
    About
    About

    Janta Yojana is a Leading News Website Reporting All The Central Government & State Government New & Old Schemes.

    We're social, connect with us:

    Facebook X (Twitter) Pinterest LinkedIn VKontakte
    अंतराष्ट्रीय

    पाकिस्तान में भीख मांगना बना व्यवसाय, भिखारियों के पास हवेली, स्वीमिंग पुल और SUV, जानें कैसे चलता है ये कारोबार

    May 20, 2025

    गाजा में इजरायल का सबसे बड़ा ऑपरेशन, 1 दिन में 151 की मौत, अस्पतालों में फंसे कई

    May 19, 2025

    गाजा पट्टी में तत्काल और स्थायी युद्धविराम का किया आग्रह, फिलिस्तीन और मिस्र की इजरायल से अपील

    May 18, 2025
    एजुकेशन

    गाजियाबाद घटना के बाद महिला आयोग सख्त, ऑनलाइन होमवर्क पर लगाई रोक  

    February 7, 2026

    एग्जाम सेंटर पर रही अनुपस्थित, फिर भी बनी राज्य टॉपर, अब मिली 5 साल जेल की सजा

    February 2, 2026

    लाखों उम्मीदवारों का इंतजार खत्म, IIM कोझिकोड ने घोषित किए CAT 2025 के नतीजे

    December 24, 2025
    Copyright © 2017. Janta Yojana
    • Home
    • Privacy Policy
    • About Us
    • Disclaimer
    • Feedback & Complaint
    • Terms & Conditions

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.