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    Home » MP Mysterious Shiv Mandir: भोलेनाथ के ये तीन चमत्कारी मंदिर इनमें छिपे रहस्य को विज्ञान नहीं सुलझा पाया
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    MP Mysterious Shiv Mandir: भोलेनाथ के ये तीन चमत्कारी मंदिर इनमें छिपे रहस्य को विज्ञान नहीं सुलझा पाया

    Janta YojanaBy Janta YojanaJuly 26, 2025No Comments7 Mins Read
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    Madhya Pardesh Mysterious Shiv Mandir

    Madhya Pardesh Mysterious Shiv Mandir

    Madhya Pardesh Mysterious Shiv Mandir: भारत में शिव भक्ति जितनी व्यापक है, उतनी ही विविधता उनके मंदिरों में देखने को मिलती है। कहीं वे तांडव रूप में पूजे जाते हैं, तो कहीं करुणामूर्ति बनकर भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। मध्यप्रदेश को शिव आराधना की धरती कहा जाए, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। यहां ऐसे मंदिर स्थित हैं जो न केवल धार्मिक आस्था के केंद्र हैं, बल्कि ऐतिहासिक, वास्तुकला और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी विशिष्ट हैं। विशेषकर सावन मास में इन मंदिरों की महत्ता कई गुना बढ़ जाती है। आइए जानते हैं मध्यप्रदेश के तीन प्रमुख और फेमस शिव मंदिरों महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर और मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर की महिमा, उनसे जुड़ी कथाएं और मान्यताओं के बारे में-

     पशुपतिनाथ मंदिर मंदसौर- आठ मुखों वाले शिव का दुर्लभ स्वरूप जिसे

    देखकर आप चकित रह जाएंगे

    मंदसौर का पशुपतिनाथ मंदिर भारत में स्थित एकमात्र ऐसा मंदिर है। जहां भगवान शिव का आठ मुखों वाला विशाल शिवलिंग स्थापित है। यह मंदिर नेपाल के काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ मंदिर से प्रेरित माना जाता है।

    अनोखा शिवलिंग

    इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग में आठ मुख हैं, जो शिव के विभिन्न भावों जैसे शांत, करुणामयी, रौद्र, तांडवमूर्ति, भैरव आदि को दर्शाते हैं। यह शिवलिंग लगभग 7.5 फीट लंबा और 17 फीट चौड़ा है तथा इसका निर्माण 5वीं शताब्दी में हुआ था।

    पौराणिक मान्यता

    कहा जाता है कि जब भगवान शिव ने पशुपतिनाथ स्वरूप में समस्त पशु-पक्षियों की रक्षा हेतु धरती पर अवतरण लिया, तब उन्होंने यह आठ मुखों वाला रूप धारण किया। यह मंदिर इसी रूप की स्मृति में बनाया गया।

    सावन में विशाल दर्शन मेला

    सावन में यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। भक्त शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित कर अपने पापों से मुक्ति की कामना करते हैं। मंदिर परिसर में भजन मंडलियां, कथा-वाचन और भक्ति संगीत की प्रस्तुतियां होती हैं।

     महाकालेश्वर- जहां शिव खुद काल के अधिपति बनकर उज्जैन की रक्षा करते हैं

    महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, उज्जैन-शिव के रौद्र और रक्षक रूप का अनोखा संगम

    उज्जैन नगरी अपने आप में ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। लेकिन इसका हृदय है महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग। यह बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग भी, जो तंत्र साधना के दृष्टिकोण से विशेष महत्त्व रखता है।

    मंदिर का स्वरूप और विशेषता

    इस मंदिर में भगवान शिव की मूर्ति रौद्र लेकिन भव्य रूप में स्थित है। शिवलिंग पर त्रिनेत्र, भव्य मुकुट और उभरे हुए नयन-नक्श इसे और भी अलौकिक बनाते हैं। कहा जाता है कि यह शिवलिंग स्वयं प्रकट हुआ था, जिसे ‘स्वयंभू’ कहा जाता है।

     पौराणिक कथा

    कहा जाता है कि उज्जैन में राक्षस दूषण ने तांडव मचा रखा था। तब शिव ने महाकाल रूप धारण कर उसका वध किया और उज्जैन की रक्षा की। इसी कारण यहां शिव को ‘महाकाल’ के नाम से पूजा जाता है। जो समय (काल) और मृत्यु (मृत्यु के देवता यमराज) पर भी नियंत्रण रखते हैं।

    भस्म आरती – एक दिव्य अनुभव

    महाकालेश्वर मंदिर की विशेषता है भस्म आरती, जिसमें भगवान शिव को चिता की भस्म से श्रृंगारित किया जाता है। प्रातः 3:30 बजे होने वाली यह आरती इतनी अदभुत होती है कि लोग देश-विदेश से सिर्फ इसे देखने आते हैं।

     सावन में विशेष आयोजन

    सावन के प्रत्येक सोमवार को यहां विशाल शोभायात्रा निकाली जाती है। जिसमें शिव की सवारी ‘नंदी’ पर विराजमान महाकाल नगर भ्रमण करते हैं। उज्जैन इन दिनों भगवामय हो जाता है।

     ओंकारेश्वर-नर्मदा की गोद में बसा शिव का शांत स्वरूप, जहां ॐ की ध्वनि गूंजती है

    खंडवा जिले में स्थित ओंकारेश्वर मंदिर नर्मदा नदी के बीच ‘ॐ’ के आकार के द्वीप पर स्थित है। यह स्थान न केवल धार्मिक बल्कि भौगोलिक दृष्टि से भी अद्वितीय है। ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ये दो मंदिर मिलकर एक ज्योतिर्लिंग की पूर्ति करते हैं, जो शिव और शक्ति के अद्वैत रूप को दर्शाते हैं।

     मंदिर की भव्यता और प्राकृतिक सौंदर्य

    नर्मदा के कलकल बहते जल के बीच पहाड़ियों पर बना यह मंदिर शिवभक्तों के लिए शांति और भक्ति का द्वार खोलता है। यहां स्थित शिवलिंग अत्यंत आकर्षक है। गहरे काले पत्थर से निर्मित, जो सजीव प्रतीत होता है। शिव के नेत्र यहां शांत, गहरे और करुणामयी दिखते हैं।

    पौराणिक कथा

    कहा जाता है कि एक बार वेदों को लेकर विवाद हुआ कि इनमें कौन श्रेष्ठ है। तब भगवान शिव ने ओंकार ध्वनि से इस विवाद को शांत किया और यहां प्रकट होकर ज्योतिर्लिंग रूप में स्थिर हो गए। इसलिए इस स्थान का नाम पड़ा ओंकारेश्वर।

    बोटिंग और रोमांच का भी लुत्फ

    मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको नाव की सवारी करनी होती है, जो इस यात्रा को और रोमांचक बना देती है। ‘झूला पुल’ से मंदिर की ओर बढ़ते समय नर्मदा के दर्शन मन को असीम आनंद से भर देते हैं।

     सावन में जहां बहती है शिवभक्ति की धारा

    यहां सावन में हर रोज रुद्राभिषेक, पार्थिव शिवलिंग पूजन, और विशेष नर्मदा स्नान होता है। श्रद्धालु यहां ‘नर्मदा परिक्रमा’ की भी शुरुआत करते हैं।

     सावन में इन मंदिरों का आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व और भी बढ़ जाता है

    सावन का महीना शिवभक्तों के लिए वरदान समान होता है। इस पवित्र महीने में इन तीनों मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं, जिनमें रुद्राभिषेक, पार्थिव शिवलिंग पूजा, शिव बारात और शिव महिमा का गुणगान किया जाता है। उज्जैन, खंडवा और मंदसौर ये तीनों जगहों पर शिवभक्तों की भीड़ देखते ही बनती है। शिवलिंग पर जल, दूध, भस्म और बेलपत्र अर्पित कर श्रद्धालु अपने दुखों से मुक्ति और सुख-शांति की प्रार्थना करते हैं। सावन में इन मंदिरों की ऊर्जा इतनी तीव्र होती है कि यहां आकर आत्मा तक शुद्ध हो जाती है।

    इन मंदिरों से जुड़े रोचक तथ्य और मान्यताएं जो शिवभक्ति को और गहराई देते हैं। वहीं महाकालेश्वर मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यह दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है, जो मृत्यु पर विजय का प्रतीक माना जाता है। ओंकारेश्वर मंदिर ॐ के आकार के द्वीप पर बसा है, जो ब्रह्मांडीय ध्वनि का प्रतीक है और इसे आत्मज्ञान का प्रवेश द्वार माना जाता है। मंदसौर का पशुपतिनाथ मंदिर एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां शिव आठ मुखों में विद्यमान हैं, जो उनके समस्त स्वरूपों की झलक एक साथ देता है। इन मंदिरों के साथ अनेक लोककथाएं, संतों की यात्राएं और भक्तों की चमत्कारी घटनाएं जुड़ी हुई हैं, जो इन्हें केवल मंदिर नहीं, बल्कि आध्यात्मिक धरोहर बना देती हैं।

    कैसे पहुंचे इन शिवधामों तक, यात्रा की संपूर्ण जानकारी

    महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन रेलवे स्टेशन से 2 किलोमीटर की दूरी पर है और इंदौर एयरपोर्ट से महज 55 किलोमीटर दूर। ओंकारेश्वर के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन ‘ओंकारेश्वर रोड’ है, जहां से मंदिर तक टैक्सी या बस द्वारा पहुंचा जा सकता है। मंदसौर का पशुपतिनाथ मंदिर मंदसौर रेलवे स्टेशन से 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और यहां तक रतलाम, नीमच और उज्जैन से बस और टैक्सी सुविधा उपलब्ध है। इन मंदिरों की यात्रा सावधानीपूर्वक योजना बनाकर करें, क्योंकि सावन में भारी भीड़ हो सकती है। भस्म आरती के लिए महाकाल में ऑनलाइन बुकिंग अनिवार्य है।

    मध्यप्रदेश – शिवभक्ति का जीवंत केंद्र

    अगर आपको शिवभक्ति से प्रेम है, तो मध्यप्रदेश की इन तीनों धार्मिक स्थलों की यात्रा आपके जीवन का एक पवित्र अनुभव बन सकती है। महाकालेश्वर में काल पर विजय का अहसास, ओंकारेश्वर में ध्यान, साधना की अनुभूति और मंदसौर में शिव के बहुरूपों का दर्शन ये सब मिलकर आपको आत्मा के स्तर पर छूते हैं। इन मंदिरों में केवल पूजा नहीं होती, बल्कि आत्मा और शिव के मिलन की अनुभूति होती है। सावन का महीना इन अनुभवों को कई गुना बढ़ा देता है। सावन के मौके पर आप अगर शिवधाम की यात्रा की योजना बनाएं, तो मध्यप्रदेश को अपनी सूची में सबसे ऊपर रखें।

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