Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • Nawabon Ki Nagri : लखनऊ नहीं बल्कि इस शहर को भी कहते हैं नवाबों की नगरी
    • Lucknow Gomti River Cruise: लखनऊ में चलेगा गोमती रिवर क्रूज़, ओपन एयर रेस्टोरेंट और पार्टी की मिलेगी सुविधाएं
    • लखनऊ के राष्ट्र प्रेरणा स्थल में अब देना होगा इतना प्रवेश शुल्क, यूपी दिवस पर बहुत कुछ है ख़ास
    • Kaushambi History: ये है राजा परीक्षित का किला, जो महाभारत काल से जुड़ा हुआ है
    • Bateshwar Bah Agra: आगरा का रहस्यमयी बटेश्वर: शिव मंदिर, डाकुओं की आस्था और यमुना का अनोखा प्रवाह
    • Best Eye Surgeons:ये हैं लखनऊ के बेस्ट आई सर्जन की लिस्ट, जानिए कौन हैं सबसे अनुभवी आँखों के डॉक्टर
    • Lucknow Orthopedic Doctors: ये हैं लखनऊ के बेस्ट ऑर्थोपेडिक डॉक्टर्स की लिस्ट
    • भारत के ये टूरिस्ट स्पॉट्स जहां विदेशियों की एंट्री है बैन, वजह जानकर चौंक जाएंगे
    • About Us
    • Get In Touch
    Facebook X (Twitter) LinkedIn VKontakte
    Janta YojanaJanta Yojana
    Banner
    • HOME
    • ताज़ा खबरें
    • दुनिया
    • ग्राउंड रिपोर्ट
    • अंतराष्ट्रीय
    • मनोरंजन
    • बॉलीवुड
    • क्रिकेट
    • पेरिस ओलंपिक 2024
    Home » Pithoragarh Mein Ghoomne ki Jagah: पिथौरागढ़ — हिमालय की गोद में बसा ‘लघु कश्मीर’
    Tourism

    Pithoragarh Mein Ghoomne ki Jagah: पिथौरागढ़ — हिमालय की गोद में बसा ‘लघु कश्मीर’

    Janta YojanaBy Janta YojanaDecember 5, 2025No Comments5 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    Pithoragarh Mein Ghoomne ki Jagah (Image Credit-Social Media)

    Pithoragarh Mein Ghoomne ki Jagah

    Pithoragarh Mein Ghoomne ki Jagah: कुमाऊँ क्षेत्र के पूर्वी छोर पर स्थित पिथौरागढ़ उत्तराखंड का वह जिला है जिसे इसकी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता, ऊँचे हिमालयी पर्वतों, प्राचीन मंदिरों, सांस्कृतिक धरोहर और सामरिक महत्त्व के कारण ‘लघु कश्मीर’ भी कहा जाता है। यह जिला भारत-नेपाल और भारत-तिब्बत (चीन) की सीमाओं के निकट होने के कारण न सिर्फ पर्यटन के लिए प्रमुख है बल्कि सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    यहाँ का भूभाग पर्वतीय है—जिसमें गहरी घाटियाँ, हरे-भरे जंगल, हिमालय की ऊँची चोटियाँ, बर्फ से ढकी पर्वत-श्रृंखलाएँ, झरने और अलौकिक सौंदर्य से भरी प्राकृतिक बस्तियाँ हैं। जनपद का मुख्यालय पिथौरागढ़ नगर समुद्र तल से लगभग 1,650 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है, जो पर्यटकों के लिए एक शांत, स्वच्छ और प्राकृतिक स्थल प्रदान करता है।

    यहाँ की संस्कृति कुमाऊँनी परंपराओं पर आधारित है—फूलदेई, हरेल, छठिया, ज्येष्ठा-अष्टमी और जागर जैसे पर्व जीवन में रचे-बसे हैं। लोक संगीत, हुड़का नृत्य और चांचरी यहाँ की पहचान है।

    इतिहास और सांस्कृतिक महत्व

    पिथौरागढ़ का इतिहास कत्यूरियों और चंद राजवंशों से गहराई से जुड़ा है। यह क्षेत्र प्राचीन काल से व्यापार का प्रमुख मार्ग रहा है, जो तिब्बत और नेपाल से भारत को जोड़ता था। पुरातात्त्विक अवशेषों, मंदिरों और किलों में इसकी ऐतिहासिक झलक मिलती है।

    राजा पिथोरा चंद के नाम पर इस जिले का नाम पड़ा। चंद राजाओं ने इस क्षेत्र को सांस्कृतिक और प्रशासनिक रूप से समृद्ध बनाया। आज भी उनके बनवाए मंदिर और गढ़ पर्यटक आकर्षण हैं।

    मुख्य नदियाँ और प्राकृतिक धरोहर

    ● काली नदी – भारत-नेपाल की सीमा बनाती है, एंग्लिंग और रिवर-राफ्टिंग के लिए प्रसिद्ध।

    ● गोरीगंगा – मिलम ग्लेशियर से निकलकर बर्फीले पानी के साथ घाटियों में बहती है।

    ● सरयू नदी – बागेश्वर से निकलकर जिले के कुछ हिस्सों में बहती हुई सांस्कृतिक पहचान बनाती है।

    इसके अलावा यहाँ कई हिमालयी झीलें, ग्लेशियर, चौड़े बुग्याल (घास के मैदान) और विशिष्ट जैव-विविधता पाई जाती है।

    पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण

    नीचे पिथौरागढ़ जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों का विस्तृत वर्णन दिया जा रहा है:

    पिथौरागढ़ किला 

    चंद राजाओं द्वारा निर्मित यह ऐतिहासिक किला पिथौरागढ़ शहर के ठीक ऊपर स्थित है। यहाँ से पूरी घाटी, हिमालय की चोटियाँ और शहर का अद्भुत दृश्य देखा जा सकता है। फोटोग्राफी के लिए यह बेहद लोकप्रिय बिंदु है।

    मुनस्यारी — मिलम ग्लेशियर का प्रवेश द्वार

    यह जिला का सबसे प्रमुख पर्यटन केंद्र है। समुद्र तल से 2,200 मीटर की ऊँचाई पर स्थित मुनस्यारी पंचाचूली पर्वत श्रृंखला के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

    खासियत:

    • ट्रेकिंग के लिए स्वर्ग

    • मिलम, रालम और नमिक ग्लेशियर का बेस प्वाइंट

    • विदेशी पर्वतारोहियों का प्रमुख केंद्र

    • बर्फबारी का अद्भुत अनुभव

    • साहसिक खेलों के लिए उपयुक्त

    धारचूला:

    काला नदी के किनारे बसा सुंदर शहर, जो नेपाल की सीमा के ठीक पास है। लिपुलेख दर्रा जाने का मार्ग यहीं से जाता है।

    कैलाश-मंसरोवर यात्रा का मुख्य पड़ाव होने के कारण इसकी प्रतिष्ठा अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    ओम पर्वत और आदि कैलाश

    यह स्थान हिंदू आस्था का केंद्र है। ओम पर्वत पर प्राकृतिक रूप से “ॐ” का चिन्ह दिखाई देता है।

    आदि कैलाश को शिव का दूसरा कैलाश माना जाता है, और यह अपनी दिव्यता और कठिन ट्रेकिंग मार्ग के लिए प्रसिद्ध है।

    चौकोड़ी

    चाय-बागानों से घिरा यह हिल स्टेशन हिमालय दर्शन के लिए अत्यंत लोकप्रिय है।

    ● सूर्योदय और सूर्यास्त के अद्भुत दृश्य

    ● हिमालय की नंदा देवी, त्रिशूल, पंचाचूली चोटियाँ स्पष्ट दिखाई देती हैं

    पाताल भुवनेश्वर

    काफी प्रसिद्ध गुफा-तीर्थस्थल, जहाँ अद्भुत प्राकृतिक शिलाएं, शिव-लिंग और पौराणिक प्रतीक मिलते हैं। कहा जाता है कि यहाँ 33 कोटि देवताओं का निवास है।

    जन्मालय मंदिर – गंगोलीहाट

    भगवान शिव और भगवती के प्रमुख मंदिर, जो अपने दिव्य वातावरण और धार्मिक गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध हैं।

    थल, डीडीहाट और बर्थी फॉल

    ये छोटे लेकिन प्राकृतिक रूप से अत्यंत सुंदर कस्बे और झरने हैं, जहां पर्यटक शांति और प्रकृति का सुकून लेने आते हैं।

    यहाँ आने का सर्वोत्तम समय

    पिथौरागढ़ जिले में पूरे वर्ष यात्रा संभव है, लेकिन सबसे उपयुक्त मौसम—

    अप्रैल से जून – सुहावना मौसम, हिमालय दर्शन, ट्रेकिंग

    सितंबर से नवंबर – साफ आसमान, पर्वतों का स्पष्ट दृश्य

    दिसंबर से मार्च – मुनस्यारी समेत ऊँचे क्षेत्रों में बर्फबारी देखने का सर्वोत्तम समय

    यहाँ पहुँचने का तरीका

    सड़क मार्ग:

    पिथौरागढ़ उत्तराखंड और उत्तर भारत के प्रमुख शहरों से अच्छी सड़क से जुड़ा है।

    • राष्ट्रीय राजमार्ग 309A और 125 से पहुँच

    • दिल्ली → हल्द्वानी → अल्मोड़ा → पिथौरागढ़ मार्ग सबसे लोकप्रिय है।

    रेल मार्ग:

    निकटतम प्रमुख रेलवे स्टेशन:

    • टनकपुर (170 किमी)

    • काठगोदाम (220 किमी)

    वायु मार्ग:

    • पिथौरागढ़ नैनी सैनी एयरपोर्ट (आंतरिक उड़ानों के लिए)

    • निकटतम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा – पंतनगर (240 किमी)

    अर्थव्यवस्था और उद्योग

    ● सेब, आलू, राजमा, दालें और चौलाई यहां के प्रमुख कृषि उत्पाद

    ● चाय-उत्पादन वाले कई बागान और स्थानीय कुमाऊँनी चाय की पहचान

    ● हस्तशिल्प—ऊन, पाषाण कला, ऊनी वस्त्र, हथकरघा

    ● सीमावर्ती व्यापार और पर्यटन पर आधारित अर्थव्यवस्था

    ● मुनस्यारी के आसपास ऊनी वस्त्र और स्थानीय हस्तकला विशेष प्रसिद्ध

    ● पिथौरागढ़ जिला भारत-नेपाल और भारत-चीन सीमा के कारण सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यहाँ आईटीबीपी, एसएसबी और भारतीय सेना की कई महत्वपूर्ण इकाइयाँ तैनात हैं।

    ● यह जिला ‘कैलाश-मांसरोवर यात्रा’ और ‘आदि कैलाश यात्रा’ के मुख्य मार्ग होने के कारण धार्मिक-पर्यटन की दृष्टि से विश्वस्तर पर ख्याति प्राप्त कर रहा है।

    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
    Previous ArticleUnnao Mein Ghoomne Ki Jagah: गंगा–घाटों की आस्था, शहीद चंद्रशेखर आज़ाद पक्षी विहार और चमड़ा–जरदोज़ी उद्योग से जुड़ा आधुनिक पर्यटन
    Next Article चमोली जिला — देवभूमि का हृदय और प्राकृतिक वैभव का खजाना
    Janta Yojana

    Janta Yojana is a Leading News Website Reporting All The Central Government & State Government New & Old Schemes.

    Related Posts

    Nawabon Ki Nagri : लखनऊ नहीं बल्कि इस शहर को भी कहते हैं नवाबों की नगरी

    January 26, 2026

    Lucknow Gomti River Cruise: लखनऊ में चलेगा गोमती रिवर क्रूज़, ओपन एयर रेस्टोरेंट और पार्टी की मिलेगी सुविधाएं

    January 25, 2026

    लखनऊ के राष्ट्र प्रेरणा स्थल में अब देना होगा इतना प्रवेश शुल्क, यूपी दिवस पर बहुत कुछ है ख़ास

    January 24, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    ग्रामीण भारत

    गांवों तक आधारभूत संरचनाओं को मज़बूत करने की जरूरत

    December 26, 2024

    बिहार में “हर घर शौचालय’ का लक्ष्य अभी नहीं हुआ है पूरा

    November 19, 2024

    क्यों किसानों के लिए पशुपालन बोझ बनता जा रहा है?

    August 2, 2024

    स्वच्छ भारत के नक़्शे में क्यों नज़र नहीं आती स्लम बस्तियां?

    July 20, 2024

    शहर भी तरस रहा है पानी के लिए

    June 25, 2024
    • Facebook
    • Twitter
    • Instagram
    • Pinterest
    ग्राउंड रिपोर्ट

    मूंग की फसल पर लगा रसायनिक होने का दाग एमपी के किसानों के लिए बनेगा मुसीबत?

    June 22, 2025

    केरल की जमींदार बेटी से छिंदवाड़ा की मदर टेरेसा तक: दयाबाई की कहानी

    June 12, 2025

    जाल में उलझा जीवन: बदहाली, बेरोज़गारी और पहचान के संकट से जूझता फाका

    June 2, 2025

    धूल में दबी जिंदगियां: पन्ना की सिलिकोसिस त्रासदी और जूझते मज़दूर

    May 31, 2025

    मध्य प्रदेश में वनग्रामों को कब मिलेगी कागज़ों की कै़द से आज़ादी?

    May 25, 2025
    About
    About

    Janta Yojana is a Leading News Website Reporting All The Central Government & State Government New & Old Schemes.

    We're social, connect with us:

    Facebook X (Twitter) Pinterest LinkedIn VKontakte
    अंतराष्ट्रीय

    पाकिस्तान में भीख मांगना बना व्यवसाय, भिखारियों के पास हवेली, स्वीमिंग पुल और SUV, जानें कैसे चलता है ये कारोबार

    May 20, 2025

    गाजा में इजरायल का सबसे बड़ा ऑपरेशन, 1 दिन में 151 की मौत, अस्पतालों में फंसे कई

    May 19, 2025

    गाजा पट्टी में तत्काल और स्थायी युद्धविराम का किया आग्रह, फिलिस्तीन और मिस्र की इजरायल से अपील

    May 18, 2025
    एजुकेशन

    लाखों उम्मीदवारों का इंतजार खत्म, IIM कोझिकोड ने घोषित किए CAT 2025 के नतीजे

    December 24, 2025

    मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने माहेश्वरी प्रसाद इंटर कॉलेज के वार्षिक समारोह में किया शिरकत, गरीब बच्चों की शिक्षा पहल की खुले दिल से प्रशंसा की

    November 1, 2025

    Doon Defence Dreamers ने मचाया धमाल, NDA-II 2025 में 710+ छात्रों की ऐतिहासिक सफलता से बनाया नया रिकॉर्ड

    October 6, 2025
    Copyright © 2017. Janta Yojana
    • Home
    • Privacy Policy
    • About Us
    • Disclaimer
    • Feedback & Complaint
    • Terms & Conditions

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.