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    Home » Tungnath Temple Yatra Guide: जहां भगवान शिव के हाथ प्रकट हुए, घूमे इस ऊंचे धाम के आसपास की 7 स्वर्गिक जगहें
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    Tungnath Temple Yatra Guide: जहां भगवान शिव के हाथ प्रकट हुए, घूमे इस ऊंचे धाम के आसपास की 7 स्वर्गिक जगहें

    Janta YojanaBy Janta YojanaAugust 11, 2025No Comments5 Mins Read
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    Tungnath Temple Yatra (Image Credit-Social Media)

    Tungnath Temple Yatra

    Tungnath Temple Yatra Guide: उत्तराखंड की शांत और दिव्य वादियों में बसा तुंगनाथ मंदिर, न सिर्फ भारत बल्कि पूरे विश्व का सबसे ऊंचा शिव मंदिर है। यह मंदिर लगभग 12,073 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। ये मंदिर पंच केदारों में एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल माना जाता है। हर साल हजारों श्रद्धालु और ट्रैवलर्स यहां दर्शन के लिए आते हैं। लेकिन अधिकांश लोग केवल मंदिर देखने आते हैं। अगर आप वास्तव में इस यात्रा को अविस्मरणीय बनाना चाहते हैं, तो तुंगनाथ मंदिर के आसपास की कुछ बेहद खूबसूरत और शांत जगहों को जरूर एक्सप्लोर करें। ये जगहें न सिर्फ आपको प्रकृति के करीब लाएंगी, बल्कि आध्यात्मिकता और रोमांच का अनोखा संगम भी कराएंगी।

    तुंगनाथ मंदिर – शिव का सबसे ऊंचा निवास

    तुंगनाथ मंदिर समुद्र तल से 3,680 मीटर (12,073 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। यह पंच केदारों में तीसरा मंदिर है और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यहां भगवान शिव के हाथ प्रकट हुए थे। मंदिर तक पहुंचने के लिए चोपता से लगभग 3.5 किलोमीटर का ट्रेक करना होता है, जो बेहद रोमांचक और सुरम्य होता है। रास्ते में हिमालय की चोटियां, बर्फ से ढके रास्ते और हरे-भरे बुग्याल यात्रियों को स्वर्गिक अनुभव कराते हैं।

    सारी गांव – ट्रेकिंग और शांति का मिलन

    दूरी तुंगनाथ से लगभग 19 किमी। सारी गांव एक छोटा, लेकिन बेहद सुंदर हिमालयी गांव है जो तुंगनाथ मंदिर के ट्रेकिंग रूट की शुरुआत मानी जाती है। यह गांव खासतौर पर देवरिया ताल ट्रेक के लिए प्रसिद्ध है। ऊंचे – ऊंचे देवदार के जंगल, पारंपरिक गढ़वाली घर और ग्रामीण जीवन का शांत वातावरण यात्रियों को सुकून देता है। यहां होमस्टे में रुककर आप स्थानीय संस्कृति का अनुभव कर सकते हैं।

    यहां आकर क्या करें

    • यहां घूमने के लिए ग्रामीण जीवन का अनुभव, ट्रेकिंग और हाइकिंग, कैम्पिंग,
    • स्थानीय व्यंजन चखना आदि गतिविधियां शामिल करें।

    देवरिया ताल – देवताओं की झील

    दूरी तुंगनाथ से लगभग 21 किमी। समुद्र तल से 2,438 मीटर की ऊंचाई पर स्थित देवरिया ताल को ‘देवताओं की झील’ कहा जाता है। यह झील अपने क्रिस्टल जैसे साफ पानी और शांत वातावरण के लिए जानी जाती है। यहां से चौखंभा पर्वत की सुंदर प्रति छाया झील में नजर आती है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय का नज़ारा किसी चित्रकला जैसा प्रतीत होता है।

    यहां की विशेषता

    बेहतरीन सनराइज़ और सनसेट, फोटोग्राफी और बर्ड वॉचिंग, माउंटेन व्यू का बेहतरीन पॉइंट आदि।

    चोपता – मिनी स्विट्जरलैंड ऑफ उत्तराखंड

    दूरी तुंगनाथ से लगभग 83 किमी। चोपता एक बेहद मनोहारी हिल स्टेशन है जिसे उत्तराखंड का मिनी स्विट्जरलैंड भी कहा जाता है। गर्मी के मौसम में यह इलाका हरे-भरे घास के मैदानों और ठंडी हवाओं से भर जाता है, वहीं सर्दियों में चोपता पूरी तरह से बर्फ की चादर ओढ़ लेता है। यहां से नंदा देवी, त्रिशूल और चौखंबा की चोटियां साफ दिखाई देती हैं। चोपता से ही तुंगनाथ और चंद्रशिला ट्रेक की शुरुआत होती है।

    यहां क्या करें

    यहां आकर हिमालय व्यू पॉइंट, तुंगनाथ-चंद्रशिला ट्रेक, बाइकिंग, कैम्पिंग और स्टार गेज़िंग का लुत्फ उठाएं।

    ऊखीमठ – आध्यात्मिकता और प्रकृति का संगम

    दूरी तुंगनाथ से लगभग 29 किमी। ऊखीमठ, रुद्रप्रयाग जिले में स्थित एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। यहां ओंकारेश्वर मंदिर में सर्दियों के दौरान भगवान केदारनाथ और मध्यमहेश्वर की डोलियों की पूजा होती है। इसके अलावा यहां से कई ट्रेकिंग रूट्स भी शुरू होते हैं और चारों ओर का दृश्य बेहद लुभावना होता है।

    यहां की विशेषता

    इस स्थान का धार्मिक महत्त्व

    ओंकारेश्वर मंदिर, बेस कैम्प फॉर मध्यमहेश्वर ट्रेक आदि।

    चंद्रशिला पीक – रोमांच का चरम अनुभव

    दूरी तुंगनाथ से तुंगनाथ मंदिर से 1.5 किमी ट्रेक।

    तुंगनाथ से आगे लगभग 1.5 किमी का ट्रेक चंद्रशिला पीक तक जाता है। यह पीक 4000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और यहां से पूरे गढ़वाल हिमालय का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। यह ट्रेक अपेक्षाकृत कठिन है लेकिन इसकी चोटी से जो दृश्य मिलता है, वह जीवन भर याद रहता है।

    यहां की विशेषता

    360 डिग्री हिमालय दर्शन, सूर्योदय का अद्भुत दृश्य,

    फोटोशूट और मेडिटेशन के लिए बेहतरीन जगह।

    कालिमठ – रहस्यमयी देवी पीठ

    दूरी तुंगनाथ से लगभग 41 किमी। कालिमठ, मां काली को समर्पित एक अत्यंत पवित्र और रहस्यमयी शक्ति पीठ है। यह स्थान धार्मिक रूप से उतना ही महत्वपूर्ण है जितना प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षक। यह मंदिर मंदाकिनी नदी के किनारे स्थित है और इसकी ऊर्जा बहुत ही सकारात्मक मानी जाती है।

    यहां आकर क्या करें

    यहां बने धार्मिक स्थल पर पूजा-अर्चना, ध्यान और शांति का अनुभव। मंदिर के इतिहास के बारे में रोचक जानकारी हासिल करना आदि।

    इन सभी स्थलों की यात्रा के लिए महत्वपूर्ण सुझाव और यात्रा टिप्स

    ट्रेकिंग गियर साथ लाएं। ट्रेकिंग शूज, वॉटरप्रूफ जैकेट, टोर्च, दस्ताने और बेसिक फर्स्ट एड जरूर रखें।

    फिटनेस पर ध्यान दें।

    तुंगनाथ और चंद्रशिला ट्रेक में अच्छा स्टैमिना जरूरी है।

    स्थानीय संस्कृति का सम्मान करें। गांवों में लोगों की संस्कृति और रीति-रिवाज़ों का पालन करें।

    सीजन का चुनाव

    मार्च से जून और सितंबर से नवंबर तक का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है।

    कैसे पहुंचे तुंगनाथ मंदिर

    निकटतम रेलवे स्टेशन- ऋषिकेश (लगभग 200 किमी)। निकटतम एयरपोर्ट- जॉलीग्रांट एयरपोर्ट, देहरादून (लगभग 225 किमी)।

    सड़क मार्ग- चोपता तक बस या टैक्सी, फिर 3.5 किमी ट्रेकिंग। तुंगनाथ सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि श्रद्धा, रोमांच और प्रकृति की सुंदरता का संगम है। यहां मंदिर में दर्शन करने के साथ सारी गांव की शांति, देवरिया ताल की निर्मलता, चोपता का रोमांच, ऊखीमठ की दिव्यता और चंद्रशिला की ऊंचाई ये सभी खूबियां मिलकर तुंगनाथ यात्रा को पूर्ण और जीवन भर यादगार बनाने में अपना योगदान देती हैं।

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