
Vijaygarh Fort Sonbhadra (Image Credit-Social Media)
Vijaygarh Fort Sonbhadra
Vijaygarh Fort Sonbhadra: आज हम आपको सोनभद्र उत्तर प्रदेश के विजयनगर किले के बारे में बताने जा रहे हैं जहां इसके सौंदर्य की चर्चा इसकी लोकप्रियता को बयां करती है। वहीं इसके अनोखे पान को लेकर भी ये काफी लोकप्रिय है। यहां का वैभव और भव्य महल देखकर आपको एहसास होगा कि यह इतिहास में कितना स्वर्णिम युग रहा होगा। यहां का कण-कण आज भी आपको यह एहसास कराएगा कि यह महल अपने आप में एक अनूठा और भव्यता लिए हुए हैं।
सोनभद्र में स्थित अनोखा किला
इस दुर्ग की वीर गाथा लोग आज भी नहीं भूल पाए हैं यही वजह है कि हर साल पर्यटक यहां भारी मात्रा में आते हैं। विजयगढ़ दुर्ग चार राज्यों मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ राज्यों के सीमावर्ती जनपद सोनभद्र में है। यह वीर गाथा ऐयारों एक अनसुनी कहानी है और तिलिस्म के खजाने से भरपूर है। दरअसल महाभारत काल से लेकर अंग्रेजों की गतिविधियों का साक्षी बनाया किला अपने अंदर कई राज समेटे हुए हैं। यह जहां आस्था का प्रतीक है वहीं रहस्य और रोमांच से भी भरपूर है पर्यटन की दृष्टि से यह स्थान सोनांचल का महत्वपूर्ण स्थल है।
इन सबके बावजूद भी यह दुर्ग उपेक्षा का दंश झेल रहा है। हजारों साल पुराने इस दुर्ग का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है कभी विजय गिरी के नाम से पहचान पहचाना जाने वाला यह दुर्ग ऋषियों की तपोभूमि रहा है। कालांतर में यह किला बना। ऐसी भी मानता है कि चंद्रगुप्त मौर्य को जब मगध पर आक्रमण करना था तो उन्होंने अपनी सेना को इसी किले पर विश्राम करने के लिए भेजा था। यहां से थोड़ी ही दूर पर मगध पड़ता है जो बिहार में है कुछ किताबों में किले की कहानी चेत सिंह से भी जुड़ी बताई गई है। यह क़िला तब और ज्यादा सुर्खियों में आया जब 90 के दशक में दूरदर्शन पर देवकीनंदन खत्री द्वारा लिखे गए उपन्यास चंद्रकांता संतति पर आधारित सीरियल बनाया गया। रानी महल, कचहरी और महल की सुरक्षा के लिए बनी करीब 6 फीट चौड़ी दीवार आज भी यहां लोगों के आकर्षण का केंद्र है।
इस किले से आस्था भी जुड़ी हुई है हर साल यहां हिंदुओं का मेला लगता है। भगवान गणेश का मंदिर लगभग 700 मीटर की दूरी पर स्थित है। यहां की दीवारें इतनी मजबूत है कि हजारों साल बाद भी यह वैसी की वैसी ही खड़ी हुई है। इस किले की खास बात यह है कि यहां का रामसरोवर तालाब जो सैकड़ो फीट ऊंचाई पर भी गर्मी के दिनों में कभी नहीं सूखता। इसकी गहराई के बारे में आज तक कोई भी पता नहीं लग पाया है। नौगढ़ वह चुनारगढ़ जाने के लिए गुप्त रास्ता और महल का मुख्य सिंह द्वार आज भी पर्यटकों को काफी आकर्षित करता है। इसके बारे में देवकीनंदन खत्री के द्वारा लिखे गए उपन्यास चंद्रकांता संतति में भी वर्णित है।
इस किले में कई चीज़ें आपको रहस्य और उत्सुकता से भर देगी। मुख्य द्वार जो कई कोण में घुमाया जा सकता है। वहीँ अगर द्वार पर दो लोगों को बंदूक देकर तैनात कर दिया जाए तो कोई रास्ता नहीं है जो दुर्ग में प्रवेश दिला सके। इस स्थिति में आप केवल हेलीकॉप्टर के द्वारा ही इस दुर्ग के अंदर प्रवेश कर सकते हैं।
वहीँ इस क़िले का दूसरा रहस्य है रामसरोवर तालाब, जो 1850 फीट की ऊंचाई पर होने के उपरांत भी भीषण गर्मी में कभी नहीं सूखता। ऐसी भी मानता है कि इस तालाब को वरुण देव द्वारा वरदान प्राप्त है साथ ही तालाब का पानी पूर्णिमा के दिन थोड़ा ही सही पर बढ़ता जरूर है। इसके अलावा यहां के पुराने भवन जिसमें चंद्रकांता रहती थी यहां का एक आकर्षक है। देखरेख के अभाव में यह खंडहर बनता जा रहा है कई हजार साल पुराने तिलिस्म से भरपूर आस्था रहस्य और रोमांच की संगम स्थल विजयगढ़ दुर्ग पर पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। लेकिन देख रेख के अभाव में यह ऐतिहासिक किला खंडहर में परिवर्तित होता जा रहा है। यहां की सीढ़ियों की मरम्मत, दुर्गा का सौन्दर्यीयकरण कराया जाना इस दुर्ग के लिए अति आवश्यक है। इतना ही नहीं यहां पर आसपास भी कई ऐसे पर्यटन स्थल है जहां भारी मात्रा में लोग आते हैं इस दुर्ग से थोड़ी ही दूरी पर स्थित है मऊ कला जो महाभारत काल ब्रिटिश शासन काल से लेकर अब तक की कहानियों का विजयगढ़ दुर्ग साक्षी रहा है।


