बुध का मीन राशि में उदय: बुध देव को ग्रहों के राजकुमार का दर्जा प्राप्त है जो मनुष्य जीवन को प्रभावित करने की अपार क्षमता रखते हैं इसलिए इन्हें नवग्रहों में महत्वपूर्ण स्थान हासिल है। वैदिक ज्योतिष में बुध ग्रह को वाणी, बुद्धि, तर्क-वितर्क, व्यापार और गणित का कारक ग्रह माना जाता है। बुद्धि एवं व्यापार के कारक ग्रह होने के नाते जब भी बुध एक निश्चित अवधि के बाद अपनी राशि में परिवर्तन या फिर चाल में बदलाव करते हैं, तो इसका असर सभी राशियों के जातकों पर नज़र आता है। मार्च का महीना बुध ग्रह के लिए विशेष है क्योंकि इस अवधि में इन्होंने बार-बार अपनी चाल और स्थिति में बदलाव किया है। अब यह एक बार दोबारा मीन राशि में उदित होने जा रहे हैं जिसका असर न सिर्फ़ राशियों को बल्कि देश-दुनिया को भी प्रभावित करेगा।
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यह हम सब भली-भांति जानते हैं कि ज्योतिष शास्त्र में सूर्य और बुध दोनों को ही विशेष स्थान प्राप्त है। सूर्य देव को जहां “नवग्रहों के जनक” का पद हासिल है, तो वहीं बुध को “ग्रहों के राजकुमार” कहा जाता है। आपको बता दें कि बुध के अस्त होने में सूर्य ग्रह महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। इसी क्रम में, एस्ट्रोसेज एआई के इस ब्लॉग के माध्यम से आप जान सकेंगे कि बुध का मीन राशि में उदय आपको कैसे परिणाम देगा? किन राशियों की चमकेगी किस्मत और किन्हें उठानी पड़ेगा परेशानी? क्या करियर और व्यापार से दूर होंगी समस्याएं? इन सभी सवालों का जवाब पाने के लिए इस ब्लॉग को अंत तक पढ़ें। सिर्फ इतना ही नहीं, अनुभवी ज्योतिषियों द्वारा बुध ग्रह को प्रसन्न करने के उपाय भी हम आपको प्रदान करेंगे। तो चलिए आगे बढ़ते हैं।
बुध का मीन राशि में उदय: कब और क्या रहेगा समय?
ज्योतिष शास्त्र में हर ग्रह अपने निर्धारित समय पर राशि परिवर्तन करता है जो ग्रह की चाल पर निर्भर करता है। हालांकि, बुध देव को तेज़ गति से चलने वाला ग्रह माना जाता है इसलिए यह तक़रीबन 23 दिन तक एक राशि में रहते हैं और समय-समय अपनी चाल एवं स्थिति में बदलाव करते रहते हैं। इसी क्रम में, अब बुध महाराज 31 मार्च 2025 की शाम 05 बजकर 57 मिनट पर मीन राशि में अपनी अस्त अवस्था से बाहर आकर उदित हो जाएंगे। बता दें कि बुध देव 17 मार्च 2025 को मीन राशि में अस्त हो गए थे। हालांकि, मीन राशि में एक साथ बुध, सूर्य, शुक्र, शनि और राहु के मौजूद होने से पंचग्रही योग बनेगा जो कि बुध के उदित होने से थोड़े बेहतर परिणाम देने में सफल हो सकता है। लेकिन, बुध की उदित अवस्था का असर संसार के साथ-साथ सभी राशियों पर भी दिखाई देगा। इस बारे में हम विस्तार से बात करेंगे, परंतु सबसे पहले जानते हैं बुध ग्रह के महत्व के बारे में।
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ज्योतिष की दृष्टि से बुध ग्रह
वैदिक ज्योतिष में बुध ग्रह को महत्वपूर्ण माना जाता है जिन्हें एक शुभ ग्रह का दर्जा प्राप्त है। नौ ग्रहों में चार ग्रहों को विशेष पद प्राप्त हैं जैसे सूर्य को राजा, चद्रंमा को रानी, मंगल को सेनापति और बुध देव को “ग्रह के युवराज” कहा जाता है। सौरमंडल में बुध ग्रह सूर्य के सबसे निकट स्थित है। ज्योतिष में बुध महाराज को बुद्धि, तर्कशास्त्र, वाणी, गणित, संवाद, अकाउंट और व्यापार के कारक ग्रह कहा गया है। इन्हें द्विस्वभाव का ग्रह माना जाता है अर्थात कुंडली में बुध जिस ग्रह के साथ मौजूद होते हैं, उन्हीं के अनुरूप आपको फल देने लगता है।
सामान्य शब्दों में कहें तो, शुभ ग्रहों के साथ बुध के बैठे होने पर आपको शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। वहीं, यह अशुभ ग्रहों के साथ होने पर आपको अशुभ फल प्रदान करता है। उदाहरण के रूप में, यदि बुध देव गुरु, शुक्र और बली चंद्रमा के साथ स्थित होंगे, तो आपको शुभ फल ही देंगे जबकि क्रूर एवं पापी ग्रहों शनि, राहु, केतु, मंगल और सूर्य के साथ होंगे, तो आपको मिलने वाले परिणाम अशुभ हो सकते हैं।
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जीवन पर बुध ग्रह का प्रभाव
जैसे कि हम आपको ऊपर बता चुके हैं कि बुध देव को शुभ ग्रह माना जाता है। ऐसे जातक जिन की कुंडली के बुध ग्रह लग्न भाव/पहले भाव में विराजमान होते हैं, वह बेहद सुंदर होते हैं और अपनी आयु से कम दिखाई देते हैं।
इसी प्रकार, कुंडली के लग्न भाव में बुध ग्रह के मौजूद होने पर जातक की बुद्धि तेज़, तर्क से बातचीत करने वाला और कुशल वक्ता होता है। लग्न भाव में बुध महाराज की उपस्थिति से जातक दीर्घायु और कई भाषाओं का ज्ञाता होता है। साथ ही, ऐसा व्यक्ति व्पापार में सफलता हासिल करता है।
आइए अब नज़र डालते हैं कुंडली में बुध ग्रह के कमज़ोर और मज़बूत होने पर वह आपको किस तरह के परिणाम देते है।
मजबूत बुध का प्रभाव
- वाणी, तर्क, संचार, त्वचा और व्यापार के कारक ग्रह के तौर पर कुंडली में बुध ग्रह की मज़बूत स्थिति आपको बुद्धिमान और तीव्र शक्ति वाला बनाती है।
- ऐसे व्यक्ति का संचार कौशल शानदार होता है और वह बातचीत करने में माहिर होता है।
- बलवान बुध होने पर जातक व्यापार में अपार सफलता हासिल करता है।
- इन्हें संवाद और गणित के क्षेत्र में महारत प्राप्त होती है।
कमजोर बुध का प्रभाव
- अगर किसी जातक की कुंडली में बुध दुर्बल या कमजोर होता है या क्रूर एवं पापी ग्रहों से पीड़ित होता है या फिर कुंडली के अशुभ भाव में बैठा होता है, तो व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
- बुध ग्रह के दुर्बल होने पर जातक की वाणी नकारात्मक रूप से प्रभावित होती है और कई बार वह हकलाने लग जाता है।
- दुर्बल बुध होने पर व्यक्ति में बुद्धि की कमी होती है और वह चीजों को देरी से समझता है।
- बुध के कमजोर अवस्था में होने पर व्यापार करने वाले जातक को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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बुध देव से जुड़ी 7 रोचक बातें
- बुध ग्रह एकमात्र ऐसे ग्रह हैं जो सूर्य के सबसे निकट स्थित हैं इसलिए अधिकतर यह अस्त अवस्था में रहते हैं। साथ ही, बुध देव सूर्य से एक भाव आगे या एक भाव पीछे रहते हैं।
- ज्योतिष में बुध ग्रह को नपुसंक ग्रह माना जाता है।
- बुध महाराज स्वग्रही, मूल त्रिकोण और मित्र ग्रह की राशि में उपस्थित होने पर अच्छे परिणाम देते हैं जबकि नीच राशि और शत्रु राशि में जातक को कष्ट उठाने पड़ते हैं।
- करियर के क्षेत्र में बुध ग्रह लेखन, साहित्य, पत्रकारिता, सलाहकार, अकाउंटेंट और वकील आदि को दर्शाते हैं।
- कुंडली में किसी राशि या भाव में सूर्य-बुध की युति होने पर बुधादित्य राजयोग का निर्माण होता है।
- बुध ग्रह द्वारा निर्मित योग केंद्र त्रिकोण में बेहद फलदायी माना जाता है।
- जब शुक्र देव और बुध ग्रह एक साथ युति करते हैं, तब लक्ष्मी नारायण योग का निर्माण होता है।
बुध ग्रह को मज़बूत करने के लिए करें ये सरल उपाय
- कुंडली में बुध को बलवान करने के लिए बुधवार के दिन व्रत करें और भगवान गणेश की पूजा करें। साथ ही, गणेश जी को मूंग के लड्डू का प्रसाद के रूप भोग लगाएं।
- बुध को मज़बूत बनाने के लिए बुधवार के दिन हरी वस्तुओं का दान करें और गाय को हरा चारा खिलाएं। इसके अलावा, किसी जरूरतमंद ब्राह्मण को हरी सब्जियां, हरे फल, कांसे का बर्तन और हरे वस्त्र आदि दान कर सकते हैं।
- बुध देव की कृपा पाने के लिए पूजा के समय बुध स्तोत्र का पाठ करना फलदायी होता है।
- बुधवार को पूजा करते समय बुध देव के मंत्र “ॐ बुं बुधाय नमः” या “ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः” का जाप करें।
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बुध का मीन राशि में उदय: राशि अनुसार प्रभाव और उपाय
मेष राशि
आपकी वर्तमान स्थिति को देखें, तो बुध मेष राशि के जातकों के लिए शुभ ग्रह नहीं है। तीसरे और…(विस्तार से पढ़ें)
वृषभ राशि
वृषभ राशि के जातकों के लिए बुध एक शुभ ग्रह है लेकिन वर्तमान में नीच स्थिति में होने…(विस्तार से पढ़ें)
मिथुन राशि
मिथुन राशि के जातकों को बुध का मीन राशि में उदय होने पर अपनी सेहत में सुधार देखने…(विस्तार से पढ़ें)
कर्क राशि
कर्क राशि के तीसरे और बारहवें भाव के स्वामी बुध ग्रह हैं। हालांकि, आपके बारहवें भाव…(विस्तार से पढ़ें)
सिंह राशि
सिंह राशि के जातकों के लिए बुध उनके दूसरे और ग्यारहवें भाव का स्वामी है। बुध का मीन…(विस्तार से पढ़ें)
कन्या राशि
कन्या राशि की बात करें, तो बुध इस राशि के लग्न और दसवें भाव के स्वामी हैं। बुध का मीन…(विस्तार से पढ़ें)
तुला राशि
तुला राशि के नौवें और बारहवें भाव के स्वामी बुध ग्रह हैं। नौवें भाव के स्वामी के…(विस्तार से पढ़ें)
वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि के लिए बुध बहुत अनुकूल ग्रह नहीं है क्योंकि यह आपके आठवें और ग्यारहवें…(विस्तार से पढ़ें)
धनु राशि
धनु राशि के सातवें और दसवें भाव के स्वामी बुध ग्रह हैं। सातवें और दसवें भाव के स्वामी…(विस्तार से पढ़ें)
मकर राशि
मकर राशि के लिए बुध बहुत शुभ और अत्यंत अनुकूल ग्रह हैं क्योंकि वह इस राशि के नौवें…(विस्तार से पढ़ें)
कुंभ राशि
कुंभ राशि के पांचवे और आठवें भाव के स्वामी बुध ग्रह हैं जिससे आपकी वैज्ञानिक रूप…(विस्तार से पढ़ें)
मीन राशि
मीन राशि के चौथे और सातवें भाव के स्वामी बुध ग्रह हैं और अब बुध आपके पहले…(विस्तार से पढ़ें)
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मीन राशि में बुध का उदय 31 मार्च 2025 को होगा।
ज्योतिष के अनुसार, बुध और सूर्य की युति से बुधादित्य योग बनता है।
जब कोई ग्रह सूर्य के बेहद करीब चला जाता है, तब वह ग्रह अपनी शक्तियां खो देता है और इसे ही ग्रह का अस्त होना कहते हैं।
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